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4500 KG रसगुल्ले के लिए 20 हजार लीटर दूध कहां से आया? अधिकारी ने पूछा सवाल तो नहीं मिला जवाब

संभल में ग्राम प्रधान के यहां 4500 किलो तैयार रसगुल्ले मिलने के बाद अब जांच का फोकस दूध की खरीद पर है. सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में रसगुल्ले बनाने के लिए करीब 20 हजार लीटर दूध लगा होगा. उन्होंने सवाल किया है कि यह दूध कहां से आया और उसकी खरीद का रिकॉर्ड क्या है. प्रशासन के मुताबिक फैक्ट्री संचालक स्पष्ट जवाब नहीं दे सका.

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संभल में ग्राम प्रधान के घर 4500 किलो सफेद वाला रसगुल्ला तैयार मिला है (Photo:ITG)
संभल में ग्राम प्रधान के घर 4500 किलो सफेद वाला रसगुल्ला तैयार मिला है (Photo:ITG)

संभल के मंगनपुर गांव में 4500 किलो तैयार सफेद रसगुल्ले मिलने के बाद अब प्रशासन की जांच एक नए सवाल पर टिक गई है. सवाल रसगुल्ले कितने मिले, यह नहीं है, बल्कि इतनी बड़ी मात्रा में रसगुल्ले तैयार करने के लिए करीब 20 हजार लीटर दूध आखिर कहां से आया ? सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार का कहना है कि 4500 किलो रसगुल्ला तैयार करने में कम से कम 20 हजार लीटर दूधर लगा होगा. इसके बारे में जब फैक्ट्री संचालक से दूध की खरीद और उसके स्रोत के बारे में जानकारी मांगी तो स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका.

बता दें कि जिले के हजरतनगर गढ़ी थाना क्षेत्र के मंगनपुर गांव में ग्राम प्रधान के घर में बड़ी मात्रा में तैयार सफेद रसगुल्ले, छेना और अन्य सामग्री मिली थी. प्रशासन ने पहले ही तैयार माल को जब्त कर सैंपल जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी. अब इसी कार्रवाई में दूध की खरीद का एंगल सामने आने के बाद जांच और अहम हो गई है.

4500 किलो रसगुल्ले और 20 हजार लीटर दूध का हिसाब

प्रशासन की कार्रवाई के दौरान ग्राम प्रधान के घर से करीब 4500 किलो तैयार रसगुल्ले मिलने की बात सामने आई. इतनी बड़ी मात्रा में रसगुल्ले तैयार करने में इस्तेमाल होने वाले दूध की मात्रा को लेकर जब अधिकारियों ने पड़ताल शुरू की तो अनुमानित तौर पर करीब 20 हजार लीटर दूध की जरूरत का सवाल सामने आया. इसी पर सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार ने फैक्ट्री संचालक से सवाल किया. अधिकारियों ने यह जानना चाहा कि इतनी बड़ी मात्रा में दूध कहां से खरीदा गया? दूध किस विक्रेता या खरीद केंद्र से आया? क्या उसकी खरीद का कोई रिकॉर्ड मौजूद है? लेकिन प्रशासन के अनुसार पूछताछ के दौरान इस संबंध में संतोषजनक जानकारी नहीं दी जा सकी. अब जांच सिर्फ रसगुल्लों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है. प्रशासन यह भी देख रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में कच्चा माल कहां से आया और उसका कोई दस्तावेजी रिकॉर्ड मौजूद है या नहीं.

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अब सैंपल बताएंगे रसगुल्लों की हकीकत

प्रशासन और खाद्य विभाग की टीम ने मौके से रसगुल्ले, छेना और इस्तेमाल की जा रही अन्य सामग्री के नमूने लिए हैं. इन सैंपलों को विशेष मैसेंजर के जरिए मेरठ स्थित प्रयोगशाला भेजा जा रहा है. जांच रिपोर्ट से यह पता चलेगा कि तैयार रसगुल्ले और उनमें इस्तेमाल सामग्री खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप थी या नहीं. रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

ग्राम प्रधान के घर चल रहा था कारोबार

प्रशासन के मुताबिक मंगनपुर गांव में कई घरों में बड़े पैमाने पर सफेद रसगुल्ले तैयार किए जाने की शिकायतें मिल रही थीं. इन रसगुल्लों की सप्लाई पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी. इसी सूचना के बाद सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार के नेतृत्व में खाद्य विभाग की टीम ने कार्रवाई की थी. कार्रवाई के दौरान ग्राम प्रधान के घर से 4500 किलो तैयार रसगुल्ले मिलने के बाद अधिकारियों ने मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की.

फैक्ट्री संचालक के परिवार का क्या कहना है

वहीं, ग्राम प्रधान के पति अबरार ने प्रशासन की कार्रवाई के बाद अपना पक्ष रखते हुए कहा कि रसगुल्ले बनाने का कारोबार उनके बेटे द्वारा किया जाता है. उनका दावा है कि कारोबार के लिए उनके पास लाइसेंस और जीएसटी नंबर है. अबरार का कहना है कि उनके यहां रसगुल्ले दूध, चीनी और पाउडर सहित तीन चीजों से तैयार किए जाते हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे पहले उनके यहां से लिए गए सैंपल जांच में पास हो चुके हैं. उनका कहना है कि इस बार भी प्रशासन ने सैंपल लिए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.

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पहले भी हो चुकी है कार्रवाई

मंगनपुर और आसपास के इलाकों में सफेद रसगुल्ले बनाने को लेकर प्रशासन की कार्रवाई पहले भी हो चुकी है. होली के दौरान भी खाद्य विभाग और प्रशासन ने कई स्थानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में तैयार रसगुल्ले जब्त किए थे. जांच के बाद कई कुंतल तैयार माल नष्ट कराया गया था. इस बार हुई कार्रवाई के बाद प्रशासन के सामने सिर्फ मिलावट या गुणवत्ता का सवाल नहीं है, बल्कि इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की आपूर्ति का हिसाब भी महत्वपूर्ण हो गया है.

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