सूडान के पश्चिमी कोर्दोफान प्रांत में सोने की एक खदान धंसने से कम से कम 67 लोगों की मौत हो गई. हादसा नुहुद शहर के अल-जारा सोने की खदान में हुआ. स्थानीय मेडिकल ग्रुप और हादसे में बचे लोगों के मुताबिक, मंगलवार देर रात खदान का एक हिस्सा अचानक धंस गया. मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका है और राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है.
हादसे वाली जगह सूडान के अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के नियंत्रण वाले इलाके में है. आरएसएफ और देश की सेना के बीच तीन साल से ज्यादा समय से संघर्ष चल रहा है. इस वजह से दूरदराज के इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
मलबे में अब भी फंसे हो सकते हैं मजदूर
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, खदान धंसने के बाद कई मजदूर लापता हैं. मेडिकल समूह ने आशंका जताई है कि बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. स्थानीय लोगों ने भी बताया कि कुछ मजदूर अब भी जमीन के नीचे जिंदा हो सकते हैं और उन्हें जल्द बाहर निकालने की जरूरत है.
रॉयटर्स के मुताबिक, स्थानीय अधिकार समूह कोर्दोफान ऑब्जर्वेटरी ने बताया कि अल-जारा खदान के आसपास कई खनन सुरंगें धंस गईं. समूह के अनुसार, 70 से ज्यादा छोटे स्तर पर खनन करने वाले मजदूरों की मौत हो चुकी है या वे लापता हैं.
समूह ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि मंगलवार को एक व्यक्ति खदान से बाहर निकलने में कामयाब रहा था. उसने बताया कि कुछ अन्य मजदूर अभी भी भूमिगत फंसे हुए हैं. स्थानीय लोगों ने साधारण औजारों की मदद से बचाव की कोशिश की, लेकिन जमीन के रेतीले और कमजोर होने के कारण इसमें मुश्किल आ रही है. बताया गया कि अब तक कोई विशेष प्रशिक्षित बचाव दल मौके पर नहीं पहुंचा है.
सुरक्षा इंतजामों की कमी बनी बड़ी वजह
तीन स्थानीय सूत्रों ने खदान में सुरक्षा नियमों और बचाव उपकरणों की कमी को हादसे में बड़ी संख्या में लोगों की मौत की वजह बताया. सूडान अफ्रीका के बड़े सोना उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन यहां सोने का बड़ा हिस्सा छोटे स्तर पर होने वाले असंगठित और जोखिम भरे खनन से निकाला जाता है.
स्थानीय अधिकार समूह के मुताबिक, खनन गतिविधियों से निकलने वाला सोना बड़े पैमाने पर देश से बाहर तस्करी के जरिए भेजा जाता है. पश्चिमी कोर्दोफान में सोने का कारोबार आर्थिक रूप से भी अहम है और यह क्षेत्र नियंत्रित करने वाले RSF के लिए भी खनन से होने वाली आय एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत मानी जाती है.