यूपी की राजनीति में कैबिनेट मंत्री, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख और एनडीए सहयोगी ओमप्रकाश राजभर के बार-बार किए जा रहे दावे ने एक बार फिर समाजवादी पार्टी के भीतर संभावित टूट को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है. राजभर ने एक बार फिर न सिर्फ सपा में बड़ी टूट की भविष्यवाणी की है, बल्कि यह भी कहा है कि इस कथित बगावत का नेतृत्व उत्तर प्रदेश की ‘बागी भूमि’ कहे जाने वाले जिले का एक नेता करेगा.
राजभर ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट करते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है और जल्द ही इसका असर दिखाई देगा. उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों से लोग उनसे लगातार पूछ रहे हैं कि क्या सपा में टूट होने वाली है. इसके जवाब में उन्होंने कहा कि सपा के बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व उत्तर प्रदेश की ‘बागी भूमि’ का एक लाल करेगा. और करे भी क्यों न? कल जिस तरह से सपा कार्यालय में सम्मेलन के नाम पर ब्राह्मणों को तिरस्कृत किया गया, उससे 'बागी बलिया' का लाल बहुत आहत है. योजना पहले से थी लेकिन कल कि घटना ने आग में घी डालने का काम कर दिया है. टूट होकर रहेगी. मेरी एक प्रतिक्रिया पर जिस तरह से पूरा सैफई खानदान मुझे गाली देने और सफाई देने में जुट गया, उससे ज्यादा बेहतर है कि अखिलेश बाबू ट्विटर, ऐसी और पीसी वाली नेतागिरी छोड़कर अब सांसद बचाओ अभियान शुरू कर दें. और दुखी एवं निराश सांसदों के घर जाकर उनसे माफी मांगे.
अखिलेश यादव का पलटवार
इससे पहले कल भी राजभर ने सपा में टूट का बयान दिया था जिस पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी जवाब देने में देर नहीं लगाई. उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भविष्यवाणी करने वालों को पहले अपनी पार्टी का भविष्य देखना चाहिए. अखिलेश ने तंज कसते हुए पूछा कि भाजपा उनके सहयोगियों को आखिर कितनी सीटें देने जा रही है 75, 50 या फिर केवल आश्वासन? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा गठबंधन में सीटों को लेकर अफवाहें फैलाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा है. सपा प्रमुख ने अपने जवाब में यह भी कहा कि कुछ लोग गठबंधन की सीटों को लेकर पहले ही बड़े-बड़े दावे कर चुके हैं और अब उन्हीं दावों का हिसाब देने की नौबत आ गई है.
फिर आया राजभर का जवाब
अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया के बाद राजभर ने एक और पोस्ट लिखकर हमला और तेज कर दिया. उन्होंने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि उन्हें लगता था कि अखिलेश राजनीतिक रूप से समझदार होंगे, लेकिन अब उनकी धारणा बदल गई है. राजभर ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के भीतर ही कुछ लोग नेतृत्व को कमजोर करने में लगे हैं. उन्होंने संकेतों में कहा कि पार्टी के अंदरूनी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और आने वाले समय में कई चौंकाने वाले घटनाक्रम सामने आ सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वे लगातार चेतावनी दे रहे हैं, लेकिन उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा. राजभर ने अपने राजनीतिक विरोधियों को चुनौती देते हुए कहा कि वे समय आने पर कई और राजनीतिक कहानियों का खुलासा करेंगे.
2008 के ‘वोट के बदले नोट’ मामले का भी जिक्र
अपने हमले को और धार देने के लिए राजभर ने 2008 के चर्चित ‘वोट के बदले नोट’ प्रकरण का भी उल्लेख किया. उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र की रक्षा के नाम पर उस दौर में कई तरह के राजनीतिक खेल खेले गए थे. हालांकि उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई नया तथ्य सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन इस मुद्दे को उठाकर उन्होंने सपा पर दबाव बनाने की कोशिश जरूर की.
केशव मौर्य के बयान से बढ़ी सियासी गर्मी
वहीं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कानपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए दावा किया कि समाजवादी पार्टी के 25 से 26 सांसद वर्तमान में पाला बदलने और पार्टी तोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं. टीएमसी और शिवसेना में हुई टूट का उदाहरण देते हुए भाजपा नेताओं द्वारा सपा में दरार की बातें कही जा रही हैं. उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भाजपा फिलहाल उनकी पार्टी को खुद नहीं तोड़ रही है बल्कि साल 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव तक ये नेता अपने आप ही टूटकर चले जाएंगे. इस सियासी घमासान के बीच राम मंदिर मामले पर भी बयानबाजी हुई है.