दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी तक पहुंच गई है. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा. सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने कैंपस में विरोध मार्च निकाला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की.
प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय परिसर आंदोलन के नारों से गूंज उठा. छात्र हाथों में पोस्टर, बैनर और तख्तियां लेकर कैंपस में मार्च करते रहे. प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा व्यवस्था, छात्रों की सुरक्षा और जंतर-मंतर पर हुए कथित पुलिस एक्शन को लेकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जाहिर किया.
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छात्रों के विरोध मार्च में बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की तस्वीर के साथ-साथ सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तस्वीर भी नजर आई. कई छात्र 'धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो' लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते दिखाई दिए. प्रदर्शन के दौरान पूरे परिसर में सरकार विरोधी नारे लगातार गूंजते रहे.
मेन गेट पर चढ़े छात्र, पुलिस और PAC से हुई तीखी नोकझोंक
विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे. कुछ प्रदर्शनकारी मेन गेट पर चढ़ गए और वहीं से नारेबाजी शुरू कर दी. हालात बिगड़ते देख मौके पर मौजूद पुलिस और PAC के जवानों ने छात्रों को रोकने की कोशिश की.
इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी कहासुनी भी हुई. कुछ देर तक मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. हालांकि बाद में पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के समझाने पर छात्र वापस कैंपस लौट आए, लेकिन उनका प्रदर्शन और नारेबाजी लगातार जारी रही.
घटनास्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई. विश्वविद्यालय परिसर और मुख्य द्वार पर पुलिस की निगरानी लगातार बनी रही ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो.
छात्रों का आरोप- जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई बर्बरता
प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया. उनका कहना था कि निर्दोष छात्र-छात्राओं पर लाठीचार्ज किया गया और छात्राओं के साथ भी बदसलूकी की गई, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता.
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि आंदोलन में शामिल छात्र अपनी मांगों को लोकतांत्रिक तरीके से उठा रहे थे. ऐसे में उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करना पूरी तरह गलत है. छात्रों ने कहा कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
उन्होंने कहा कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वाराणसी से संसद तक कूच करने की रणनीति बनाई जाएगी. उनका कहना था कि यह आंदोलन अब केवल एक विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के छात्रों की आवाज बनेगा.