लखनऊ के कृष्णानगर थाना क्षेत्र में फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर कारोबारी का अपहरण करने और 13 लाख रुपये नकद व जेवर वसूलने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके अन्य साथियों की तलाश कर रही है. डीसीपी साउथ मोहम्मद मुश्ताक ने मामले का खुलासा किया है.
राजेंद्रनगर निवासी कारोबारी सुदर्शन घोष ने 13 सितंबर को कृष्णानगर थाने में अपहरण और फिरौती की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था. पीड़ित के मुताबिक, वह अपने दफ्तर जा रहे थे, तभी बदमाशों ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए फर्जी आईडी कार्ड दिखाया और उन्हें जबरन कार में बैठा लिया. इसके बाद असलहे के बल पर उनके साथ मारपीट की गई.
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बदमाशों ने कारोबारी से उनकी पत्नी को फोन कराया और घर से भारी रकम व जेवर मंगवाए. पुलिस जांच में सामने आया कि यह वारदात पहले से सुनियोजित थी. आरोपियों ने लखनऊ के ही एक व्यक्ति के जरिए सुदर्शन की आर्थिक स्थिति और आवाजाही की जानकारी जुटाई थी. यह शख्स पीड़ित का करीबी बताया जा रहा है.
ऐसे रची गई अपहरण की साजिश
गिरोह के सदस्यों ने शहर में रहकर कारोबारी की लगातार रेकी की. उनकी गतिविधियों पर नजर रखने के बाद मौका मिलते ही अपहरण की वारदात को अंजाम दिया गया. घटना के खुलासे के लिए पुलिस की 8 विशेष टीमों के साथ सर्विलांस सेल को लगाया गया.
जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल से लेकर वारदात के रूट तक करीब 220 से 240 CCTV फुटेज खंगाले. तकनीकी साक्ष्यों और मैनुअल इनपुट के आधार पर टीम अपराधियों तक पहुंची. पुलिस ने अनुराग, लवी कुमार, दीपांशु कुमार, अनुराग कुमार, आकाश चौधरी और मनीष कुमार को गिरफ्तार किया.
पूछताछ में पता चला कि आरोपी गाड़ियों पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर चलते थे, ताकि उनकी पहचान न हो सके. वारदात के बाद सभी अलग-अलग राज्यों में भाग गए थे. पुलिस के मुताबिक, लूटी गई रकम को आरोपियों ने आपस में बांट लिया था.
नई वारदात के लिए फिर पहुंचे थे लखनऊ
पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य किसी नई बड़ी वारदात को अंजाम देने के इरादे से दोबारा लखनऊ पहुंचे थे. इसी दौरान सतर्क पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ लिया. गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है. साथ ही कारोबारी से वसूली गई रकम और जेवरों में से बाकी सामान की बरामदगी के प्रयास किए जा रहे हैं. मामले की जांच में पुलिस तकनीकी साक्ष्यों के साथ आरोपियों से पूछताछ कर रही है.