राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब सिर्फ पूछताछ और कैश बरामदगी तक सीमित नहीं रह गई है. पुलिस की नजर अब आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों पर भी है. इसी कड़ी में अयोध्या के शहादतगंज-बबीरपुर इलाके में बन रहा एक दो मंजिला मकान चर्चा का विषय बन गया है. स्थानीय लोगों का दावा है कि यह मकान गिरफ्तार आरोपी लवकुश मिश्रा के परिवार का है, जबकि उपलब्ध राजस्व दस्तावेजों के अनुसार संपत्ति उसकी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम दर्ज है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि 12 हजार सैलरी की नौकरी करने वाले आरोपी के परिवार के नाम इतनी तेजी से तैयार हो रही इस संपत्ति की कहानी क्या है? इसका जवाब अब जांच एजेंसियां तलाश रही हैं.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों की भी पड़ताल कर रही है. इसी क्रम में कई आरोपियों के घरों पर छापेमारी हुई, जहां से नकदी, जेवर और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई थी. अयोध्या के जयपुरिया स्कूल के पास शहादतगंज-बबीरपुर इलाके में करीब एक हजार वर्गफुट क्षेत्रफल में एक दो मंजिला मकान का निर्माण चल रहा है. मौके पर पहुंचने पर साफ दिखाई देता है कि मकान का स्ट्रक्चर लगभग तैयार हो चुका है. दीवारें खड़ी हैं, कमरों का आकार स्पष्ट है और बिजली की वायरिंग का काम भी काफी हद तक पूरा हो चुका है. ऊपर की मंजिल पर भी निर्माण जारी था. स्थानीय लोगों के मुताबिक, निर्माण कार्य पिछले कुछ महीनों से लगातार चल रहा था.
दस्तावेज क्या कहते हैं
उपलब्ध राजस्व अभिलेखों के अनुसार, इस जमीन का दाखिल-खारिज 6 मार्च 2026 को हुआ था. दस्तावेजों में यह संपत्ति सुप्रिया मिश्रा के नाम दर्ज है, जिन्हें स्थानीय लोग आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी बताते हैं. हालांकि, संपत्ति किस पैसे से खरीदी गई या निर्माण में इस्तेमाल राशि का स्रोत क्या था, यह जांच का विषय है.
पड़ोसी ने क्या बताया
मकान के बगल में रहने वाले स्थानीय निवासी राजकुमार पांडे ने दावा किया कि यह मकान लवकुश मिश्रा के परिवार का है. उनके अनुसार, फरवरी के अंतिम सप्ताह में भूमि पूजन के बाद निर्माण कार्य शुरू हुआ था. उन्होंने बताया कि निर्माण के दौरान लवकुश मिश्रा और उनके परिवार के सदस्य समय-समय पर यहां आते थे. बाद में निर्माण का काम ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा था. राजकुमार पांडे का कहना है कि मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद परिवार के सदस्यों का आना-जाना काफी कम हो गया. हालांकि, उनके अनुसार कुछ दिन पहले तक मजदूर निर्माण कार्य करते दिखाई दे रहे थे.
कितनी हो सकती है कीमत
स्थानीय लोगों का अनुमान है कि इस इलाके में जमीन का बाजार भाव लगभग 2200 से 2300 रुपये प्रति वर्गफुट के आसपास है. इसी आधार पर उनका दावा है कि करीब एक हजार वर्गफुट के इस प्लॉट और निर्माणाधीन मकान की कुल कीमत लगभग 25 लाख रुपये तक हो सकती है. हालांकि, राजस्व दस्तावेजों में दर्ज मूल्य और बाजार मूल्य में अंतर होना सामान्य बात है. किसी संपत्ति का वास्तविक बाजार मूल्य क्या है, इसका निर्धारण जांच एजेंसियां या मूल्यांकन विशेषज्ञ ही कर सकते हैं. जब स्थानीय लोगों से पूछा गया कि क्या परिवार का रहन-सहन देखकर कभी ऐसा लगा कि उनके पास बड़ी आर्थिक क्षमता है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विशेष आभास नहीं होता था. पड़ोसी के अनुसार, लवकुश मिश्रा सामान्य जीवनशैली वाले व्यक्ति प्रतीत होते थे और अक्सर मोटरसाइकिल से आते-जाते दिखाई देते थे. उन्होंने यह भी स्पष्ट कहा कि यह कहना उनके लिए संभव नहीं है कि मकान किस धन से बनाया जा रहा था. यह पूरी तरह जांच का विषय है.
पुलिस क्यों खंगाल रही है संपत्तियां
जांच एजेंसियां केवल इस मामले में कथित चोरी की जांच नहीं कर रहीं, बल्कि यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों ने पिछले कुछ समय में कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदीं, उनमें कितना निवेश हुआ और उस धन का स्रोत क्या था. इसी वजह से पुलिस ने कई आरोपियों के घरों पर छापेमारी कर दस्तावेज जुटाए हैं. इन दस्तावेजों का सत्यापन राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों के माध्यम से कराया जा रहा है.
छापेमारी में क्या मिला था
पुलिस के अनुसार, अलग-अलग आरोपियों के ठिकानों पर हुई तलाशी के दौरान नकदी, आभूषण और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिले थे. इन सभी सामग्रियों की जांच की जा रही है. जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इन संपत्तियों का संबंध कथित अपराध से है या नहीं. मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर इस बात की भी चर्चा है कि राम मंदिर ट्रस्ट में काम करने वाले कर्मचारियों के वेतन की तुलना में कुछ आरोपियों के पास कथित रूप से मूल्यवान संपत्तियां कैसे सामने आईं. हालांकि, किसी व्यक्ति की आय, बचत, पारिवारिक संसाधन या अन्य वैध आय के स्रोतों की पुष्टि केवल जांच के बाद ही की जा सकती है. इसलिए इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी. राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला अब केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं रह गया है. जांच की दिशा आर्थिक लेनदेन, संपत्ति, नकदी और दस्तावेजों तक पहुंच चुकी है.