कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, मामले की कड़ियां नए सवाल खड़े कर रही हैं. अब पुलिस की जांच का दायरा कारोबारी के बेटे सुब्रत तक पहुंच गया है. जांच में सामने आया है कि कथित शूटर विशाल गौतम ने वारदात से ठीक दो दिन पहले नया सिम खरीदा था और इसी नंबर से सुब्रत को छह बार कॉल की गई थी. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर हत्या के लिए खरीदे गए नए नंबर से सुब्रत से संपर्क क्यों किया गया. इस मामले में सुब्रत की पत्नी शालू समेत तीन लोग पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं.
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, शूटर विशाल गौतम ने 3 सितंबर को नया सिम खरीदा था. इसके दो दिन बाद यानी 5 सितंबर को विनीत मनोचा की हत्या हुई. पुलिस के मुताबिक, इसी नए नंबर से विशाल ने शालू से भी बात की थी. अब जांच में सामने आया है कि इस नंबर से सुब्रत को छह कॉल की गई थीं. पुलिस आयुक्त ने कहा कि अगर शालू ने हत्या की योजना बनाई थी और विशाल ने वारदात के लिए नया नंबर खरीदा था, तो फिर उसी नंबर से सुब्रत को कॉल क्यों की गईं, यह जांच का अहम सवाल है. इसी बिंदु को लेकर पुलिस अब सुब्रत की संभावित भूमिका की भी पड़ताल कर रही है.
सात नंबरों के करीब 1,000 पन्नों के रिकॉर्ड
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने सुब्रत, शालू और विशाल से जुड़े सात मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड हासिल किए हैं. ये रिकॉर्ड 1 मई से 6 सितंबर तक के हैं और करीब 1,000 पन्नों में हैं. पुलिस इन रिकॉर्ड को खंगालकर यह समझने की कोशिश कर रही है कि हत्या से पहले और बाद में किससे किसकी कितनी और किस समय बातचीत हुई. पुलिस उपायुक्त पश्चिम एसएम कासिम अबिदी ने बताया कि कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया जा रहा है. इसका उद्देश्य हत्या से पहले और बाद में हुई बातचीत की प्रकृति को समझना है. रिकॉर्ड में एक और अहम बात सामने आई है. पुलिस के अनुसार, 1 मई से 5 सितंबर के बीच सुब्रत और विशाल के बीच करीब 309 बार बातचीत हुई.5 सितंबर की रात ही मनोचा की हत्या हुई थी.
पहले मनोचा की कंपनी से हटाया गया था विशाल
पुलिस के मुताबिक, विशाल गौतम पहले विनीत मनोचा के यहां काम करता था. कथित चोरी के आरोप में उसे नौकरी से हटा दिया गया था. हालांकि नौकरी से हटाए जाने के बाद भी विशाल का सुब्रत से संपर्क बना रहा. पुलिस अब इसी संपर्क की भी जांच कर रही है. जांचकर्ताओं के सामने सवाल है कि नौकरी से हटाए जाने के बाद भी दोनों के बीच लगातार बातचीत क्यों होती रही और हत्या से पहले उनके संपर्क का क्या संदर्भ था. इसीलिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड को मामले की जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
जेल में शालू और विशाल से 30 से ज्यादा सवाल
अदालत की अनुमति लेने के बाद कल्याणपुर थाना प्रभारी केशव तिवारी ने मंगलवार को जेल में शालू और विशाल से पूछताछ की. पुलिस ने दोनों से कथित साजिश, आपसी बातचीत और हत्या से पहले तथा बाद की गतिविधियों को लेकर 30 से ज्यादा सवाल पूछे. पुलिस के मुताबिक, शालू ने हत्या की योजना बनाने से इनकार किया है. वहीं विशाल ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने शालू के कहने पर विनीत मनोचा की हत्या की. विशाल के अनुसार, शालू ने उसे छह लाख रुपये और नौकरी देने का वादा किया था. दोनों के बयानों की जांच अब पुलिस दूसरे साक्ष्यों के साथ कर रही है. पुलिस ने शालू और विशाल की कस्टडी रिमांड भी मांगी है. पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के मुताबिक, रिमांड दो दिन के भीतर मिलने की संभावना है. अगर रिमांड मिलती है तो जांचकर्ता दोनों आरोपियों के साथ सुब्रत से भी आमने-सामने पूछताछ कर सकते हैं. इसका मकसद बयानों में मौजूद अंतर और घटनाक्रम से जुड़े सवालों को स्पष्ट करना होगा. पुलिस आरोपियों के बयानों को सीसीटीवी फुटेज से भी मिला रही है. खास तौर पर सुब्रत के उस बयान की जांच की जा रही है, जिसमें उसने परिसर में दाखिल हुए व्यक्ति की पहचान विशाल के तौर पर करने की बात कही थी.
हत्या के बाद विशाल ने कहां-कहां फोन किया?
जांच में पुलिस विशाल गौतम की हत्या के बाद की गतिविधियों को भी ट्रेस कर रही है. पुलिस के अनुसार, वारदात के बाद विशाल ने अपने सहयोगी राज किशोर को पांच बार फोन किया था. इसके बाद वह उबर कैब से अपने ठिकाने तक गया. अब पुलिस कैब के रूट, ड्राइवर के बयान और डिजिटल पेमेंट रिकॉर्ड की जांच कर रही है. इन जानकारियों के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के बाद विशाल की गतिविधियां किस तरह रहीं और वह किन लोगों के संपर्क में था. पुलिस आयुक्त ने उन रिपोर्टों को अफवाह बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि शालू ने इंटरनेट पर किसी व्यक्ति की हत्या के तरीके खोजे थे. हालांकि पुलिस शालू के फोन से मिले डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित ने जब्त फोन को लेकर सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि फोन से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट पर 6 सितंबर को सुबह 10:03 बजे गतिविधि दिखाई गई थी. वकील ने हत्या की रात सुब्रत के बैंक जाने की रिपोर्ट की जांच की मांग भी की है.
अब संपत्ति और कर्ज का एंगल भी जांच में
पुलिस विनीत मनोचा की संपत्तियों और आर्थिक मामलों की भी जांच कर रही है. पुलिस आयुक्त के मुताबिक, वर्ष 2022 में पंजीकृत वसीयत में मनोचा ने अपनी संपत्तियां पत्नी पुनीता, बेटे सुब्रत और बेटी शुभानी के नाम की थीं. जांच में पुलिस को कानपुर और गाजियाबाद में संपत्तियों की जानकारी मिली है. इनमें बिरहाना रोड के फ्लैट और कैनाल रोड की संपत्ति के अलावा अन्य संपत्तियां भी शामिल हैं. अब पुलिस यह भी जांच रही है कि संपत्तियों के बंटवारे का हत्या से कोई संबंध था या नहीं. इसके साथ ही पुलिस को सुब्रत पर कर्ज होने के संकेत भी मिले हैं. पुलिस के अनुसार, इसमें ऑनलाइन क्रेडिट और दूसरी देनदारियां शामिल हैं.
5 सितंबर को हुई थी विनीत मनोचा की हत्या
60 वर्षीय विनीत मनोचा बिरहाना रोड पर अपने बेटे के साथ फार्मास्युटिकल फर्म चलाते थे. 5 सितंबर की तड़के उनकी चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में अब तक शालू, विशाल और राज किशोर जेल में हैं. लेकिन नए सिम से सुब्रत को की गई छह कॉल ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है. पुलिस अब सात मोबाइल नंबरों के करीब 1,000 पन्नों के कॉल रिकॉर्ड, सुब्रत और विशाल के बीच हुई 309 बातचीत, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल पेमेंट, उबर कैब की जानकारी और आरोपियों के बयानों को एक साथ रखकर मामले की कड़ियां जोड़ रही है.