“सऊदी दुश्मन को यह समझना होगा कि यमनी लोगों के खिलाफ बिना किसी जवाबी कार्रवाई, रोक-टोक या कीमत चुकाए अपराध और नरसंहार करने का दौर अब खत्म हो चुका है.”
ये बयान नसीरुद्दीन आमेर का है. नसीरुद्दीन हूती मीडिया ऑफिस के डिप्टी हेड हैं. वे हूती विद्रोहियों द्वारा चलाई जा रही सबा न्यूज़ एजेंसी को चलाते हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर इन हमलों की तारीफ़ की.
हूतियों ने सऊदी अरब पर हुए हमलों के बारे में तो ज्यादा जानकारी नहीं दी है, लेकिन कहा है कि सऊदी अरब के अंदरूनी इलाकों में "बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान" के बारे में एक बयान जारी किया जाएगा. अंदरूनी इलाकों के लिए उन्होंने अंग्रेजी के 'डीप इनसाइड' शब्द का इस्तेमाल किया. हूतियों के इस बयान से स्पष्ट है कि इस बार उन्होंने सऊदी अरब के घर में घुसकर हमला किया है.
दरअसल मध्य-पूर्व में जंग की आग अब सऊदी अरब की सरहद के भीतर पहुंच चुकी है. यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में एक साथ कई ठिकानों को निशाना बनाया.
हूतियों ने कहां-कहां हमला किया
सऊदी गठबंधन और ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार हूती विद्रोहियों ने अबहा, खमीस मुशैत, जाज़ान और नजरान में नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बनाया गया.
हूती मीडिया का दावा है कि अबहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, किंग खालिद एयरबेस और अरामको की रिफाइनरी पर मिसाइलें और ड्रोन दागे गए. आग लगने और कुछ एनर्जी यूनिट के अस्थायी रूप से ठप होने की खबरें आईं. इस हमले में कम से कम 73 नागरिक घायल हुए, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ सऊदी अरब पर हूतियों का हमला है या फिर हाल में बने 'मक्का डिफेंस पैक्ट' की पहली बड़ी परीक्षा?
क्योंकि महज एक महीने पहले 7 अगस्त को मक्का में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक ऐसा रक्षा समझौता किया था, जिसके तहत तीनों देशों ने साफ कहा था कि एक सदस्य पर हमला, तीनों पर हमला माना जाएगा.
यमन में लड़ रहे सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने एक बयान में कहा कि मंगलवार तड़के हुए हमलों में सऊदी शहरों अबहा, जाज़ान, नजरान और खमीस मुशैत में "नागरिक और आर्थिक केंद्रों" को निशाना बनाया गया.
ताजा हमलों का केंद्र सऊदी अरब का दक्षिणी इलाका रहा, जो यमन की सीमा के बेहद करीब है. जाजान में सऊदी अरामको का बड़ा तेल परिसर है, जबकि अबहा और खमीस मुशैत रणनीतिक सैन्य और विमानन ढांचे के लिए अहम हैं.
जाजान में 4 लाख बैरल प्रतिदिन क्षमता वाली रिफाइनरी और उससे जुड़ा ऊर्जा ढांचा मौजूद है. इन हमलों से तेल की कीमतों पर असर पड़ा है. सऊदी एनर्जी मिनिस्ट्री के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1 डॉलर बढ़कर $98/BBL हो गए, जबकि U.S. क्रूड फ्यूचर्स $2 से ज़्यादा बढ़कर $93.65/BBL हो गए.
हूतियों की रणनीति सिर्फ मिसाइल या ड्रोन दागने तक सीमित नहीं है. वे सऊदी अरब के उस आर्थिक और सैन्य ढांचे को निशाना बना रहे हैं, जिस पर देश की सुरक्षा और ऊर्जा व्यवस्था टिकी हुई है.
जेल पर हमले का जवाब
ये हमले तब हुए जब विद्रोहियों ने यमन के उत्तरी प्रांत जफ़ में एक जेल पर हुए हवाई हमले के लिए सऊदी अरब को ज़िम्मेदार ठहराया. हूतियों के मुताबिक इस हमले में एक बच्चे समेत कम से कम सात लोगों की मौत हो गई और सात अन्य घायल हो गए.
यमन के सबसे ज्यादा आबादी वाले इलाकों और उत्तरी हिस्से के ज़्यादातर हिस्सों पर कब्ज़ा रखने वाले हूती विद्रोही, जुलाई में रियाद के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी का ऐलान करने के बाद से ही सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं. इन हमलों में लाल सागर में सऊदी अरब के जहाज़ों को निशाना बनाया गया है.
मक्का पैक्ट के का बड़ा इम्तिहान?
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने जब मक्का पैक्ट पर हस्ताक्षर किया तो खूब शोर किया. इन देशों को लग रहा था कि इसके जरिये वे अपने पड़ोसियों पर दबाव बना पाएंगे. लेकिन महज एक विद्रोही संगठन हूती ने इस दावे की धज्जियां उड़ा दी है.
मक्का डिफेंस एग्रीमेंट को पश्चिम एशिया में एक नए सामूहिक सुरक्षा ढांचे के तौर पर देखा जा रहा है. सऊदी अरब के पास पैसा और रणनीतिक लोकेशन है, तुर्की के पास क्षेत्र की बड़ी और आधुनिक सेनाओं में से एक है, जबकि पाकिस्तान परमाणु हथियारों से लैस देश है.
समझौते में सामूहिक रक्षा का सिद्धांत रखा गया है. यानी किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला सभी के खिलाफ हमला माना जाएगा.
लेकिन अब सवाल है कि सऊदी अरब पर इतने भयानक हमले के बाद पाकिस्तान और तुर्की क्या करेंगे? यही इस गठबंधन की असली परीक्षा है।
सऊदी अरब के लिए चुनौती यह है कि वह हूतियों को जवाब भी दे और संघर्ष को एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध में बदलने से भी रोके. गौरतलब है कि हूती को ईरान का समर्थन हासिल है.
ऐसे में सऊदी अरब पर बड़े हमले का मतलब क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर सीधा दबाव है.
अब देखना यह है कि क्या तुर्की और पाकिस्तान इस हमले को सिर्फ सऊदी अरब और हूतियों के बीच का संघर्ष मानेंगे? या मक्का समझौते के सामूहिक रक्षा सिद्धांत को जमीन पर उतारेंगे?