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संभल में 1000 बीघा सरकारी जमीन का खेल: फर्जी पट्टों के मामले में पूर्व SDM समेत 19 पर केस, 6 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के संभल में गंगा किनारे स्थित करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के कथित फर्जी पट्टा आवंटन मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच रिपोर्ट के आधार पर पूर्व एसडीएम, तहसीलदार, पूर्व डीजीसी, कानूनगो, लेखपाल और ग्राम प्रधान समेत 19 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. मामला करीब 19 साल पुराने कथित फर्जी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर से जुड़ा है.

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फर्जी पट्टों के मामले में पूर्व SDM समेत 19 पर केस. (File Photo: ITG)
फर्जी पट्टों के मामले में पूर्व SDM समेत 19 पर केस. (File Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के संभल में सरकारी जमीनों पर कार्रवाई लगातार जारी है. कुछ दिन पहले 38 बीघा सरकारी जमीन से जुड़े करीब 101 करोड़ रुपये के घोटाले की कहानी सामने आई. अब पुलिस ने गंगा किनारे स्थित करीब 1000 बीघा सरकारी जमीन के फर्जी पट्टा आवंटन के मामले में बड़ा एक्शन लिया है. इस मामले में सिर्फ पट्टा लेने वालों पर नहीं, बल्कि तत्कालीन एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो, लेखपाल, चकबंदी अधिकारी, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता (DGC), ग्राम प्रधान और पंचायत प्रतिनिधियों तक पर मुकदमा दर्ज हुआ है. कुल 19 लोगों को नामजद किया गया है. इनमें से छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है.

दरअसल, यह मामला गुन्नौर तहसील के असदपुर, सुखैला और आसपास के गांवों में गंगा किनारे स्थित झाऊ श्रेणी की सरकारी जमीन के अवैध आवंटन का है. गुन्नौर तहसील में तैनात लेखपाल स्वाति शर्मा ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. यहां सुखैला की 1144 बीघा सरकारी जमीन चकबंदी प्रक्रिया में थी, लेकिन 19 साल पहले साल 2007 के बाद सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर पट्टे आवंटित कर दिए गए थे.

इसके बाद साल 2018 में फर्जी पट्टे आवंटित करने का मामला उठा. इस पर तत्कालीन अफसरों और 5 दर्जन लाभार्थियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था, लेकिन साल 2019 में तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह ने 162 लाभार्थियों के पक्ष में दोबारा पट्टे आवंटित कर दिए थे. आवंटित किए गए पट्टों की जब जांच हुई तो जमीन के क्षेत्रफल को लेकर कई गड़बड़ियां सामने आईं. इसके बाद 2023 में 17 अपात्रों के पट्टे निरस्त कर दिए गए थे, जबकि 145 लोगों के नाम पट्टा दर्ज था. यहां गंगा किनारे की जमीन के पट्टों के लिए बड़े स्तर पर फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार हुए.

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वहीं संभल में सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराने के लिए डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के स्तर पर कार्रवाई चल रही है. इसी बीच 4 जून 2026 को लेखपाल स्वाति शर्मा ने डीएम अंकित खंडेलवाल को 1000 बीघा जमीन के फर्जी तरीके से आवंटन मामले की जांच रिपोर्ट सौंपी. इसमें गंगा किनारे की जमीन के पट्टों का फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवंटन होने की पुष्टि हुई. इसमें संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की कहानी का पता चला. इसी के साथ विभागीय कार्रवाई की बात कही गई थी.

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लेखपाल स्वाति शर्मा ने 2 जुलाई को गुन्नौर थाने में तहरीर दी. इसमें गुन्नौर तहसील के पूर्व और मौजूदा समय में बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार और मौजूदा समय में अन्य जिले में तैनात एसडीएम करम सिंह, पूर्व डीजीसी, तत्कालीन ग्राम प्रधान, तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी, जिला पंचायत सदस्य, लेखपाल और कानूनगो सहित 19 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ. इसके बाद एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई के निर्देश पर 1000 बीघा जमीन का फर्जी पट्टा आवंटित कराने वालों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया.

पुलिस ने गुन्नौर के पूर्व और मौजूदा समय में बर्खास्त एसडीएम ओमवीर सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत, तत्कालीन चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता जय भारद्वाज, पूर्व कानूनगो राजवीर सिंह और पूर्व चकबंदी लेखपाल महेंद्र सिंह को गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया है. इसके बाद सीजेएम कोर्ट से सभी 6 आरोपियों को जेल भेज दिया गया है.

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किन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर

गंगा किनारे की 1000 बीघा जमीन के फर्जी तरीके से पट्टा आवंटन के मामले में तत्कालीन एसडीएम ओमवीर सिंह, तत्कालीन तहसीलदार करम सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान विक्रांत, पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता जय भारद्वाज, तत्कालीन सहायक चकबंदी अधिकारी महेंद्र, पूर्व चकबंदी लेखपाल भीमराव सिंह, तत्कालीन राजस्व निरीक्षक राजवीर, ग्राम पंचायत सदस्य प्रवीण कुमार, ग्राम पंचायत सदस्य (संतोष कुमार, मोरश्री, जलधारा, किशनलाल, देवेंद्र कुमार, लेखपाल सर्वेश कुमारी, लेखपाल ओंकार सिंह, रिटायर्ड राजस्व निरीक्षक सर्वेश सिंह, तत्कालीन चकबंदी कर्ता मनवीर सिंह के खिलाफ 420 467 468, 120 बी और धारा 34 के तहत केस दर्ज किया गया है.

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