सीतापुर से कांग्रेस सांसद राकेश राठौर को दुष्कर्म के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ी राहत मिली है. न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने राठौर को मामले में डिस्चार्ज करते हुए निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें उनके खिलाफ आरोप तय किए गए थे. कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध अभियोजन सामग्री से शिकायतकर्ता और राठौर के बीच लंबे समय से सहमति से संबंध होने के संकेत मिलते हैं.
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने कहा कि राठौर पर शादी का वादा करके महिला के साथ शारीरिक संबंध बनाने का आरोप प्रथम दृष्टया कथित अपराध के होने को लेकर गंभीर संदेह पैदा करता है. अदालत के मुताबिक मामले की परिस्थितियां दो विवाहित वयस्कों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाहेतर और सहमति वाले संबंध की ओर संकेत करती हैं.
कोर्ट ने शिकायतकर्ता के बयान और उसके पति के बयान का भी उल्लेख किया. अदालत के सामने यह तथ्य आया कि महिला की मुलाकात राठौर से सार्वजनिक बैठकों के दौरान हुई थी. इसके बाद दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी. कोर्ट ने शिकायतकर्ता के पति के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उसने कहा था कि राठौर अक्सर उसकी पत्नी को अपने आवास पर बुलाते थे और वह कई बार देर रात तक वहां रहती थी.
जनवरी 2025 में दर्ज हुई थी FIR
महिला ने जनवरी 2025 में सीतापुर के कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी. शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राठौर ने शादी का भरोसा देकर उसके साथ दुष्कर्म किया. इसके बाद पुलिस ने 30 जनवरी 2025 को राठौर को गिरफ्तार किया था.
मार्च 2025 में हाईकोर्ट से उन्हें जमानत मिल गई थी. अब हाईकोर्ट ने 5 मई 2025 के निचली अदालत के आदेश को रद्द करते हुए राठौर की डिस्चार्ज अर्जी स्वीकार कर ली है.