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मेरठ में इंसान बंदर क्यों बन गए? डीएम के पास पहुंचकर सुनाया दर्द... जानिये इस विरोध-प्रदर्शन की कहानी

मेरठ में कुछ लोग बंदर बनकर सड़क पर उतर आए. किसी ने मुखौटा पहना, तो किसी ने बंदरों जैसी हरकतें कीं. ये कोई नाटक नहीं था और न ही किसी फिल्म की शूटिंग. ये उन लोगों का विरोध था, जिनके इलाके में बंदरों की समस्या बढ़ गई है. लोगों का आरोप है कि शिकायत लेकर जाते हैं, सुनवाई नहीं होती. आखिर इंसानों को अपनी बात सुनाने के लिए बंदर क्यों बनना पड़ा?

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बंदर बनकर प्रदर्शन करने लगे लोग. (Photo: Screengrab)
बंदर बनकर प्रदर्शन करने लगे लोग. (Photo: Screengrab)

यूपी में मेरठ के कुछ लोगों ने अपनी परेशानी बताने के लिए ऐसा तरीका चुना कि लोग उन्हें देखते रह गए. कोई बंदर का मुखौटा पहनकर निकला, तो कोई बंदरों जैसी हरकतें करने लगा. ये किसी फिल्म की शूटिंग नहीं थी. न ही कोई मजाक चल रहा था. ये बंदरों से परेशान लोगों का विरोध प्रदर्शन था.

मामला मेरठ के वार्ड नंबर 60 का है. यहां के लोगों का आरोप है कि पिछले करीब दो महीने से इलाके में बंदरों की समस्या बढ़ गई है. शिकायतें की गईं, लेकिन समाधान नहीं हुआ. आखिरकार लोग बंदर बनकर कमिश्नरी चौराहे से कलेक्ट्रेट पहुंचे और डीएम से शिकायत की.

इन लोगों के इलाके में बंदरों की समस्या इतनी बढ़ गई कि लोगों को इस तरह प्रदर्शन करना पड़ा. प्रदर्शन कर रहे लोगों के मुताबिक, फूलबाग और नेहरू नगर इलाके में बंदरों के झुंड सड़कों और घरों के आसपास दिखाई देते हैं. उनका दावा है कि कई जगह बंदरों की संख्या इतनी ज्यादा है कि लोगों को घर से बाहर निकलने में भी परेशानी होती है.

meerut people wear monkey masks protest against monkey menace

लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बंदरों के हमलों में कुछ लोग घायल हुए हैं. इलाके में स्कूल होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी अभिभावक चिंतित हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि स्कूलों के आसपास भी बंदरों के झुंड नजर आते हैं, जिससे छोटे बच्चों के लिए खतरा बना रहता है. यानी लोगों की शिकायत सिर्फ घरों की छतों या गलियों तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि बंदरों की वजह से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है.

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सवाल है कि जब बंदरों की समस्या है, तो इसका समाधान कौन करेगा? प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वे नगर निगम में शिकायत करते हैं, तो उन्हें वन विभाग के पास भेज दिया जाता है. वहीं, वन विभाग में शिकायत करने पर कथित तौर पर कहा जाता है कि यह नगर निगम का काम है. लोगों का कहना है कि इसी खींचतान में उनकी समस्या बनी हुई है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आखिर शिकायत लेकर जाएं तो कहां जाएं.

इसी नाराजगी को जाहिर करने के लिए लोगों ने बंदर के मुखौटे पहने और विरोध प्रदर्शन किया. कमिश्नरी चौराहे से कलेक्ट्रेट तक पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम और वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी की.

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बंदर बनकर डीएम के पास क्यों पहुंचे लोग?

जब शिकायतों से समाधान नहीं निकला, तो लोगों ने अपने विरोध को ऐसा रूप दिया, जिस पर प्रशासन का ध्यान जाए. बंदर के मुखौटे पहनकर प्रदर्शन करना इसी कोशिश का हिस्सा था. प्रदर्शन के बाद लोगों ने डीएम को ज्ञापन सौंपा. इसमें फूलबाग और नेहरू नगर क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने की मांग की गई. इस प्रदर्शन में वार्ड नंबर 60 से जुड़े ठाकुर नीरज सिंह भी शामिल रहे, जो पूर्व पार्षद और वर्तमान पार्षद के पति हैं.

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फिलहाल, प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांग जिलाधिकारी तक पहुंचा दी है. लेकिन लोगों की असली चिंता यही है कि बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा. फिलहाल, लोग बंदरों से राहत चाहते हैं. अब देखना होगा कि ज्ञापन के बाद प्रशासन उनकी शिकायत पर क्या कदम उठाता है.

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