उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं. उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि वह चुनाव आयोग का ऐसा पर्दाफाश करना चाहते हैं जिस पर किसी का ध्यान नहीं जाता.
राजेंद्र पाल गौतम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी सवालों के घेरे में खड़ा किया है. उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे ऐसा सिस्टम हैं कि वे किसी को भी हरा या जिता सकते हैं. उन्होंने उत्तर प्रदेश स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में SIR के बाद 10 अप्रैल को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी.
कांग्रेस नेता ने कहा कि वह पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के अंर्तगत हुए घपलों पर बुधवार को चर्चा करेंगे. उनके मुताबिक, जुलाई से सितंबर के बीच 13,150 वोटर्स के नाम बदल दिए गए. उन्होंने दावा किया कि इन वोटर्स के EPIC नंबर वही हैं, लेकिन नाम बदल दिए गए हैं. उन्होंने राशिद नाम के एक व्यक्ति का उदाहरण देते हुए कहा कि वोटिंग के दिन जब वह पोलिंग बूथ पर जाएगा तो वहां वोटर लिस्ट में उसका नाम नहीं मिलेगा.
उन्होंने आरोप लगाया कि इसी तरह 804 वोटर्स के नाम काट दिए गए, जबकि 2600 ऐसे वोट जोड़ दिए गए जो उस इलाके में रहते ही नहीं हैं. उनका कहना है कि बुधवार को वे इस मामले में चुनाव आयोग की कथित गड़बड़ियों पर चर्चा करेंगे.
वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अराधना मिश्रा मोना ने भी यही आरोप लगाए हैं. उन्होंने इसे गंभीर मुद्दा बताते हुए मामले में जांच की मांग की है. उनका कहना है कि पीलीभीत के 13,000 वोटर्स के EPIC नंबर वही हैं लेकिन उनके नाम बदल दिए हैं.
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कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी इस मामले पर चुनाव आयोग को घेरा है. उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा, 'एक ही विधानसभा क्षेत्र में इस तरह से 13,000 से ज़्यादा वोटों के साथ छेड़छाड़ की गई है. हम यह लड़ाई सड़कों पर, संसद में और अदालतों में भी लड़ेंगे.'
कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पार्टी नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी ECI पर आरोप लगाए. उन्होंने कहा चुनाव आयोग षड्यंत्र कर रहा है. सुप्रिया ने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में कुल 3,48,937 वोटर हैं. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद इसमें छेड़छाड़ की गई. उन्होंने दावा किया कि 13,150 वोटर्स के EPIC नंबर वही हैं लेकिन उनके नाम बदल दिए गए.
सुप्रिया श्रीनेत ने आरोप लगाया कि यह सब एक पैटर्न के तहत सॉफ्टवेयर की मदद से किया गया. उन्होंने कहा कि अब जब ये 13,150 लोग वोट डालने जाएंगे, तो वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं मिलेगा और वे अपने मदाधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. उन्होंने आशंका जताई कि जिन लोगों के नाम बदले गए हैं, उनमें सत्ता पक्ष के विरोधी वोटर भी हो सकते हैं.
सुप्रिया श्रीनेत के मुताबिक, जिन लोगों के नाम बदले हैं उनमें ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग पुरुष शामिल हैं.