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पहले भारत से हिल्सा मंगाई, अब बांग्लादेश ने अचानक रोका आयात... 103 परमिट रद्द

भारत से हिल्सा मछली के आयात पर बांग्लादेश ने अचानक रोक लगा दी है. 103 NOC रद्द कर दिए हैं. इससे कई कारोबारियों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जो पहले ही मछली खरीद चुके थे.

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बांग्लादेशी मछुआरे नीलामी के लिए पकड़ी गई ताजा हिल्सा मछली तैयार करते हुए. (File Photo-Getty)
बांग्लादेशी मछुआरे नीलामी के लिए पकड़ी गई ताजा हिल्सा मछली तैयार करते हुए. (File Photo-Getty)

बांग्लादेश ने भारत से हिल्सा मछली का आयात अचानक रोक दिया है. वहां के मत्स्य विभाग ने 103 नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) रद्द कर दिए हैं. ये NOC भारतीय हिल्सा के आयात के लिए जारी किए गए थे. फैसला 22 सितंबर को लिया गया. इसके बाद बांग्लादेश के बेनापोल लैंड पोर्ट से हिल्सा की आवक रुक गई.

इस फैसले से उन कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है, जिन्होंने भारत से मछली खरीद ली थी. कई कारोबारी इन खेपों को बांग्लादेश भेजने की तैयारी कर रहे थे. अब उनके सामने मछली को भारत में ही कम कीमत पर बेचने का संकट है. इसके अलावा ट्रांसपोर्ट और दूसरे आयात खर्च का नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.

बांग्लादेश के आंकड़ों के मुताबिक इस साल भारत से करीब 535 टन हिल्सा आयात की जा चुकी है. वहीं मौजूदा वित्त वर्ष में भारत से 1,739.50 टन हिल्सा मंगाने की इजाजत दी गई थी. अचानक NOC रद्द होने से बाकी आयात पर रोक लग गई है.

भारत से आने वाली हिल्सा मुख्य रूप से गुजरात से बताई जा रही है. इसे गुजरात के भरूच इलाके से मंगाया जा रहा था. बांग्लादेश के बेनापोल पोर्ट के रास्ते यह मछली वहां पहुंचती है. कारोबारी इसे स्थानीय बाजारों में बेचते हैं.

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आखिर बांग्लादेश ने क्यों रोका आयात?

दरअसल, बांग्लादेश के मत्स्य विभाग ने आयात रोकने की कोई स्पष्ट वजह आधिकारिक तौर पर नहीं बताई है. हालांकि वहां के कारोबार से जुड़े लोगों ने कुछ संभावित कारण बताए हैं. इनमें भारतीय हिल्सा को स्थानीय या पद्मा हिल्सा बताकर बेचने की आशंका भी शामिल है. 

इसके अलावा कम कीमत दिखाकर आयात करने और मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका का भी जिक्र किया गया है. एक वजह घरेलू हिल्सा उत्पादन को बढ़ावा देना भी बताई जा रही है. ये सभी संभावित वजहें हैं. सरकार की ओर से इन पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

मालूम हो, बांग्लादेश में पद्मा हिल्सा को काफी पसंद किया जाता है. इसे ज्यादा स्वादिष्ट और मुलायम माना जाता है. गुजरात की हिल्सा में रो ज्यादा होने की वजह से इसका स्वाद अलग बताया जाता है. कीमत कम होने के कारण इसका इस्तेमाल दूसरे कारोबार में भी किया जाता है.

भारत से आने वाली हिल्सा ने बांग्लादेश में स्थानीय मांग को पूरा करने में भी मदद की है. बांग्लादेश में हिल्सा का उत्पादन पिछले कुछ सालों में कम हुआ है. ऐसे में भारतीय मछली की सप्लाई कारोबारियों के लिए अहम हो गई थी.

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बांग्लादेश से भारत आने वाली हिल्सा पर भी नजर

भारत से हिल्सा का आयात रोकने के बाद अब भारत को बांग्लादेश से मिलने वाली पद्मा हिल्सा की खेप पर भी नजर है. हर साल दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश की ओर से भारत को सीमित मात्रा में हिल्सा भेजी जाती रही है. हालांकि इस साल अभी तक ऐसी किसी खेप की घोषणा नहीं हुई है.

2012 में बांग्लादेश ने हिल्सा के निर्यात पर रोक लगा दी थी. इसके बाद दुर्गा पूजा के आसपास सीमित मात्रा में मछली भारत भेजी जाती रही. 2025 में भी करीब 1,200 टन हिल्सा भारत भेजने की परमिशन दी गई थी. हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक इसका एक छोटा हिस्सा ही भारत पहुंच पाया था.

फिलहाल भारत से हिल्सा आयात रोकने के बांग्लादेश के फैसले से कारोबारी परेशान हैं. कई आयातकों का कहना है कि उन्होंने इजाजत मिलने के बाद मछली खरीद ली थी. अब अचानक रोक लगने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. बांग्लादेश सरकार ने अभी इस फैसले की विस्तृत वजह सार्वजनिक नहीं की है.
 

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