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Maharashtra’s Valley of Flowers: महाराष्ट्र की ये जगह मानसून में बन जाती है फूलों की चादर, ट्रिप प्लान करने से पहले जानें 6 जरूरी बातें

महाराष्ट्र के सतारा जिले में स्थित कास पठार मानसून में रंग-बिरंगे रेयर फूलों से सज जाता है. यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल इस जगह को महाराष्ट्र की वैली ऑफ फ्लावर्स भी कहा जाता है. अगर आप पुणे या मुंबई से यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो यात्रा से जुड़ी 6 खास बातें जरूर जान लें.

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कास पठार बारिश में घूमना चाहिए. (PHOTO:ITG)
कास पठार बारिश में घूमना चाहिए. (PHOTO:ITG)

Maharashtra’s Valley of Flowers Kaas Plateau: घूमने के शौकीन हैं और शिमला-मनाली जैसी ओवरक्राउड जगहों से दूर शांति और सुकून भरी जगह एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो महाराष्ट्र की वैली ऑफ फ्लावर्स की सैर आप कर सकते हैं. बारिश के मौसम में महाराष्ट्र का कास पठार यानी कास पाथर रंग-बिरंगे फूलों से सज जाता है. दूर तक फैली हरियाली के बीच गुलाबी, पीले, बैंगनी और सफेद फूलों की चादर देखकर ऐसा लगता है जैसे किसी पेंटिंग के बीच आ गए हों.

यही वजह है कि कास पठार को महाराष्ट्र की सबसे खूबसूरत मानसून जगहों में से एक है. सतारा जिले में सह्याद्रि की पहाड़ियों के बीच बसा यह इलाका सिर्फ खूबसूरत नजारों के लिए ही खास नहीं है. यहां कई तरह के रेयर और स्थानीय फूल-पौधे भी देखने को मिलते हैं. अगर आप इस मानसून कास पठार घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इन 6 बातों को जरूर जान लें.

1. कहां है कास पठार?

कास पठार को कास पाथर के नाम से भी जाना जाता है. यह महाराष्ट्र के सतारा जिले में वेस्टर्न घाट के पास स्थित है. पुणे से इसकी दूरी करीब 140 किलोमीटर और मुंबई से लगभग 273 किलोमीटर है. सड़क से यहां पहुंचना काफी आसान है. रास्ते में सह्याद्रि की पहाड़ियों और हरियाली के खूबसूरत नजारे सफर को और खास बना देते हैं. इसलिए पुणे या मुंबई से वीकेंड रोड ट्रिप के लिए भी यह अच्छी जगह है.

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2. कास पठार की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

कास पठार की पहचान यहां खिलने वाले जंगली फूलों से है, यहां फूलों और पौधों की 850 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं. इनमें कई रेयर और इसी इलाके में मिलने वाली प्रजातियां भी शामिल हैं. मानसून में जब ये फूल एक साथ खिलते हैं, तो पूरा पठार गुलाबी, पीले, सफेद और बैंगनी रंगों से भर जाता है. यही नजारा कास को बाकी हिल स्टेशनों से अलग बनाता है.

3. कब जाएं कास पठार?

कास पठार घूमने के लिए अगस्त के आखिरी हफ्ते से अक्टूबर की शुरुआत तक का समय अच्छा माना जाता है. इसी दौरान यहां जंगली फूलों का रंग सबसे ज्यादा देखने को मिलता है. बारिश के बाद मौसम सुहाना रहता है और कई बार पठार पर धुंध भी छाई रहती है. फूलों के साथ बादल और हरी पहाड़ियां मिलकर बेहद खूबसूरत नजारा बनाते हैं. अगर भीड़ से बचना चाहते हैं तो वीकेंड के बजाय वीकडे पर जाना बेहतर रहेगा.

4. यहां सिर्फ फूल ही नहीं हैं

कास पठार पहुंचकर आपको सिर्फ रंग-बिरंगे फूल ही नहीं दिखेंगे. चारों तरफ फैली हरी पहाड़ियां, ठंडी हवा, बादलों से घिरा आसमान और शांत माहौल इस जगह को खास बनाते हैं. अगर आपको नेचर फोटोग्राफी पसंद है तो यहां कई खूबसूरत फ्रेम मिल सकते हैं. हालांकि फूलों और पौधों को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

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5. भीड़ को लेकर क्यों रखें ध्यान?

कास पठार का इकोसिस्टम काफी नाजुक है. यही कारण है कि यहां आने वाले टूरिस्ट की संख्या को कंट्रोल किया जाता है. इसका मकसद इस प्राकृतिक जगह को भीड़ और पर्यटकों की लापरवाही से होने वाले नुकसान से बचाना है. इसलिए घूमने से पहले एंट्री से जुड़े नियम जरूर चेक कर लें. 

6. कैसे पहुंचें और आसपास क्या देखें?

कास पठार सड़क मार्ग से पुणे और मुंबई से जुड़ा हुआ है. रोड ट्रिप के दौरान सह्याद्रि की पहाड़ियों के खूबसूरत नजारे देखने को मिलते हैं. यहां आने के बाद कास झील और ठोसेघर वॉटरफॉल जैसे आसपास की जगहों को भी ट्रिप में शामिल कर सकते है.

 

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