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15 लाख की ठगी, 6 गिरफ्तारियां और फिर बरी... दारोगा पर कार्रवाई की सिफारिश

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में 15 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में अदालत ने ओडिशा के छह आरोपियों को बरी कर दिया. पुलिस ने तीन महिलाओं और तीन पुरुषों को गिरफ्तार कर 15 लाख रुपये और दो मोबाइल बरामद करने का दावा किया था. सुनवाई में आरोप साबित नहीं होने पर सीजेएम ने तत्कालीन विवेचक दारोगा के खिलाफ कार्रवाई के लिए DGP और SP को पत्र भेजा.

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दारोगा पर कार्रवाई के लिए DGP को पत्र.(Photo: Akhilesh Kumar/ITG)
दारोगा पर कार्रवाई के लिए DGP को पत्र.(Photo: Akhilesh Kumar/ITG)

उत्तर प्रदेश के कौशांबी में 15 लाख रुपये की ठगी के मामले में पुलिस की विवेचना पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं. ठगी के आरोप में जेल भेजे गए ओडिशा के छह आरोपियों को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया है. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका और गवाहों के बयान भी आरोपों की पुष्टि नहीं कर पाए. इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) मंजू कुमारी ने मामले के तत्कालीन विवेचक दारोगा आलोक रंजन तिवारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) और कौशांबी के पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजा है.

दरअसल, पूरा मामला कोखराज थाना क्षेत्र का है. मंझनपुर कोतवाली के मलकिया गांव निवासी श्रीनाथ मौर्य ने 24 मई 2025 को पुलिस को तहरीर दी थी. शिकायत में उन्होंने बताया था कि घटना से करीब पांच दिन पहले उनके गांव के पास कुछ बंजारा समुदाय के लोग डेरा डालकर रह रहे थे. इसी दौरान उन्होंने श्रीनाथ को सोने का एक टुकड़ा दिखाया और उसे जांचने के लिए कहा. जांच करने पर उन्हें वह टुकड़ा सोने का लगा.

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श्रीनाथ के मुताबिक, इसके बाद उन लोगों ने उन्हें अपने डेरे का पूरा सोना दिखाया और उसे देने का वादा किया. 23 मई 2025 को फोन करके उन्हें पैसे लेकर आने और सोना ले जाने के लिए कहा गया. शिकायतकर्ता के अनुसार, वह बिना किसी को बताए बताए गए स्थान पर पहुंचे. वहां बातचीत के बाद उन्हें सोना दिया गया, लेकिन जांचने पर वह नकली निकला. आरोप है कि इस दौरान आरोपी उनके 15 लाख रुपये लेकर फरार हो गए.

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पुलिस ने तीन महिलाओं समेत छह लोगों को किया था गिरफ्तार

श्रीनाथ मौर्य की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन महिलाओं और तीन पुरुषों समेत छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था. इसके बाद कोखराज थाना पुलिस ने चक चमरूपुर गांव के पास कार्रवाई करते हुए सभी छह संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने उन्हें अंतरजनपदीय ठगी करने वाला गिरोह बताया था.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरिदास, अंबिकादास, बाला प्रधान, ममुनीदास, रीनादास और राधादास के रूप में हुई थी. पुलिस के मुताबिक, सभी ओडिशा के रहने वाले थे. गिरफ्तारी के दौरान उनके पास से कथित तौर पर ठगी के 15 लाख रुपये और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे.

मामले की विवेचना तत्कालीन दारोगा आलोक रंजन तिवारी ने की थी. जांच पूरी होने के बाद उन्होंने आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया. हालांकि, मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका. गवाहों के बयान भी अभियोजन की कहानी की पुष्टि नहीं कर पाए.

अदालत ने छह आरोपियों को किया बरी, विवेचक पर कार्रवाई के लिए पत्र

सुनवाई के बाद सीजेएम मंजू कुमारी ने छहों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया और उनकी रिहाई का आदेश जारी किया. अदालत में आरोप साबित नहीं होने के कारण ठगी के इस मामले में पुलिस की ओर से दाखिल आरोप पत्र के आधार पर आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सका.

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अदालत ने विवेचना में लापरवाही और मामले से जुड़े तथ्यों को लेकर गंभीर सवाल उठाए. इसके बाद तत्कालीन विवेचक आलोक रंजन तिवारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक और कौशांबी के पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा गया है. इस घटनाक्रम के बाद संबंधित दरोगा के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है.

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