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'रात में अधिकारियों ने फोन नहीं उठाया, सुबह मस्जिद गायब' सहारनपुर बुलडोजर एक्शन पर इमरान मसूद-इकरा हसन समेत दूसरे नेताओं ने क्या कहा

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अवैध घोषित मस्जिद को प्रशासन द्वारा बुलडोजर से ध्वस्त करने के बाद राज्य में बड़ा सियासी घमासान छिड़ गया है. सपा सांसद इकरा हसन, विधायक आशु मलिक और इमरान मसूद समेत कई नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र और संविधान पर हमला बताते हुए कोर्ट जाने का ऐलान किया है.

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सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सियासी तूफान (Photo- ITG)
सहारनपुर मस्जिद ध्वस्तीकरण मामले में सियासी तूफान (Photo- ITG)

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद अवैध घोषित मस्जिद को प्रशासन ने भारी पुलिस बल और 4 बुलडोजरों की मदद से तड़के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करके पूरी तरह हटा दिया. अदालत द्वारा फर्स्ट अपील खारिज किए जाने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत यह कदम उठाया गया. इस कार्रवाई का विरोध करने और मौके पर जाने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने सपा सांसद इकरा हसन, सपा विधायक आशु मलिक और कई अन्य नेताओं को उनके घरों में नजरबंद (हाउस अरेस्ट) कर दिया. विपक्ष का आरोप है कि उन्हें बिना मौका दिए और कानून का उल्लंघन करके यह ध्वस्तीकरण किया गया है.

बुलडोजर से हुई तड़के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में विवादित मस्जिद को गिराने की प्रक्रिया शनिवार तड़के 4 बजे से शुरू हुई. मौके पर 4 बुलडोजर तैनात किए गए और सुबह 6 बजे ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया गया. इस दौरान कलेक्ट्रेट के सभी गेट बंद कर दिए गए थे. बुलडोजर के जरिए दीवारों को तोड़ा गया और मलबे को नगर निगम की गाड़ियों में भरकर वहां से हटाया गया.

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कानूनी आदेश और प्रशासनिक पक्ष

सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने कलेक्ट्रेट परिसर की विवादित जमीन को सरकारी भूमि माना था और मस्जिद को अवैध निर्माण घोषित किया था. अदालत ने परिसर खाली करने के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये का जुर्माना भी लगाया था. मस्जिद पक्ष की फर्स्ट अपील को 2 सितंबर को जिला जज की अदालत ने साक्ष्यों की कमी के कारण खारिज कर दिया, जिसके बाद यह प्रशासनिक ध्वस्तीकरण किया गया.

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इमरान मसूद ने बताया 'काला दिन'

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि उनकी पूरी टीम रात भर अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करती रही लेकिन बात नहीं हुई और सुबह बुलडोजर एक्शन हो गया. उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट में सब कुछ दरकिनार कर दिया गया और वक्फ बोर्ड को पक्षकार तक नहीं बनाया गया. इमरान मसूद ने इसे संविधान की धज्जियां उड़ाना और सहारनपुर के लोगों के लिए 'काला दिन' बताते हुए काली पट्टी बांधकर विरोध जताने की अपील की.

इकरा हसन ने सरकार और प्रशासन पर साधा निशाना

कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने बताया कि रात में मस्जिद सील होने की खबर मिलने के बाद वे अधिकारियों से मिलने जा रही थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया. उन्होंने कहा कि 1947 से पहले की इस मस्जिद पर 'प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट' और 'वक्फ बाय यूजर' लागू होता है. अपराधियों को भी अपील का मौका मिलता है, लेकिन एक रात का वक्त भी नहीं दिया गया. उन्होंने कहा कि सपा इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएगी.

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सपा नेताओं और अवधेश प्रसाद का कड़ा रुख

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सपा एमएलए आशु मलिक ने कहा कि कलेक्ट्रेट मस्जिद की जमीन पर बना है और यह कार्रवाई लोकतंत्र की हत्या है. उन्होंने लोगों से धैर्य बनाए रखने की अपील की. वहीं सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि जन-प्रतिनिधियों को नजरबंद करना अलोकतांत्रिक है. बीजेपी चुनावों के मद्देनजर प्रदेश में उन्माद फैलाने की कोशिश कर रही है.

सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस का अलर्ट

सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने बताया कि कोर्ट का फैसला आने के बाद ही ध्वस्तीकरण की यह कार्रवाई की गई है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कलेक्ट्रेट और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और आरएएफ (Rapid Action Force) की 5 कंपनियां तैनात की गई हैं. प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अफवाह या फेक न्यूज फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

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