scorecardresearch
 

इंसानों में सुअर की किडनी लगने की उम्मीद, भारत में शुरू हुई तैैयारी, इस अस्पताल में बना ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन डिपार्टमेंट

भारत में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर की कमी एक बड़ी समस्या है, लेकिन अमेरिका में जेनेटिकली मॉडिफाइड सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट के सफल प्रयोग ने नई उम्मीद जगाई है. दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन विभाग शुरू किया गया है.

Advertisement
X
सर्जरी करते डॉक्टर
सर्जरी करते डॉक्टर

किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर मिलना आज भी एक बड़ी समस्या है, लेकिन आने वाले दिनों में इसके लिए एक नया रास्ता खुलने की उम्मीद है. अमेरिका में एक मरीज को जेनेटिकली मॉडिफाइड सुअर की किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी. इससे 271 दिनों तक उसी किडनी के सहारे ये व्यक्ति रहा और उसे डायलिसिस की जरूरत नहीं पड़ी. हालांकि इसके बाद में इस मरीज को इंसानी किडनी ट्रांसप्लांट की गई. फिर भी यह मामला अब तक किसी जीवित इंसान में सबसे लंबे समय तक सफल पिग-किडनी ट्रांसप्लांट का केस है. इस मामले से प्रेरणा लेते हुए अब भारत में भी इस दिशा में काम शुरू हो रहा है.

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल ने इसके लिए ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन का अलग विभाग शुरू किया है. वहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इस क्षेत्र के लिए गाइडलाइंस तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है. भारत में अस्पताल में इस तरह के विभाग के खुलने से इंसानों में सुअर का किडनी ट्रांसप्लांट होने की उम्मीद जगी है. 

किडनी ट्रांसप्लांट की मांग सबसे ज्यादा रहती है

देश में  किडनी समेत अंगों की जरूरत बहुत ज्यादा है, लेकिन डोनर काफी कम हैं.  मार्च 2026 तक देश में करीब 89,839 लोग अंगों के लिए नेशनल ट्रांसप्लांट वेटिंग लिस्ट में थे. 2025 में भारत में 20,138 ऑर्गन ट्रांसप्लांट हुए, जो अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है. 2024 में देश में 13,476 किडनी ट्रांसप्लांट हुए. इनमें 11,558 ट्रांसप्लांट जीवित डोनर से और 1,918 मृत डोनर से किए गए. ऐसे में वैज्ञानिकों की कोशिश है कि भविष्य में इंसानी डोनर पर निर्भरता कम करने के लिए जानवरों से सुरक्षित अंग उपलब्ध कराए जा सकें. इसके लिए पिग की किडनी को इंसान में ट्रांसप्लांट किए जाने पर काम किया जाएगा. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: AIIMS में 13 साल तक इलाज के इंतजार में रही बच्ची, हार्ट- लंग्स ट्रांसप्लांट से पहले ही चली गई जान

सुअर की किडनी को इंसान के शरीर के लिए कैसे बनाया जाता है?

यह सामान्य सुअर की किडनी नहीं होती ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन  के लिए खास तौर पर तैयार किए गए सूअरों के जीन में बदलाव किया जाता है.
वैज्ञानिक CRISPR-Cas9 जैसी जीन-एडिटिंग तकनीक की मदद से कुछ ऐसे जीन को हटाते हैं जो इंसान के इम्यून सिस्टम में तेज प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं, कुछ मामलों में ऐसे मानव जीन भी जोड़े जाते हैं जो शरीर में इम्यून रिस्पॉन्स, खून जमने और पूरे सिस्टम जैसे प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. सुअर को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उसके अंगों का आकार इंसानों के अंगों के करीब होता है .

यह भी पढ़ें: आंखों की रोशनी चली गई है तो मदद करेगा आर्टिफिशियल कॉर्निया, दिल्ली AIIMS में मरीजों में किया जा रहा ट्रांसप्लांट

सर गंगाराम अस्पताल में शुरू हुआ विभाग

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में ज़ेनोट्रांसप्लांटेशन विभाग शुरू किया गया है. इस नए डिपार्टमेंट में डायरेक्टर के तौर पर शामिल हुए और अमेरिका के थॉमस ई. स्टार्ज़ल ट्रांसप्लांटेशन इंस्टीट्यूट से जुड़े डॉ. शिखर त्रिपाठी ने इस बारे में India today.in को बताया कि ट्रांसप्लांट ऑपरेशन से काफी पहले ही इसकी प्रक्रिया शुरू हो जाती है. उनके मुताबिक, पिग सबसे अच्छे विकल्प के तौर पर सामने आए हैं क्योंकि उनके अंगों का साइज इंसानी अंगों के लगभग बराबर होता है, साथ ही उन्हें तेजी से पाला-बढ़ाया जा सकता है, उनके जेनेटिक मटीरियल में बदलाव किया जा सकता है और प्रक्रियाओं के दौरान उन्हें संभालना आसान होता है.हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में तेज़ी आई है, और रिसर्च ग्रुप तथा बायोटेक्नोलॉजी कंपनियाँ ज़्यादा एडवांस्ड जीन-एडिटेड सूअर विकसित कर रही हैं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement