उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के शंभूपुर गांव में मुख्य आरोपी अरविंद सिंह द्वारा पत्नी और दो पुजारियों की हत्या के बाद पुलिस एनकाउंटर में मारे जाने के मामले में डीजीपी मुख्यालय ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्य साझा किए हैं. रिपोर्ट से साबित हुआ है कि अरविंद सिंह ने ही पुलिस मुठभेड़ के दौरान अपने ही बेटे को गोली मारी थी. अरविंद ने घर में पूजा-पाठ के दौरान पत्नी बबीता और दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी और बच्चों को बंधक बना लिया था. पुलिस की क्रॉस फायरिंग में आरोपी को ढेर कर दिया गया, जबकि उसकी गोली से बेटे की भी मौत हो गई. घटना में कुल 5 मौतें हुईं और गुरुवार शाम शवों का अंतिम संस्कार किया गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के 3 सबसे बड़े सबूत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से साफ हुआ कि बच्चे के एंट्री वुंड पर ब्लैकनिंग, टैटूइंग और स्कॉचिंग मौजूद है, जो केवल एक फुट से कम दूरी से गोली चलाने पर ही संभव है. पुलिस टीम क्रॉस फायरिंग के दौरान बच्चे से 8-10 फीट दूर थी. इसके अलावा, बच्चे के शरीर में गोली की ट्रैजेक्टरी (दिशा) और 32 बोर रिवॉल्वर के एंट्री वुंड का साइज यह साबित करता है कि अरविंद ने बच्चे को अपनी पकड़ या गोद में लेकर बहुत पास से गोली मारी थी.
10 साल की चश्मदीद बच्ची ने दिया बयान
घटना के समय आरोपी ने 10 साल की बच्ची को बंधक बनाकर शील्ड की तरह इस्तेमाल किया था. पुलिस ने इस बच्ची को सकुशल रेस्क्यू कर बाहर निकाला. घटना की चश्मदीद साक्षी इस बच्ची ने स्वयं बताया है कि उसके पिता ने ही अपने बेटे को गोली मारी थी. वह आरोपी समझाने के दौरान भी अपने परिजनों और बच्चों को गोली मारने की धमकी दे रहा था.
उग्र मनोदशा में लिया था खौफनाक फैसला
डीजीपी मुख्यालय के अनुसार, जो व्यक्ति अपनी पत्नी की हत्या कर सकता है और भतीजी पर कुल्हाड़ी से वार कर सकता है, उसकी ऐसी उग्र मनोदशा में अपने बच्चों को भी गोली मारने की पूरी संभावना बनती है. पुलिस आरोपी को न्यूट्रलाइज करने के बाद ही बच्चों तक पहुंच सकी थी.