scorecardresearch
 

थाने के बाहर TMC नेता हुमायूं कबीर पर हमला! अभिषेक बनर्जी बोले- मतभेद हिंसा का लाइसेंस नहीं

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने पार्टी के नेता हुमायूं कबीर पर हमले करने का दावा किया है. ऐसे में अभिषेक बनर्जी ने बंगाल में बढ़ती राजनीतिक हिंसा पर चिंता जताई है. उन्होंने पुलिस और प्रशासन की नाकामी पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये प्रशासन की विफलता का नतीजा है.

Advertisement
X
अभिषेक बनर्जी ने बंगाल के हालात पर चिंता जताई. (Photo: PTI)
अभिषेक बनर्जी ने बंगाल के हालात पर चिंता जताई. (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने राज्य में बढ़ती हिंसा पर चिंता जताई है. उन्होंने टीएमसी नेता हुमायूं कबीर पर हुए हमले का जिक्र करते हुए पुलिस-प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं.

अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाते हुए कहा कि पूर्व आईपीएस अधिकारी हुमायूं कबीर पर एक पुलिस थाने के ठीक बाहर बेरहमी से हमला किया गया. ये घटना उस समय हुई जब खुलेआम हिंसा चल रही थी.

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, 'जब नागरिकों की रक्षा करने के लिए बनी संस्था के दरवाजे पर ही हमला हो सकता है, तो फिर आम जनता की रक्षा के लिए कौन बचा है?' 

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि आज जो कुछ भी हुआ, वो सिर्फ राजनीतिक टकराव नहीं था, बल्कि हिंसा, डराने-धमकाने और प्रशासन की नाकामी का एक डरावना नजारा था. बनर्जी ने बताया कि दिन में उनके पार्टी कार्यकर्ता एक शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे, जिन पर हिंसक हमले किए गए और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके अलावा उन्होंने उपासना चौधरी के साथ हुई घटना का भी जिक्र किया.

Advertisement

उपासना चौधरी को निशाना बनाने का दावा

टीएमसी नेता ने बताया कि उपासना चौधरी को बार-बार राजनीतिक हिंसा का शिकार बनाया गया है. उनके कपड़े फाड़े गए, उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया गया और उनके घर पर भारी पत्थर फेंके गए, जबकि उनके बुजुर्ग माता-पिता घर के अंदर थे. उनके पिता, जो ब्रेन स्ट्रोक के मरीज हैं, इस घटना से गहरे सदमे में हैं. 

बनर्जी ने सवाल किया कि हम आखिर कैसी राजनीतिक संस्कृति बना रहे हैं, जहां परिवारों के सामने लोगों पर हिंसा की जाती है? राजनीतिक मतभेदों को कभी भी राजनीतिक हिंसा का लाइसेंस नहीं बनाया जा सकता है. हिंसा के लिए जिम्मेदार किसी भी व्यक्ति को कोई छूट नहीं मिलनी चाहिए, न ही किसी तरह की चुनिंदा चुप्पी या राजनीतिक संरक्षण दिया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस और प्रशासन की ये जिम्मेदारी है कि वो बिना किसी पार्टी के भेदभाव के हर नागरिक की रक्षा करें. हिंसा के सामने चुप्पी साधना तटस्थता नहीं है, बल्कि ये अपने आप में एक बड़ा जुर्म है.

यह भी पढ़ें: 'शामिल हो जाओ तो वॉशिंग मशीन, डटे रहे तो...', अभिषेक बनर्जी का बीजेपी पर तंज

'डर की राजनीति से ऊपर उठना होगा'

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि बंगाल डर की राजनीति से कहीं बेहतर का हकदार है. बंगाल को एक ऐसी राजनीतिक संस्कृति की जरूरत है जहां विरोधी बिना किसी हमले के असहमति जता सकें, कार्यकर्ता बिना डरे मार्च निकाल सकें और परिवार बिना किसी डर के चैन की नींद सो सकें. उन्होंने कहा कि हिंसा कभी भी राजनीति की भाषा नहीं बननी चाहिए और धौंस-धमकी सत्ता की मुद्रा नहीं होनी चाहिए.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement