उत्तर प्रदेश के अमेठी में बेसिक शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं. शाहगढ़ ब्लॉक के पड़री प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक वैष्णवी नंदन शुक्ला को गंभीर आरोपों की जांच के बाद 14 तारीख को निलंबित कर दिया गया. उन पर महिला रसोइयों के साथ अश्लील और आपत्तिजनक टिप्पणी, धमकी, अभद्र व्यवहार समेत कई आरोप लगाए गए थे. हालांकि, शिकायतकर्ता रसोइया फूलमती अब इन आरोपों से इनकार कर रही हैं.
फूलमती का कहना है कि वह स्कूल में खाना बनाने का काम करती हैं. शिक्षक उनसे सिर्फ इतना कहते थे कि बच्चों के पढ़ने पर ही उनकी नौकरी रहेगी. उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से कोई शिकायत नहीं की गई और न ही कोई अधिकारी उनके पास जांच के लिए आया. वहीं, शिक्षक का कहना है कि रसोइया उनकी मां की उम्र की हैं और उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं.
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इस मामले में जांच अधिकारी बनाए गए मुसाफिरखाना खंड शिक्षा अधिकारी सतीश सिंह की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई. हालांकि, जांच के दौरान शिक्षक पर अश्लील भाषा के आरोप की जांच नहीं किए जाने की बात भी सामने आई. दूसरी ओर, खंड शिक्षा अधिकारी ममता सरकार ने बताया कि शिक्षक पर रसोइया द्वारा अश्लील कमेंट समेत कई आरोप लगाए गए थे और इसकी जांच दूसरे अधिकारी ने की थी. उन्होंने खुद भी विद्यालय का कई बार निरीक्षण किया, लेकिन उन्हें ऐसा कुछ सामने नहीं मिला.
रसोइया की संख्या को लेकर हुआ था विवाद
शिक्षक के खिलाफ शिक्षण कार्य में लापरवाही, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने, समय से पहले स्कूल छोड़ने और विद्यालय समय में शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने के आरोप भी जांच के दायरे में बताए गए हैं. छात्रों, अभिभावकों और कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार तथा विभागीय अभिलेखों के दुरुपयोग से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं.
शिक्षक वैष्णवी नंदन शुक्ला ने बताया कि स्कूल में रसोइया चयन को लेकर करीब एक साल से विवाद चल रहा था. उनका कहना है कि 25 बच्चों पर एक रसोइया रखने का नियम है, जबकि विद्यालय में दो रसोइया थीं. इसी वजह से एक को हटाने की बात कही गई थी. शिक्षक का आरोप है कि इसी विवाद और पुरानी रंजिश के चलते उन्हें राजनीतिक तरीके से फंसाया गया.

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक राम किशुन ने कहा कि उन्हें निलंबन आदेश मिला था, लेकिन बाकी आरोपों की जानकारी उन्हें नहीं है. उन्होंने बताया कि रसोइया की नियुक्ति को लेकर कुछ विवाद जरूर था, लेकिन वह समाप्त हो चुका था. शिक्षक का यह भी दावा है कि विभाग में हुए कथित करोड़ों रुपये के फंड घोटाले की सीबीआई जांच के दौरान वह पीछे से शिकायतकर्ता का समर्थन करते थे और अधिकारी लंबे समय से उनकी कमी तलाश रहे थे. यह शिक्षक का आरोप है.
शिकायत, जांच और कार्रवाई पर उठे सवाल
मुसाफिरखाना खंड शिक्षा अधिकारी से फोन पर हुई बातचीत में यह भी बताया गया कि रसोइया की शिकायत पर जांच नहीं हुई थी, बल्कि ग्रामीणों की ओर से शिक्षक के विद्यालय नहीं आने की शिकायत मिली थी. वहीं विभाग की ओर से शिक्षक के खिलाफ रसोइया से जुड़े आरोपों की जांच का आधार बताया गया है. ऐसे में शिकायत और जांच को लेकर अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं.
फूलमती ने शिकायत से साफ इनकार किया है. जबकि शिक्षक ने रसोइया को अपनी मां की उम्र का बताते हुए कार्रवाई को राजनीति से प्रेरित बताया. अब इस पूरे मामले में शिकायत, जांच रिपोर्ट और निलंबन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं. मामला अमेठी के शाहगढ़ ब्लॉक स्थित पड़री प्राथमिक विद्यालय का है.