वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े साधक रसिक दुलारी शरण की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद मामला लगातार उलझता जा रहा है. पुलिस प्रथम दृष्टया इसे आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही है, लेकिन परिवार के कुछ सवालों ने घटना को लेकर कई पहलुओं पर चर्चा शुरू कर दी है. परिजनों का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी फोन के जरिए मिली और जब वे रात करीब तीन बजे आश्रम पहुंचे तो वहां काफी देर तक उन्हें घटना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.
मृतक रसिक दुलारी शरण का वास्तविक नाम दीपक लोधी है. वह मध्य प्रदेश के जबलपुर का रहने वाला था और वर्ष 2024 से वृंदावन में रह रहा था. वह संत प्रेमानंद महाराज का शिष्य बताया गया है. दीपक के साले सोनू पटेल के मुताबिक, दीपक ने जब से गुरु दीक्षा ली थी, उसके बाद से उनसे मिलना मुश्किल हो गया था. परिजनों का दावा है कि वे कई बार आश्रम पहुंचकर उससे मिलने की कोशिश करते रहे, लेकिन उन्हें इंतजार करने के लिए कहा जाता था. अब दीपक की मौत के बाद परिवार उन तमाम बातों को याद कर रहा है और सवाल उठा रहा है कि आखिर घटना के समय उसके साथ क्या हुआ था.
फोन आया- बताया गया कि गिर गए हैं
परिवार की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, घटना की जानकारी उन्हें एक फोन के जरिए मिली. परिजनों को बताया गया कि दीपक गिर गए हैं और उनकी हालत गंभीर है. अस्पताल में ऑपरेशन की बात कही जा रही है. फोन आने के बाद परिवार के लोग वृंदावन के लिए रवाना हुए. परिजनों के मुताबिक, वे रात करीब तीन बजे वहां पहुंचे. इसके बाद वे सीधे प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से दीपक के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की. परिवार का कहना है कि उन्हें उस समय स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई. उनसे बाहर बैठने के लिए कहा गया. वे काफी देर तक बाहर बैठे रहे और सुबह होने का इंतजार करते रहे.
रात 3 बजे आश्रम पहुंचे, सुबह तक करते रहे इंतजार
परिजन बताते हैं कि रात में आश्रम पहुंचने के बाद उन्हें बाहर बैठने के लिए कहा गया था. सुबह करीब आठ बजे तक वे वहीं रहे. इसके बाद भी उन्हें दीपक के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली. परिवार का कहना है कि करीब नौ बजे के आसपास वे वहां से निकल गए. उनके मुताबिक, इस दौरान भी उन्हें घटना के बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया गया. परिजनों के इस दावे ने मामले को लेकर एक सवाल जरूर खड़ा किया है कि घटना के बाद परिवार को जानकारी देने और उन्हें स्थिति समझाने में इतना समय क्यों लगा. हालांकि, इस संबंध में आश्रम की ओर से कोई पक्ष परिवार के बताए इन आरोपों में सामने नहीं आया है.
2024 से वृंदावन में रह रहा था दीपक
परिजनों के मुताबिक दीपक वर्ष 2024 से वृंदावन में रह रहा था. परिवार के लोग बीच-बीच में उससे मिलने के लिए आते थे. उनका कहना है कि शुरुआती दौर में वे उससे मुलाकात कर लेते थे, लेकिन बाद में स्थिति बदल गई. परिवार का कहना है कि जब से दीपक ने गुरु दीक्षा ली, उसके बाद से लोगों को उससे मिलने नहीं दिया जाता था. परिजन जब आश्रम पहुंचते तो उन्हें कभी एक घंटे तो कभी दो घंटे इंतजार करने के लिए कहा जाता था. परिजनों के मुताबिक, वे लगातार उससे मिलने की कोशिश करते रहे. उनका कहना है कि तीन दिन तक वे आश्रम के चक्कर लगाते रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी. दीपक की मौत के बाद जब परिवार से उसकी मानसिक स्थिति और आत्महत्या की आशंका को लेकर सवाल किया गया तो परिजनों ने कहा कि उन्हें कभी ऐसा नहीं लगा कि वह इस तरह का कदम उठा सकता है. परिवार के मुताबिक दीपक उनके लिए बिल्कुल सामान्य था और उसने कभी परिवार में इस तरह की बात नहीं की थी. परिजनों का कहना है कि वह 'सबसे सही लड़का' था और परिवार में ऐसी कोई बात नहीं थी जिससे उन्हें उसके आत्महत्या करने की आशंका होती.
क्या किसी ने कुछ गलत किया था?
परिजनों ने यह भी बताया कि दीपक कुछ लोगों से ऐसी बातें करता था कि उसके साथ कुछ गलत हुआ है. हालांकि, परिवार के पास ऐसी किसी बात की स्पष्ट जानकारी नहीं है कि आखिर वह किस घटना या परेशानी की ओर इशारा कर रहा था. परिवार की ओर से शरीर पर चोटों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. परिजनों का कहना है कि उन्हें उसके प्राइवेट पार्ट के पास भी चोट होने की बात पता चली है. ऐसे में परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि दीपक की मौत किन परिस्थितियों में हुई.
चौथी मंजिल से गिरने की बात
घटना वृंदावन के कोतवाली क्षेत्र में स्थित गुरु कृपा कुंज से जुड़ी बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, सुबह करीब 10:30 बजे साधक के चौथी मंजिल से गिरने की बात सामने आई. घटना के बाद उसे गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया. उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें थीं. उसे सर्वोदय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बताया गया है कि अस्पताल ले जाने का काम आश्रम से जुड़े लोगों ने किया था. पुलिस को घटना की जानकारी बाद में मिली. यही वजह है कि अब पुलिस घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देख रही है.
परिवार को आश्रम से किसी के आने का इंतजार
दीपक के परिजन इस घटना के बाद मथुरा पहुंचे हैं. परिवार का कहना है कि उन्हें आश्रम की ओर से अब तक कोई व्यक्ति मिलने या संवेदना जताने के लिए नहीं आया है. परिजनों से बातचीत में यह भी सामने आया कि उन्हें उम्मीद थी कि आश्रम की ओर से कोई व्यक्ति उनके पास आएगा और घटना के बारे में जानकारी देगा. लेकिन परिवार का कहना है कि अभी तक ऐसा नहीं हुआ. हालांकि, इस बारे में आश्रम की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष इस इनपुट में उपलब्ध नहीं है. इसलिए इसे परिवार की ओर से कही गई बात के रूप में ही देखा जाना चाहिए. परिजनों के मुताबिक, दीक्षा लेने के बाद दीपक ने अपनी पुरानी कई चीजें बंद कर दी थीं. परिवार का कहना है कि पहले बातचीत होती थी, लेकिन बाद में संपर्क काफी सीमित हो गया था. यही कारण है कि परिवार के लिए उसकी मौत की खबर अचानक और परेशान करने वाली थी. परिजनों का कहना है कि उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि उसके साथ ऐसी कोई घटना हो सकती है. अब परिवार उन दिनों की घटनाओं और दीपक की कही बातों को याद कर रहा है.
क्या यह आत्महत्या थी या कुछ और?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि दीपक की मौत आत्महत्या थी या फिर इसके पीछे कोई और वजह थी. पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का लग रहा है. लेकिन पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और हर पहलू की पड़ताल की जा रही है. शव को पोस्टमार्टम के लिए रखा गया है. फॉरेंसिक टीम भी मौके से साक्ष्य जुटा रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट से शरीर पर आई चोटों और मौत की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है. इसके बाद पुलिस अपनी जांच को आगे बढ़ाएगी.
परिवार को अब जवाब का इंतजार
दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत ने परिवार को कई सवालों के बीच छोड़ दिया है. परिवार यह समझना चाहता है कि घटना से पहले उसके साथ क्या हुआ था, उसे अस्पताल कब और कैसे ले जाया गया और उन्हें घटना की सही जानकारी मिलने में इतना समय क्यों लगा. परिजनों का कहना है कि वे तीन दिनों तक आश्रम के चक्कर लगाते रहे और दीपक से मुलाकात नहीं हो सकी. अब मौत के बाद वे चाहते हैं कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष तरीके से जांच हो और जो भी वास्तविकता है, वह सामने आए.