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21 दिन, 1200 स्कूल, 6500 गिरफ्तारियां... छात्रों के गुस्से से सुलगा फ्रांस, जानिए अब तक का पूरा अपडेट

फ्रांस में शिक्षा की बदहाली को लेकर शुरु हुआ प्रदर्शन काफी उग्र हो चुका है. 21 दिन में 6,500 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं जबकि 24 स्कूलों को आग के हवाले कर दिया गया और सैकड़ों स्कूलों को बंद कर दिया गया है. जानिए 21 सितंबर से शुरु हुए बवाल में अब तक क्या हुआ.

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मंगलवार को 2.66 लाख लोग सड़कों पर उतरे (Photo-Reuters)
मंगलवार को 2.66 लाख लोग सड़कों पर उतरे (Photo-Reuters)

फ्रांस में छात्रों की मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब देश के इतिहास में सबसे बड़ा छात्र विद्रोह बन गया है. प्रदर्शनकर्ताओं ने मांग रखी कि जर्जर और टूटी हुई स्कूल की इमारतों की हालत ठीक हो, शिक्षकों की कमी पूरी की जाए, क्लास में छात्रों के बराबर पर्याप्त टेबल-कुर्सी रखे जाएं और शिक्षा का बजट बढ़ाया जाए.

कई स्कूलों में पानी का रिसाव, चूहे और टॉयलेट में दरवाजा तक ना होने की बातें सामने आई. इन्ही मुद्दों पर 21 सितंबर को क्रेटेल के स्कूल में छात्रों ने गेट बंद किया और देखते ही देखते 1200 से ज्यादा स्कूलों में तालाबंदी कर दी गई. 

इसके बाद मंगलवार 6 अक्टूबर को आंदोलन ने सबसे आक्रामक रूप लिया. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2.66 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जिनमें 56 हजार सिर्फ पेरिस में थे. वहीं आयोजकों ने यह संख्या 4.5 लाख बताई. पेरिस, लियोन, मार्सेल, स्ट्रासबर्ग, रेनेस और टूलूज में पुलिस और छात्रों में झड़प हुई. इस दैरान वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए. 

शिक्षा मंत्री एडवर्ड जेफ्रे के मुताबिक, अब तक 24 स्कूलों को आग लगा दी गई है या तोड़फोड़ हुई है, 78 कर्मचारी घायल हैं और 30 हजार छात्रों की पढ़ाई प्रभावित है. वहीं 500 स्कूलों में पढ़ाई पूरी तरह बंद है.

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पुलिस कार्रवाई पर मचा बवाल 

आंदोलन तब और भड़का जब सोमवार को लेंस में 15 साल के छात्र का हाथ पुलिस के ग्रेनेड से उड़ गया. जानकारी के मुताबिक, छात्र ने ग्रेनेड हाथ में उठा लिया था. दूसरी घटना पेरिस की है जहां 14 साल के छात्र के कई दांत आंसू गैस के गोले से टूट गए.  अब तक 6,500 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें 85% नाबालिग हैं. मंगलवार को ही 488 लोगों को हिरासत में लिया गया. 

यह भी पढ़ें: फ्रांस में छात्र प्रदर्शन: अबतक 5 हजार गिरफ्तार, इनमें 87% नाबालिग

किसने क्या कहा?

प्रदर्शन में पुलिस द्वारा कि गई कार्रवाई को सही ठहराते हुए गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि पुलिस ने वहीं एक्शन लिया जहां हिंसा हुई. प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी मिला-जुला बयान दिया और कहा कि जहां हिंसा होगी, वहां पुलिस कार्रवाई करेगी. साथ ही उन्होंने स्कूली छात्रों की क्लासेस भी एक हफ्ते के लिए सस्पेंड करने का ऐलान किया. इसके अलावा राष्ट्रपति मैक्रों ने भी मामले पर इमरजेंसी मीटिंग बुलाई है.

वहीं दूसरी तरफ छात्र यूनियनों ने गुरुवार को फिर प्रदर्शन का ऐलान किया है. सरकार द्वारा 2027 के शिक्षा बजट में जो 54 अरब यूरो की कटौती की गई उसने भी इन प्रदर्शनों में आग में घी डालने की तरह काम किया. अब चुनाव से ठीक 6 महीने पहले मैक्रों सरकार के लिए स्कूलों का मुद्दा सबसे बड़ा राजनीतिक संकट बनता दिख रहा है.

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