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सबमें बारूद होता है... फिर कोई पटाखा आसमान में जाता है तो कोई आवाज क्यों करता है?

सभी पटाखों में बारूद और केमिकल होने के बावजूद उनका असर अलग-अलग क्यों होता है? कोई पटाखा आसमान में उड़ता है, कोई जमीन पर गोल-गोल घूमता है और कोई रंग-बिरंगी रोशनी फैलाता है.

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आमतौर पर लोगों को लगता है कि पटाखों में बारूद भरा होता है और उसे आग दिखाते ही धमाका हो जाता है. ( Photo: ITG)
आमतौर पर लोगों को लगता है कि पटाखों में बारूद भरा होता है और उसे आग दिखाते ही धमाका हो जाता है. ( Photo: ITG)

दिवाली हो या कोई दूसरा त्योहार, पटाखे जलाना कई लोगों को पसंद होता है. कोई पटाखा जलते ही तेज आवाज करता है, तो कोई आसमान में जाकर रंग-बिरंगी रोशनी बिखेरता है. कुछ पटाखे जमीन पर रखकर जलाए जाते हैं और वे गोल-गोल घूमने लगते हैं. वहीं, कुछ पटाखे जलते ही ऊपर की तरफ उड़ जाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जब इन सभी पटाखों में बारूद और दूसरे केमिकल का इस्तेमाल होता है, तो उनका काम करने का तरीका अलग-अलग क्यों होता है? आखिर एक पटाखा आसमान में कैसे पहुंच जाता है और दूसरा जमीन पर चक्कर क्यों लगाने लगता है? इसका जवाब पटाखों के अंदर की बनावट और उनमें होने वाली रासायनिक प्रक्रिया में छिपा है.

पटाखों में सिर्फ बारूद होना ही काफी नहीं
आमतौर पर लोगों को लगता है कि पटाखों में बारूद भरा होता है और उसे आग दिखाते ही धमाका हो जाता है. लेकिन हर पटाखे की बनावट एक जैसी नहीं होती. अलग-अलग पटाखों को अलग तरह का असर पैदा करने के लिए बनाया जाता है. किसी पटाखे को आवाज करने के लिए तैयार किया जाता है, किसी को रोशनी फैलाने के लिए और किसी को हवा में उड़ने या जमीन पर घूमने के लिए. इसके लिए पटाखे के अंदर इस्तेमाल होने वाले केमिकल, उनकी मात्रा और उनकी व्यवस्था अलग रखी जाती है. यानी पटाखा क्या करेगा, यह सिर्फ उसमें मौजूद बारूद से नहीं, बल्कि उसकी पूरी बनावट से तय होता है.

आसमान में उड़ने वाले पटाखे कैसे ऊपर जाते हैं?
आसमान में उड़ने वाले पटाखों को रॉकेट या हवाई पटाखे कहा जाता है. इनके अंदर एक खास तरह की व्यवस्था होती है, जो जलने पर गैस पैदा करती है. यह गैस तेजी से नीचे की तरफ निकलती है और उसके उलट दिशा में पटाखे को ऊपर की तरफ धक्का मिलता है. इसे समझने के लिए एक आसान उदाहरण लेते हैं. जब किसी गुब्बारे में हवा भरकर उसे बिना बांधे छोड़ दिया जाता है, तो हवा एक तरफ से बाहर निकलती है और गुब्बारा दूसरी तरफ भागने लगता है. रॉकेट पटाखा भी कुछ इसी सिद्धांत पर काम करता है.

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इसे साइंस की भाषा में न्यूटन का तीसरा नियम कहते हैं. इसके अनुसार हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है. जब पटाखा ऊपर पहुंचता है, तो उसके अंदर मौजूद दूसरा हिस्सा जलकर रंग-बिरंगी रोशनी और चमक पैदा कर सकता है. इसी वजह से आसमान में अलग-अलग रंग और आकार दिखाई देते हैं.

जमीन पर रखे पटाखे गोल-गोल क्यों घूमते हैं?
अब बात करते हैं जमीन पर घूमने वाले पटाखों की. दिवाली पर आपने चकरी जरूर देखी होगी. इसे जलाने पर यह जमीन पर तेजी से गोल-गोल घूमने लगती है. इसके पीछे भी साइंस का एक खास नियम काम करता है. चकरी के अंदर ऐसी व्यवस्था होती है, जिससे जलने पर गैस और गर्म धुआं किनारों पर बने छेदों से बाहर निकलता है. जब गैस एक तरफ से बाहर निकलती है, तो उससे पैदा होने वाला धक्का चकरी को उल्टी दिशा में घुमाता है. लगातार गैस निकलने से चकरी घूमती रहती है.

इसे समझने के लिए एक घूमने वाले स्प्रिंकलर का उदाहरण ले सकते हैं. जब उसमें से पानी अलग-अलग दिशाओं में निकलता है, तो वह घूमने लगता है. चकरी में भी कुछ ऐसा ही सिद्धांत काम करता है.

अनार वाला पटाखा ऊपर क्यों नहीं उड़ता?
अनार भी दिवाली का एक लोकप्रिय पटाखा है. इसे जलाने पर यह जमीन पर ही रहता है और इसके ऊपर से चिंगारियां और रंगीन रोशनी फव्वारे की तरह निकलती है. इसकी बनावट ऐसी होती है कि जलने से पैदा होने वाली गर्म गैस और चिंगारियां ऊपर की तरफ निकलती हैं. लेकिन इसमें रॉकेट की तरह खुद को ऊपर ले जाने वाली व्यवस्था नहीं होती. इसी वजह से अनार अपनी जगह पर रहता है और ऊपर की तरफ रोशनी का फव्वारा बनाता है.

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आवाज करने वाले पटाखे अलग कैसे होते हैं?
कुछ पटाखों का मुख्य काम तेज आवाज पैदा करना होता है. इनके अंदर मौजूद केमिकल मिक्सचर तेजी से प्रतिक्रिया करता है. इस दौरान बहुत कम समय में गर्म गैस बनती है और आसपास की हवा में अचानक दबाव बढ़ता है. हवा में पैदा होने वाली इसी तेज हलचल से धमाके जैसी आवाज सुनाई देती है. यानी पटाखों में आवाज, रोशनी, उड़ान और घूमने का असर उनकी बनावट और रासायनिक प्रक्रिया पर निर्भर करता है.

आखिर सभी पटाखों में बारूद होने के बावजूद असर अलग क्यों होता है?
इसका सीधा जवाब है कि हर पटाखे को अलग उद्देश्य से बनाया जाता है. किसी में गैस को एक दिशा में बाहर निकालने की व्यवस्था होती है, किसी में चिंगारियां ऊपर भेजने की और किसी में तेजी से आवाज पैदा करने वाली प्रतिक्रिया होती है. इसलिए सिर्फ बारूद होने से कोई पटाखा अपने आप आसमान में नहीं उड़ता या जमीन पर नहीं घूमता. उसके अंदर की बनावट और गैस निकलने की दिशा ही उसका काम तय करती है.

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