पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम, संगठन और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के बीच टकराव तेज हो गया है. पार्टी का 'जोड़ा फूल' चुनाव चिह्न किस गुट के पास रहेगा, इस पर चुनाव आयोग का फैसला अभी नहीं आया है. दोनों गुट चुनाव आयोग के सामने पार्टी के नाम, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक नियंत्रण पर अपना दावा पेश कर चुके हैं.
इस बीच विधानसभा अध्यक्ष की ओर से ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा समेत बागी गुट के 10 विधायकों को नोटिस जारी किए जाने के बाद विवाद और बढ़ गया है. बागी गुट ने पलटवार करते हुए दावा किया है कि चुनाव चिह्न मिलने के बाद वह ममता कैंप के विधायकों की सदस्यता रद्द कराने की दिशा में कानूनी कदम उठाएगा.
10 विधायकों को भेजे गए नोटिस
इनपुट के मुताबिक, विधानसभा की ओर से मंगलवार को जिन 10 विधायकों को पत्र भेजे गए, उनमें ऋतब्रत बनर्जी के अलावा अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान, रथिन घोष, संदीपन साहा, अखरुज्जमां अंसारी और शिउली साहा शामिल हैं.
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट की ओर से इन विधायकों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई है. दोनों गुटों के बीच विवाद जुलाई से चुनाव आयोग के सामने भी चल रहा है. आयोग ने 12 सितंबर को दोनों पक्षों को अलग-अलग सुनकर उनके दावों और दस्तावेजों पर विचार किया था.
'हम ही असली तृणमूल कांग्रेस'
ऋतब्रत गुट के विधायक संदीपन साहा ने नोटिस पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि इसमें ऐसी कोई ठोस बात नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधि की है.
साहा ने कहा कि थोड़ा इंतजार किया जाए, क्योंकि मुख्य विपक्षी सचेतक की ओर से निर्देश जारी होने के बाद तृणमूल कांग्रेस के सभी विधायकों को उसका पालन करना होगा. ऐसा नहीं करने वालों के खिलाफ विधायक पद से अयोग्य ठहराने के लिए नोटिस दिया जा सकता है.
उन्होंने दावा किया, 'हम ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं. यह काफी हद तक स्थापित हो चुका है. थोड़ा और इंतजार कीजिए, यह पूरी तरह स्थापित हो जाएगा.'
हालांकि यह फिलहाल ऋतब्रत गुट का दावा है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय चुनाव आयोग को करना है. आयोग ने दोनों गुटों से दस्तावेज लिए हैं और विवाद पर विचार कर रहा है. 16 सितंबर तक भी चुनाव चिह्न का विवाद अनसुलझा था.
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चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी नजर
संदीपन साहा ने कहा कि चुनाव चिह्न का विवाद चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में है और आयोग मामले पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि उनके गुट का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग के सामने जरूरी दस्तावेज जमा कर चुका है और उन्हें अपने पक्ष में फैसला आने की उम्मीद है.
इससे पहले ऋतब्रत गुट ने भी चुनाव आयोग के साथ बैठक को सकारात्मक बताया था. आयोग ने इस गुट से कुछ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे थे. दूसरी ओर ममता गुट ने भी आयोग के सामने अपना पक्ष रखा है.
'चिह्न मिलते ही सदस्यता रद्द कराने की कार्रवाई करेंगे'
बागी गुट के विधायक अखरुज्जमां ने ममता कैंप को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जिस दिन उनके गुट को चुनाव चिह्न मिल जाएगा, वे दूसरे गुट के विधायकों की सदस्यता रद्द कराने की कार्रवाई शुरू करेंगे.
उन्होंने दावा किया, "जिस दिन हमें चुनाव चिह्न मिलेगा, मैं यहां आकर घोषणा करूंगा कि हम उनकी सदस्यता रद्द कराने के लिए कदम उठाएंगे. कानूनी प्रक्रिया के जरिए आप देखेंगे कि असली तृणमूल कांग्रेस और उसका चुनाव चिह्न हमारा होगा."
TMC के दोनों गुटों के बीच यह विवाद ऐसे समय निर्णायक मोड़ पर पहुंचा है, जब नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है. दोनों गुट 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं. ऋतब्रत गुट ने दोनों सीटों के लिए अपने उम्मीदवार भी घोषित कर दिए हैं और सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि वह TMC के आधिकारिक नाम और चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ेगा. फिलहाल इस दावे पर चुनाव आयोग का फैसला बाकी है.