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फूट गया चीन का 'रेयर अर्थ' बबल! सप्लाई में नंबर-1, लेकिन इस मामले में US-जापान से पिछड़ा

दुनिया में रेयर अर्थ खनन और प्रोसेसिंग पर चीन का सबसे बड़ा दबदबा है, लेकिन एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि अहम तकनीकों और हाई-वैल्यू पेटेंट के मामले में चीन अब भी अमेरिका और जापान से पीछे है. इससे चीन की तकनीकी बढ़त पर सवाल खड़े हो गए हैं.

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रेयर अर्थ के इस्तेमाल में चीन पिछड़ा. (Photo- ITG)
रेयर अर्थ के इस्तेमाल में चीन पिछड़ा. (Photo- ITG)

दुनिया में रेयर अर्थ (Rare Earth) खनन और प्रोसेसिंग में चीन की बादशाहत मानी जाती है. वैश्विक स्तर पर करीब 70% रेयर अर्थ की माइनिंग और लगभग 90% प्रोसेसिंग चीन में होती है. लेकिन अब एक नई स्टडी ने इस ताकत की दूसरी तस्वीर भी सामने रखी है. अध्ययन के मुताबिक, चीन कच्चा माल निकालने और उसे प्रोसेस करने में भले सबसे आगे हो, लेकिन रेयर अर्थ से जुड़ी सबसे अहम और महंगी तकनीकों के मामले में वह अब भी अमेरिका और जापान से पीछे है.

हांगकांग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्च में पता चला कि एडवांस्ड रेयर अर्थ फंक्शनल मैटेरियल्स से जुड़े कई अहम पेटेंट अब भी जापान और अमेरिका के पास हैं. यानी सबसे ज्यादा कमाई और तकनीकी बढ़त देने वाली तकनीकों पर इन दोनों देशों का दबदबा बना हुआ है.

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रेयर अर्थ का इस्तेमाल फाइटर जेट, मिसाइल, रडार, सोनार सिस्टम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, स्मार्टफोन, सैटेलाइट और कई हाई-टेक उपकरणों में होता है. इसलिए यह सिर्फ कारोबारी नहीं, बल्कि रणनीतिक और रक्षा के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है.

अमेरिका-जापान से टेक्नोलॉजिकल इस्तेमाल के मामले में चीन पीछे

स्टडी के मुताबिक, प्रोसेस किए गए रेयर अर्थ से बनने वाले परमानेंट मैग्नेट, कैटेलिस्ट, ल्यूमिनेसेंट मैटेरियल और पॉलिशिंग मैटेरियल से जुड़े 80% से ज्यादा पेटेंट दुनिया भर में दर्ज हैं. इनमें परमानेंट मैग्नेट तकनीक में जापान सबसे आगे है, जबकि कैटेलिस्ट, ल्यूमिनेसेंट और पॉलिशिंग तकनीकों में अमेरिका का दबदबा बना हुआ है.

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रिसर्च में यह भी सामने आया कि चीन कुछ सीमित क्षेत्रों में ही बढ़त बना पाया है. कई महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं और मैटेरियल सिस्टम में वह अब भी जापान और अमेरिका से पीछे है. यानी कच्चे माल की ताकत को चीन अभी तक हाई-वैल्यू तकनीक में पूरी तरह नहीं बदल पाया है.

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चीन कोशिश तो करता है लेकिन अमेरिका-जापान से कम

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चीन बड़ी संख्या में पेटेंट तो दाखिल करता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले हाई-वैल्यू पेटेंट उसकी मुकाबले कम हैं.  विशेषज्ञों का मानना है कि अगर चीन को रेयर अर्थ सेक्टर में पूरी तरह वैश्विक नेतृत्व हासिल करना है, तो उसे सिर्फ खनन और प्रोसेसिंग ही नहीं, बल्कि अत्याधुनिक तकनीक और इनोवेशन में भी अमेरिका और जापान की बराबरी करनी होगी. फिलहाल इस क्षेत्र में तकनीकी बढ़त अब भी इन दोनों देशों के पास बनी हुई है.

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