
अमेरिका की मुस्लिम सांसद इल्हान उमर ने चुनावी चुनौतियों और कानूनी जांच के बीच अपनी सीट बचा ली है. डेमोक्रेटिक पार्टी की नेता इल्हान ने मिनेसोटा के 5वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार जॉन नागेल को हराकर लगातार पांचवीं बार अमेरिकी प्रतिनिधि सभा का चुनाव जीत लिया है. उनकी जीत की पुष्टि सीबीएस न्यूज ने की है. चुनाव से कुछ हफ्ते पहले उनके वॉशिंगटन स्थित घर पर संघीय एजेंसियों ने तलाशी ली थी. इसके बावजूद इल्हान उमर ने जीत दर्ज की.
12 अक्टूबर को होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशन के एजेंटों ने इल्हान उमर के वॉशिंगटन स्थित घर की तलाशी ली थी. अमेरिकी न्याय विभाग ने इसे एक जारी आपराधिक जांच का हिस्सा बताया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच उनके बचपन के इमिग्रेशन दस्तावेजों और उनके पिता की ओर से जमा कराए गए कागजात से जुड़ी है. हालांकि, इल्हान उमर ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है.
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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस जांच को लेकर इल्हान उमर पर निशाना साधा था. उन्होंने उन्हें 'बेईमान' और अमेरिका के लिए शर्मिंदगी बताया था. ट्रंप ने यह तक कहा था कि जांच में गड़बड़ी मिलने पर इल्हान उमर को जेल या देश से निकाले जाने का सामना करना पड़ सकता है. इल्हान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनका नाम हमेशा से इल्हान उमर रहा है. चुनाव में जीत के बाद इल्हान ने सोशल मीडिया पर कहा कि मिनेसोटा के लोगों ने साफ संदेश दिया है. उन्होंने लिखा, "हम ट्रंप को हमें चुप नहीं कराने देंगे."
भारत में क्यों होती है इल्हान उमर की चर्चा?
इल्हान उमर भारत में अपने बयानों और कश्मीर से जुड़े रुख को लेकर विवादों में रही हैं. अप्रैल 2022 में वह पाकिस्तान के दौरे पर गई थीं और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) का दौरा भी किया था. भारत के विदेश मंत्रालय ने इस यात्रा की निंदा की थी. मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि यह भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन है.
जून 2022 में इल्हान उमर ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भारत में मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन की निंदा करने वाला प्रस्ताव पेश किया था. इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री से भारत को 'कंट्री ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न' घोषित करने की मांग की गई थी. इस प्रस्ताव में मुस्लिम, ईसाई, सिख, दलित और आदिवासी समुदायों के अधिकारों का मुद्दा उठाया गया था.
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इल्हान उमर जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) जैसे मुद्दों पर भी भारत सरकार की आलोचना करती रही हैं. उन्होंने भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं. इन्हीं बयानों और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की यात्रा के चलते भारत में उनके रुख को लेकर लगातार बहस होती रही है.