राम नगरी अयोध्या में इस बार दीपोत्सव का पर्व एक नया इतिहास रचने जा रहा है. 7 नवंबर को आयोजित होने वाले दीपोत्सव के 10वें संस्करण में स्वदेशी तकनीक से बने 2,100 ड्रोन का एरियल शो आयोजित किया जाएगा. ये ड्रोन शो रामायण-थीम पर आधारित होगा.
इसके साथ ही सरयू तट पर 2,147 प्रतिभागी सरयू आरती करेंगे और पूरे धाम को लाखों मिट्टी के दीयों से जगमग किया जाएगा. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को दीपोत्सव की तैयारियों का जायजा भी लिया.
सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 'राम की पौड़ी' समेत पूरी अयोध्या नगरी को पिछले साल की तरह ही भव्य स्तर पर दीयों से रोशन किया जाए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में 2017 में शुरू हुआ दीपोत्सव का ये सफर आज वैश्विक पहचान हासिल कर चुका है.
दीपोत्सव का ये 10वां संस्करण सनातन परंपरा, भारतीय संस्कृति और जन-आस्था का एक अलौकिक उत्सव बनेगा. मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुविधा, सुरक्षा, साफ-सफाई, और सुगम आवाजाही को तरजीह देने के भी निर्देश दिए.
तीन चरणों में आयोजित होगा समारोह
पर्यटन और संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव ने मुख्यमंत्री को बताया कि आयोजन तीन चरणों में आयोजित होगा.
1. पहला चरण: साकेत कॉलेज से एक भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें रामायण के अलग-अलग प्रसंगों पर आधारित झांकियां और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भगवान राम के जिंदगी के आदर्शों को दर्शाएंगी.
2. दूसरा चरण: रामकथा पार्क में भगवान राम और माता सीता का प्रतीकात्मक आगमन होगा, जिसके बाद 'भरत मिलाप' और श्री राम का राज्याभिषेक समारोह आयोजित किया जाएगा.
3. तीसरा चरण: राम की पैड़ी पर सरयू आरती, दीपोत्सव, 200 कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, 2,100 ड्रोन का एरियल शो, लेजर डिस्प्ले, गोंडा पुल के पास पर्यावरण-अनुकूल आतिशबाजी और अंतरराष्ट्रीय रामलीला का मंचन होगा.
13 राज्यों और 12 देशों के कलाकार दिखाएंगे हुनर
इस भव्य आयोजन में करीब 35,000 स्वयंसेवक भाग लेंगे. देश के 13 राज्यों- उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, असम, राजस्थान, बिहार, केरल, गोवा और तेलंगाना के लगभग 1,000 कलाकार अपनी लोक कलाओं और पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन करेंगे.
इसके अलावा, 12 देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी इसमें शामिल होंगे. भारत में पदस्थ विदेशी राजदूतों और विदेशों में तैनात भारतीय राजनयिकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है. डिजिटल माध्यमों से 5 करोड़ से ज्यादा लोगों तक इस आयोजन को पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है.
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मुख्यमंत्री ने ये भी निर्देश दिए कि 26 अक्टूबर को महर्षि वाल्मीकि की जयंती के मौके पर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के मंदिरों में वाल्मीकि रामायण का 'अखंड पाठ' और रामायण पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं.