ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को केवल एक धार्मिक या राजकीय कार्यक्रम मानना भूल होगी. तेहरान में आयोजित इस समारोह ने पश्चिम एशिया की राजनीति को एक बार फिर यह याद दिला दिया कि हालिया युद्धों, हवाई हमलों और सैन्य दबाव के बावजूद ईरान का "Axis of Resistance" अभी खत्म नहीं हुआ है.
खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान ने ट्रिपल H का पावर दुनिया को दिखाया है. ट्रिपल H यानी कि हमास, हिजबुल्लाह और हूती. ईरान वॉर और गाजा जंग के बाद दुनिया को ये एहसास होने लगा था कि हमास, हिज्बुल्लाह और हूती की ताकत ढह गई है. लेकिन खामेनेई के जनाजे में हमास, हिज्बुल्लाह और हूती विद्रोहियों की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी रही.
सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में तेहरान समर्थित आतंकी और विद्रोही गुटों के प्रतिनिधि शामिल हुए. हिज़्बुल्लाह और हमास के दूतों ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची से भी मुलाकात की.
तेहरान कई सालों से फिलस्तीन के हमास, लेबनान के हिज़्बुल्लाह और यमन के हूती विद्रोहियों को समर्थन देता रहा है. इन सभी को अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित कर रखा है.
ईरान ने इज़रायल-विरोधी सहयोगी गुटों के अपने नेटवर्क को "एक्सिस ऑफ़ रेसिस्टेंस" (प्रतिरोध की धुरी) का नाम दिया है. इस नेटवर्क में इराक के हथियारबंद गुट भी शामिल हैं.
हिज्बुल्लाह, हमास और हूती की और से कौन-कौन आया?
हिज़्बुल्लाह ने लेबनानी मीडिया को बताया कि तेहरान गए उसके प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व मंत्री मोहम्मद फ़नीश ने की और इसमें मारे गए और घायल सदस्यों के अधिकारी और परिवार वाले भी शामिल थे.
वहीं हमास ने एक बयान में कहा कि उसके प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उसके राजनीतिक ब्यूरो के प्रमुख मोहम्मद दरविश ने किया और इसमें बासेम नईम जैसे ब्यूरो के अन्य सदस्य भी शामिल थे. तेहरान में शनिवार को हुए समारोह में फिलिस्तीनी आतंकी गुट और हमास के सहयोगी 'इस्लामिक जिहाद' के नेता ज़ियाद अल-नखाला और हूथी ग्रुप के वरिष्ठ सदस्य ज़ैफ़ अल्लाह अल-शामी भी शामिल हुए.
पिछले कुछ वर्षों में इजरायल ने गाजा में हमास, लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन में हूती नेटवर्क को कमजोर करने के लिए लगातार सैन्य अभियान चलाए गए हैं. हालिया ईरान-इजरायल संघर्ष के दौरान भी इजरायल और अमेरिका ने दावा किया था कि ईरान समर्थित नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है. लेकिन खामेनेई के अंतिम संस्कार में इन तीनों संगठनों की उपस्थिति ने एक अलग तस्वीर पेश की.
इजरायल की चुनौती कायम है
तेहरान ने इस मंच का इस्तेमाल केवल श्रद्धांजलि देने के लिए नहीं किया. बल्कि यह दिखाने के लिए भी किया कि ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी अब भी उसके साथ खड़े हैं. हमास के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने संकेत दिया कि गाजा युद्ध के बावजूद संगठन का राजनीतिक ढांचा सक्रिय है. हिजबुल्लाह के प्रतिनिधियों ने यह संदेश दिया कि लेबनान मोर्चा अब भी इजरायल के लिए चुनौती बना हुआ है. वहीं हूती प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने लाल सागर और समुद्री व्यापार मार्गों पर ईरान के प्रभाव की याद दिलाई. ईरान युद्ध के दौरान हूतियों ने कई बार लाल सागर से जा रहे जहाजों पर हमला किया.
कुछ मिलाकर इन तीनों सगठनों की मौजूदगी से इजरायल को यह संदेश मिला है कि पश्चिम एशिया में उसके लिए चुनौतियां कम नहीं हुई हैं. हालिया सैन्य अभियानों के बावजूद तेहरान यह जताने में सफल रहा कि उसके सहयोगी समूह पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं. भले ही उनकी क्षमताओं को नुकसान पहुंचा हो, लेकिन उनका राजनीतिक अस्तित्व और क्षेत्रीय प्रभाव अभी कायम है.
विशेषज्ञों के अनुसार यह समारोह एक तरह का राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन भी था. ईरान यह दिखाना चाहता था कि उसके सहयोगी समूह केवल सैन्य संगठन नहीं हैं, बल्कि एक व्यापक राजनीतिक और वैचारिक नेटवर्क का हिस्सा हैं. यही नेटवर्क वर्षों से इजरायल और पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ प्रतिरोध की रणनीति का आधार रहा है.
यही कारण है कि खामेनेई का जनाजा केवल एक अंतिम विदाई नहीं रहा. यह तेहरान की ओर से एक भू-राजनीतिक प्रदर्शन था, जिसके जरिए दुनिया और खासकर इजरायल को यह संदेश दिया गया कि हमास, हिजबुल्लाह और हूती को खत्म मान लेना जल्दबाजी होगी.