फ्रांस में खराब शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में संसाधनों की कमी को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार बड़ा होता जा रहा है. इस आंदोलन का सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि प्रदर्शन शुरू होने के बाद गिरफ्तार किए गए 5,000 से ज्यादा लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग हैं.
यानी बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां 18 साल से कम उम्र के छात्रों की हुई हैं. प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, इस आंदोलन के दौरान 85 टीचिंग स्टाफ भी घायल हुए हैं.
मंगलवार को फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों की मांग को लेकर छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है. फ्रांस की राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त प्रदर्शन किया. फ्रांस के कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे. और शिक्षा सुधार के लिए छात्रों का उग्र प्रदर्शन पर पुलिस ने छोड़े आंसू गैस के गोले.
गृह मंत्रालय के अनुसार इस आंदोलन में अब तक करीब 2.5 लाख से ज्यादा लोग शामिल हो चुके हैं, जबकि आयोजकों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की संख्या 4.5 लाख से अधिक थी. इस दौरान कम से कम 488 लोगों को गिरफ्तार किया गया और सुरक्षा बलों के 43 सदस्य घायल हुए. इस आंदोलन का मुख्य कारण स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी और जर्जर स्कूल इमारतों की मरम्मत न होना है
छात्रों का क्या कहना है?
छात्रों का कहना है कि उनके स्कूलों में पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं हैं. कई जगह शिक्षकों की कमी है, कक्षाएं और स्कूल की इमारतें खराब हालत में हैं और टाइम-टेबल भी काफी भारी है. छात्रों का यह भी कहना है कि गर्मी बढ़ने के बावजूद कई स्कूलों में उससे निपटने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है.
पेरिस के पास रहने वाले 17 साल के छात्र थॉमस ने बताया कि उनके स्कूल में कुछ कक्षाओं में डेस्क और कुर्सियों की कमी है. बाथरूम में दरवाजे, टॉयलेट पेपर और साबुन जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं. उनका कहना है कि छात्र सिर्फ पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल चाहते हैं.
क्या प्रदर्शन के दौरान कहीं हिंसा भी हुई हैं?
प्रदर्शन के दौरान कई जगह स्थिति हिंसक भी हुई. कुछ प्रदर्शनकारियों ने आगजनी और तोड़फोड़ की, जबकि पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और दंगा-रोधी हथियारों का इस्तेमाल किया. एक घटना में 15 साल के किशोर का हाथ कट गया. इसके बाद छात्रों और उनके माता-पिता में नाराजगी बढ़ गई.
इस आंदोलन में शिक्षक, अभिभावक और यूनियन भी छात्रों के समर्थन में सामने आए हैं. मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पुलिस से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग रोकने की अपील की है.
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फ्रांस सरकार ने पुलिस कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए 10 आंतरिक जांच शुरू की हैं. अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार छात्रों की शिक्षा से जुड़ी मांगों को जल्द पूरा कर पाएगी और नाबालिगों की इतनी बड़ी संख्या में हुई गिरफ्तारियों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दे पाएगी?