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यूपी का डिफेंस कॉरिडोर कैसे भारत की आत्मनिर्भरता की मुहिम को दे रहा है रफ्तार

उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के जरिए राज्य न सिर्फ घरेलू रक्षा उत्पादन को मजबूत कर रहा है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक बड़े डिफेंस हब के रूप में उभर रहा है.

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रक्षा उत्पादन का ग्लोबल हब बनता उत्तर प्रदेश (प्रतीकात्मक फोटो)
रक्षा उत्पादन का ग्लोबल हब बनता उत्तर प्रदेश (प्रतीकात्मक फोटो)

रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता पर भारत जैसे-जैसे अपना फोकस बढ़ा रहा है, उत्तर प्रदेश देश के बदलते एयरोस्पेस और डिफेंस इकोसिस्टम में एक अहम खिलाड़ी बनकर उभर रहा है. इस बदलाव के केंद्र में है उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (UPDIC). एक महत्वाकांक्षी योजना, जिसकी घोषणा 2018-19 के केंद्रीय बजट में की गई थी.

इसका मकसद है स्वदेशी रक्षा उत्पादन को मजबूत करना, निजी निवेश को आकर्षित करना और आयात पर निर्भरता कम करना. इस कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (UPEIDA) लागू कर रही है. यह कॉरिडोर छह रणनीतिक स्थानों लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट में फैला हुआ है.

इसका लक्ष्य सिर्फ रक्षा कंपनियों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि निर्माण, अनुसंधान, परीक्षण, इनोवेशन और कौशल विकास को शामिल करते हुए एक पूरी वैल्यू चेन तैयार करना है. यह भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत विज़न और भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन केंद्र बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य से पूरी तरह मेल खाता है.

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35 हजार करोड़ से ज्यादा निवेश का प्रस्ताव

पिछले कुछ सालों में ज़मीनी स्तर पर काम ने रफ्तार पकड़ी है. UPEIDA के मुताबिक, इस कॉरिडोर को अब तक ₹35,000 करोड़ से ज़्यादा के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं और नई परियोजनाओं की घोषणा के साथ यह निवेश लगातार बढ़ रहा है.

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लखनऊ में स्थित ब्रह्मोस एयरोस्पेस की निर्माण फैक्ट्री इस कॉरिडोर की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है. इस कॉरिडोर में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस जैसी बड़ी सरकारी और निजी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ रक्षा और एयरोस्पेस क्षेत्र में काम कर रहे कई MSME भी मौजूद हैं.

हर नोड अपनी मौजूदा औद्योगिक ताकत और नए निवेश के ज़रिए इस कॉरिडोर के बड़े विज़न में योगदान दे रहा है. कानपुर, अपने स्थापित इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम की वजह से, कॉरिडोर के सबसे बड़े निवेश आकर्षित कर चुका है. झांसी में जल्द शुरू होने वाली भारत डायनेमिक्स लिमिटेड की मिसाइल यूनिट है, जबकि लखनऊ में एडवांस्ड एयरोस्पेस और मिसाइल से जुड़े निर्माण में लगातार निवेश हो रहा है.

अलीगढ़ में कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और ड्रोन बनाना शुरू कर दिया है.
कनेक्टिविटी भी इस कॉरिडोर की एक बड़ी खासियत बनकर उभरी है. छह नोड्स को यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आने वाले गंगा एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से जोड़ा गया है. 

यह लॉजिस्टिक्स नेटवर्क कच्चे माल, पुर्जों और तैयार उत्पादों की तेज़ आवाजाही को संभव बनाता है, जिससे उत्तर प्रदेश उन रक्षा निर्माताओं के लिए एक आकर्षक ठिकाना बन गया है जो अपना कारोबार शुरू करना या बढ़ाना चाहते हैं. कई परियोजनाएं अब चालू हो चुकी हैं और कई और विकास के दौर में हैं .ऐसे में यह कॉरिडोर धीरे-धीरे भारत के एक प्रमुख रक्षा निर्माण इकोसिस्टम के रूप में आकार ले रहा है.

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