भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झांग से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के साथ द्विपक्षीय रिश्तों को और बेहतर करने के तरीकों पर चर्चा हुई.
डोभाल चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं. वह भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर चीन के विदेश मंत्री वांग यी के साथ स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव वार्ता में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. इस बातचीत का मकसद सीमा पर शांति बनाए रखने और दोनों देशों के बीच पैदा हुए मतभेदों को बातचीत के जरिए कम करना है.
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भारत-चीन सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा
भारतीय दूतावास के मुताबिक, अजित डोभाल और हान झांग की बैठक में सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता मजबूत करने पर जोर दिया गया. इसके अलावा आर्थिक, राजनीतिक और बहुपक्षीय मंचों पर भारत-चीन सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई. दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सहमति के आधार पर रिश्तों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया.
डोभाल और वांग यी की बातचीत ऐसे समय हो रही है, जब 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत-चीन संबंधों में तनाव रहा है. हालांकि, पिछले कुछ समय में दोनों देशों ने सीमा पर हालात सामान्य करने और रिश्तों को स्थिर करने के लिए कई कदम उठाए हैं.
2003 से भारत-चीन में चल रही वार्ताएं
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद करीब 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़ा है. 2003 में शुरू किया गया स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव मैकेनिज्म दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दे पर बातचीत का प्रमुख मंच है. चीन ने भी इसे सीमा विवाद पर बातचीत का मुख्य माध्यम बताया है.
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डोभाल की यात्रा को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सितंबर में नई दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे की संभावना है. ऐसे में डोभाल-वांग वार्ता और दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक बातचीत से सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय रिश्तों को नई दिशा देने की उम्मीद बढ़ी है.