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टीएमसी में बगावत का एपिसेंटर कैसे बन गया भूपेंद्र यादव का आवास?

पश्चिम बंगाल में 15 साल तक राज करने वाली ममता बनर्जी के पैरों तले से बीजेपी ने सत्ता ही नहीं छीनी, बल्कि अब तो टीएमसी भी उनके हाथ से निकलती जा रही है. टीएमसी के बागी सांसद बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग करते हैं, जिसके चलते वो सियासी चर्चा के केंद्र में हैं.

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बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव (Photo-ITG)
बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव (Photo-ITG)

नई दिल्ली का मोतीलाल नेहरू मार्ग इन दिनों बंगाल की राजनीति का केंद्र बना हुआ है. बीजेपी नेता और केंद्रीय भूपेंद्र यादव का सरकारी आवास मोतीलाल नेहरू मार्ग पर ही स्थित है, जो टीएमसी की बागवत का एपिसेंटर बना हुआ है.  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद उपजे असंतोष अब बगावत में बदल चुकी है, टीएमसी के 20 सांसदों ने ममता बनर्जी से अलग अपना गुट बनाने की मांग कर दी है. 

बंगाल की सत्ता गंवाने के बाद ममता बनर्जी सोमवार को दिल्ली में 'इंडिया ब्लॉक ' की बैठक में अपनी रणनीति बुन रही थीं. ठीक, उसी समय ही ममता बनर्जी के नाक के नीचे उनके अपने ही सांसदों का एक बड़ा धड़ा पाला बदलने के लिए भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक रहा था.

शुखेंदु शेखर के राज्यसभा इस्तीफे से लेकर काकोली घोष के अगुवाई में टीएमसी की बगावत की कहानी भूपेंद्र यादव के घर पर लिखी गई है. ये बात ममता बनर्जी के वफादार सांसद कीर्ति आजाद कह रहे हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भूपेंद्र यादव का आवास टीएमसी के बगावत का केंद्र क्यों बना? 

भूपेंद्र यादव का आवास TMC के  बगावत का एपिसेंटर?

बीजेपी में भूपेंद्र यादव को महज एक केंद्रीय मंत्री के तौर पर नहीं, बल्कि संगठन के सबसे बड़े 'चाणक्य' और कुशल संकटमोचक के रूप में भी देखा जाता है. टीएमसी के बागी सांसदों की पहली तस्वीर भूपेंद्र यादव के घर से आई थी, जिसमें काकोली घोष सहित 14 सांसद मौजूद थे. इसके बाद भी टीएमसी के टूट की खबर चली. राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफा देने वाले शुखेंदु शेखर भी मौजूद थे. इस दौरान भूपेंद्र यादव, बीजेपी के दिग्गज नेता विप्लव देव और बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे. 

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टीएमसी के बागी सांसदों ने भूपेंद्र यादव के घर पर लंच किया, लेकिन बीजेपी नेताओं के साथ क्या बातचीत हुई, वो सामने नहीं आ सकी. लेकिन टीएमसी में टूट कन्फर्म हो गया था. इसके बाद सयानी घोष, माला रॉय और  मिताली बाग भी 10 जून रात भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग हुई. इस बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी वहां उपस्थित थे, यह मीटिंग करीब 1 घंटे तक चली. 

ममता बनर्जी के जिन 19 सांसदों ने बगावत का झंडा उठाया है, उन सभी ने भूपेंद्र यादव से मुलाकात की. यही वजह है कि कीर्ति आजाद टीएमसी में बगावत के लिए भूपेंद्र यादव पर निशाना साध रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए टीएमसी को तोड़ने और उन्हें अपने मिलाने की कोशिश कर रही है. कीर्ति आजाद ने कहा कि टीएमसी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बड़ाईक दिल्ली में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे के घर के बाहर मीडिया से बात करते दिखे.  

भूपेंद्र यादव क्यों सियासी चर्चा के केंद्र में है? 
टीएमसी के कुछ नाराज सांसद केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर बैठक कर रहे हैं.सीएम शुभेंदु अधिकारी सीधे भूपेंद्र यादव के घर पहुंच रहे. इस तरह क्या भूपेंद्र यादव ही अहम रोल अदा कर रहे हैं. भूपेंद्र यादवपश्चिम बंगाल में भाजपा के चुनाव प्रभारी थे. बंगाल के हर छोटे-बड़ी सियासी घटनाक्रम पर उनकी सीधी नजर है और टीएमसी के भीतर असंतोष को भांपने में उन्होंने देर नहीं लगाई. 

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भूपेंद्र यादव को पर्दे के पीछे रहकर बिना किसी शोर-शराबे के सियासी रणनीति को अंजाम देने में महारत हासिल है. टीएमसी के बागी सांसद एक ऐसे मंच की तलाश में थे जहां गोपनीयता बनी रहे और सीधा केंद्रीय नेतृत्व से संवाद हो सके. 

भूपेंद्र यादव के दिल्ली आवास पर टीएमसी सांसदों की इस बैठक में बंगाल के नेता और प्रमुख चेहरा शुभेंदु अधिकारी खुद मौजूद थे. शुभेंदु ने बंगाल में जमीन तैयार की और अब क्या भूपेंद्र यादव ने दिल्ली में उसे अमलीजामा पहनाने के लिए अपना आवास और राजनीतिक रसूख मुहैया करा रहे हैं. 

भूपेंद्र यादव के दिल्ली स्थित आवास पर जो 'लंच डिप्लोमेसी'हुई, उसने पश्चिम बंगाल से लेकर दिल्ली तक की राजनीति को हिलाकर रख दिया है और ममता बनर्जी के पैरों तले से सियासी जमीन खींच ली है. अगर यह प्लान पूरी तरह सफल होता है,  तो संसद में बीजेपी के नेतृत्व वाला एनडीए और मजबूत होगा,जबकि ममता बनर्जी के लिए सियासी संकट गहरा गया है. 
 

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