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क्या सच में ताजमहल की दीवारों के अंदर जाती है रोशनी? वायरल वीडियो का सच जानिए

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि ताजमहल की दीवारों में रोशनी प्रवेश करती है, इसलिए यह रात में चमकता है और दुनिया के सात अजूबों में शामिल है. लेकिन क्या यह दावा सच है?

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संगमरमर में हल्की ट्रांसलूसेंसी  यानी अर्ध-पारदर्शिता होती है (Photo:Insta/@neerajkumar200019 and pexel)
संगमरमर में हल्की ट्रांसलूसेंसी यानी अर्ध-पारदर्शिता होती है (Photo:Insta/@neerajkumar200019 and pexel)

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक शख्स ताजमहल की सफेद संगमरमर की दीवार पर अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट लगाकर दिखाता है. वीडियो में रोशनी दीवार के अंदर कुछ मिलीमीटर तक जाती नजर आती है. इसके बाद वह दावा करता है कि इसी वजह से ताजमहल रात में चमकता है और यही कारण है कि इसे दुनिया के सात अजूबों में शामिल किया गया.

वीडियो को देखकर यूजर्स दो हिस्सों में बंट गए हैं. कुछ लोगों ने इसे ताजमहल का अनोखा रहस्य बताया, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि यह संगमरमर की सामान्य विशेषता है और इसमें कोई रहस्य नहीं है.

क्या है वायरल दावे की सच्चाई?

विशेषज्ञों के अनुसार, वीडियो में दिखाई गई बात पूरी तरह गलत नहीं है, लेकिन इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है. ताजमहल का निर्माण राजस्थान के मकराना संगमरमर से किया गया था. इस संगमरमर में हल्की ट्रांसलूसेंसी (Translucency) यानी अर्ध-पारदर्शिता होती है. इसी वजह से पतले हिस्सों में रोशनी कुछ मिलीमीटर तक अंदर जा सकती है.

यही गुण ताजमहल को दिन के अलग-अलग समय में अलग-अलग रंगों का आभास देता है. सुबह यह हल्का गुलाबी, दोपहर में चमकदार सफेद, शाम को सुनहरा और चांदनी रात में नीले-चांदी जैसे रंग में नजर आ सकता है.

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यह भी पढ़ें: शाहजहां का मकबरा ताजमहल में है, फिर बाबर और अकबर की कब्र कहां हैं?

फिर रात में क्यों चमकता है ताजमहल?

ताजमहल वास्तव में अंदर से रोशनी नहीं देता. इसकी दीवारें काफी मोटी हैं, इसलिए प्रकाश बहुत गहराई तक नहीं पहुंच सकता. रात में इसकी खूबसूरती का कारण चांदनी का प्रतिबिंब, संगमरमर की सतह और उसकी प्राकृतिक अर्ध-पारदर्शिता है.इसके अलावा ताजमहल पर रात के समय कोई विशेष कृत्रिम रोशनी नहीं डाली जाती. इसकी चमक प्राकृतिक प्रकाश और संगमरमर के गुणों का परिणाम है.

देखें वायरल वीडियो

सात अजूबों में क्यों शामिल हुआ?

ताजमहल को 2007 में दुनिया के नए सात अजूबों में शामिल किया गया था. इसका कारण दीवारों में रोशनी का प्रवेश नहीं, बल्कि इसकी अद्भुत वास्तुकला, शानदार समरूपता, बारीक नक्काशी, कीमती पत्थरों की जड़ाई, इंजीनियरिंग कौशल और शाहजहाँ-मुमताज की प्रेम कहानी है.

Photo: Pexel

ताजमहल का इतिहास

ताजमहल का निर्माण 1632 में मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में शुरू करवाया था. इसे बनने में करीब 22 साल लगे और 20 हजार से अधिक कारीगरों ने इस पर काम किया. आज यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है और दुनिया के सबसे प्रसिद्ध स्मारकों में गिना जाता है.

वायरल वीडियो ताजमहल के संगमरमर की एक वास्तविक वैज्ञानिक विशेषता को दिखाता है, लेकिन इसे कोई रहस्यमयी राज या सात अजूबों में शामिल होने का मुख्य कारण बताना गलत है. ताजमहल की असली खूबसूरती उसकी वास्तुकला, इतिहास, शिल्पकला और प्रेम की कहानी में छिपी है.

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