एलन मस्क के कनाडा के बंटवारे वाले बयान से राजनीतिक बहस तेज हो गई है. मस्क ने क्यूबेक, अल्बर्टा और सस्केचेवान को कनाडा से अलग होने की सलाह दी थी. इस पर प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने दो टूक कहा कि कनाडा का भविष्य कनाडाई नागरिक ही तय करेंगे. इसके साथ ही विदेशी सरकारों और बड़ी टेक कंपनियों के दखल पर भी सवाल उठाए.
कार्नी ने गुरुवार को क्यूबेक के शेरब्रुक में कहा कि कनाडा और क्यूबेक के लोगों की प्राथमिकताएं ही देश का भविष्य तय करेंगी. उन्होंने कहा कि कनाडा के लोगों को अपनी भाषा और संस्कृति के मुताबिक जीने की आजादी होनी चाहिए. इसमें विदेशी सरकारों या बड़ी टेक कंपनियों को यह बताने का अधिकार नहीं है कि उन्हें क्या करना चाहिए.
एलन मस्क ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कनाडा के तीन प्रांतों की आजादी का समर्थन किया था. उन्होंने कहा कि क्यूबेक को अलग हो जाना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने अल्बर्टा और सस्केचेवान की भी कनाडा से अलग होने की बात की. मस्क का यह बयान ऐसे समय आया है, जब क्यूबेक में अलग देश बनाने की मांग करने वाली पार्टी पार्टि क्यूबेक्वा (PQ) ने प्रांतीय चुनाव में जीत हासिल की है.
हालांकि, इस जीत को क्यूबेक की आजादी के समर्थन के तौर पर नहीं देखा जा सकता. पार्टी को करीब 28% वोट मिले और वह प्रांतीय विधानसभा में बहुमत हासिल नहीं कर सकी. मैकगिल यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर डैनियल बेलैंड के मुताबिक, क्यूबेक की आजादी का समर्थन फिलहाल करीब 30% है.
अल्बर्टा में 19 अक्टूबर को वोटिंग
अब कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में 19 अक्टूबर को वोटिंग होनी है. इसमें लोगों से पूछा जाएगा कि प्रांत को कनाडा में बने रहना चाहिए या अलग होने पर भविष्य में जनमत संग्रह की दिशा में बढ़ना चाहिए. अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने साफ कहा है कि वह कनाडा के साथ बने रहने के पक्ष में वोट देंगी. गुरुवार को उन्होंने कहा कि उनकी सरकार और कार्नी की संघीय सरकार के बीच बातचीत से अलगाव की मांग कमजोर हुई है. वहीं, सस्केचेवान के प्रीमियर स्कॉट मो ने मस्क की पोस्ट पर सिर्फ एक 'नहीं' में जवाब दिया.
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कनाडा की एकता पर बहस तेज
मस्क के बयान ने अलगाव की मांग को अंतरराष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है, लेकिन कनाडा के तीनों प्रांतों के राजनीतिक नेतृत्व की प्रतिक्रियाएं एक जैसी नहीं हैं. जहां अल्बर्टा में अलगाव पर वोटिंग होने वाली है, वहीं सस्केचेवान के प्रीमियर इसके विरोध में हैं.
अब सवाल यह है कि अलगाव को लेकर उठ रही आवाजें राजनीतिक दबाव तक सीमित रहेंगी या कनाडा की एकता पर बहस को और तेज करेंगी. फिलहाल कार्नी ने मस्क को दो टूक देकर यह साफ कर दिया है कि कनाडा का भविष्य तय करने का हक सिर्फ उसके नागरिकों के पास है.