समाजवादी पार्टी में अंदरूनी खींचतान के बीच यूपी विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) और मुरादाबाद जिले की कांठ सीट से विधायक कमाल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है. कमाल अख्तर का अचानक इस्तीफा देना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, हाल ही में मुरादाबाद में आयोजित पीडीए पंचायत के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे.
मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई थीं. इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई थी. सूत्रों के मुताबिक, रुचि वीरा ने अखिलेश यादव से शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि जिला संगठन एकतरफा तरीके से काम कर रहा है और उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. हालांकि, रुचि वीरा ने सीधे तौर पर कमाल अख्तर का नाम नहीं लिया था, लेकिन पार्टी के भीतर यह माना जा रहा था कि उनका इशारा उन्हीं की तरफ था.
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कहा जा रहा है कि लगातार बढ़ते विवाद और संगठन पर उठ रहे सवालों के बीच कमाल अख्तर ने जिला संगठन पर दबाव कम करने और विवाद शांत करने के लिए मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि रुचि वीरा को आजम खान खेमे के करीबी नेताओं में माना जाता है. ऐसे में उनके नाराज होने को पार्टी नेतृत्व गंभीरता से देख रहा था. कमाल अख्तर को लंबे समय से आजम खान विरोधी गुट का नेता माना जाता रहा है, जिसकी वजह से दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही.
सूत्रों का यह भी कहना है कि कमाल अख्तर खुद भी मुख्य सचेतक का पद छोड़ना चाहते थे. पार्टी के भीतर इस पद को लेकर एक 'राजनीतिक टोटका' भी चर्चा में रहता है कि जो नेता इस पद पर रहता है, वह अगला विधानसभा चुनाव हार जाता है. हालांकि, माना जा रहा है कि रुचि वीरा की नाराजगी और संगठनात्मक विवाद के बाद उनके इस्तीफे का फैसला तेज हुआ. कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि मुरादाबाद मंडल में समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी कुछ हद तक कम हो सकती है. इससे पहले सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने भी रुचि वीरा की नाराजगी को मुद्दा बनाते हुए दावा किया था कि समाजवादी पार्टी में टूट की स्थिति बन सकती है.