अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और दान में वित्तीय अनियमितताओं के मामले में सियासत गर्मा गई है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे को सियासी धार देने में जुटे हैं. हिंदुत्व और राम मंदिर के मुद्दे पर फ्रंटफुट पर खेलने वाली बीजेपी को घेरने के लिए सपा के सात कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने आक्रामक तेवर अपना लिया है. विपक्षी दलों ने चंदा चोरी को 'आस्था पर चोट' के रूप में पेश कर हैं.
चंदा चोरी के मुद्दे को सबसे पहले अखिलेश यादव ने उठाया था, उसके बाद से लगातार आक्रामक रुख अपना रखा है और बीजेपी को सियासी कठघरे में खड़े करने में जुटे हैं. सपा के बाद कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (यूबीटी) सड़क पर उतरकर बीजेपी के खिलाफ सियासी माहौल बनाने की रणनीति अपनाई है.
कांग्रेस मंगलवार को'सद्बुद्धी पदयात्रा' के जरिए जनता के बीच राम मंदिर के चंदा चोरी का मुद्दा लेने का प्लान बनाया है तो शिवसेना (UBT)प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मुंबई से 'राम रक्षा आंदोलन' शुरू कर भाजपा के कोर हिंदुत्व एजेंडे को ही चुनौती देने की दांव चला है. इस तरह विपक्ष अब राम मंदिर के चंदा चोरी को सियासी मुद्दा बनाने की रणनीति अपना रही है.
कांग्रेस की 'सद्बुद्धी पद यात्रा'
चढ़ावा चोरी मामले को लेकर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में सड़क पर उतरने जा रही है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी द्वारा अयोध्या के श्रीराम मंदिर में कथित चढ़ावे की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ मंगलवार से 'सद्बुद्धि पद यात्रा' शुरू कर रही है. इस यात्रा के बहाने कांग्रेस चंदा चोरी करने वालों को जेल भेजने और पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के न्यायधीश से कराने की मांग करेगी.
कांग्रेस 'सद्बुद्धि पद यात्रा' को सूबे के अलग-अलग जिलों, शहरों में निकालकर स्थानीय धार्मिक स्थल (मंदिर) पर सभा करने की योजना बनाई है. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय राम मंदिर को लेकर लगातार बीजेपी को घेर रहे हैं. कांग्रेस का आरोप है कि जिस मंदिर के लिए देश के करोड़ों गरीबों और आम नागरिकों ने अपनी गाढ़ी कमाई का चंदा दिया, वहां का चढ़ावा सुरक्षित नहीं है.
उद्धव ठाकरे का 'राम रक्षा आंदोलन'
अयोध्या राम मंदिर के चंदा चोरी का मामले के लेकर सबसे आक्रामक रुख शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपना रखा है. मुंबई के दादर की ऐतिहासिक हनुमान मंदिर से शिवसेना (यूबीटी) ने 'राम रक्षा आंदोलन' की शुरुआत की है. इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में राम भक्त शामिल हुए. दादर में भगवा पहने सैकड़ों लोग एकत्र हुए. यहां पर हनुमान चालीसा, राम रक्षा का पाठ हुआ.
बारिश के बीच उद्धव ठाकरे ने भी भीड़ को संबोधित कर 'राम रक्षा आंदोलन' की औपचारिक रूप से शुरुआत की. उद्धव ठाकरे ने स्वयं हनुमान चालीसा और राम रक्षा स्तोत्र के पाठ के साथ आगाज किया. उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से इस आंदोलन को महाराष्ट्र के गांव-गांव और हर राम-हनुमान मंदिर तक ले जाने का आह्वान किया है. उन्होंने 'भाजपा-मुक्त राम' का नारा बुलंद करते हुए कहा कि भगवान राम किसी एक पार्टी की बपौती नहीं, बल्कि सबके हैं.
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बताया कि यह आंदोलन अब रुकेगा नहीं. मुंबई से इसकी शुरुआत हुई है और अब यह पूरे महाराष्ट्र में होगा. उद्धव ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हिंदुत्व का ढोल पीटने वाले ही आज हिंदुओं को लूट रहे हैं. टॉयलेट में पैसे छिपाए जा रहे हैं, यह इनका गंदा हिंदुत्व है, मंदिर लूटने वालों को देश का हिंदू कभी माफ नहीं करेगा. ऐसे में शिवेसना (यूबीटी) अब महाराष्ट्र में बीजेपी को हिंदुत्व विरोधी बताने में जुट गई है.
कांग्रेस और उद्धव की यात्रा का मकसद
कांग्रेस कार्यकर्ताओं राज्य के विभिन्न हिस्सों में 'सद्बुद्धी पदयात्रा' निकाल रही है. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भाजपा सरकार और मंदिर प्रशासन को 'सद्बुद्धि' देने के लिए प्रार्थना करना और जनता को जागरूक करना है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भगवान राम के नाम पर राजनीति करने वालों का असली चेहरा सामने आ गया है. इस पदयात्रा के जरिए कांग्रेस शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के धार्मिक वोट बैंक, विशेषकर मध्यवर्गीय हिंदुओं को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि भाजपा केवल धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल करती है.
राम मंदिर आंदोलन से शिवसेना जुड़ी रही है. उद्धव ठाकरे के पिता बालासाहेब ठाकरे मंदिर आंदोलन के अगुवाई करने वालों में से एक रहे हैं, लेकिन उद्धव के बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस से हाथ मिलाने के बाद बीजेपी उन्हें हिंदू विरोधी बताने में जुटी है. ऐसे में उद्धव ठाकरे अब राम मंदिर के चंदा चोरी के बहाने अपनी छवि को हिंदुत्व के रंग में रचने में जुट गए हैं और बीजेपी को निशाने पर ले रहे हैं.
राम मंदिर का 'चढ़ावा चोरी'का मुद्दा विपक्ष के हाथ लगा एक ऐसा अचूक हथियार है, जिससे वे भाजपा के सबसे मजबूत 'हिंदुत्व और ईमानदारी' के नैरेटिव पर सीधा वार कर रहे हैं. कांग्रेस की पदयात्रा और उद्धव का राम रक्षा आंदोलन यह साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह विवाद थमने वाला नहीं है, बल्कि देश की राजनीति को एक नया मोड़ देने वाला है.