किसी कब्र में दफन शव के पैर में ताला लगा हो और गर्दन के ऊपर लोहे की दरांती रखी हो, तो पहली नजर में यह किसी डरावनी फिल्म का सीन लग सकता है. लेकिन करीब 400 साल पुरानी एक कब्र से मिले एक लड़की के कंकाल ने इतिहास के ऐसे राज से पर्दा उठाया है, जब लोग मृतकों के दोबारा जिंदा होकर लौटने से डरते थे.
न्यूयॉर्क पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पोलैंड में साल 2022 में पुरातत्वविदों को एक ऐसी ही रहस्यमय कब्र मिली थी. इस कब्र में दफन लड़की को शोधकर्ताओं ने प्यार से 'जोसिया' नाम दिया. वह कोई खतरनाक महिला या 'वैंपायर' नहीं थी, बल्कि करीब 17 से 19 साल की एक लड़की थी. लेकिन उसकी मौत के बाद जिस तरह से उसे दफनाया गया, वह बेहद हैरान करने वाला था.
पैर में लगाया था ताला, गर्दन पर रखी थी दरांती
जोसिया को एक ताबूत में दफनाया गया था. उसके पैर के अंगूठे से एक लोहे का ताला बांधा गया था. उस समय ऐसा करने के पीछे लोगों का मानना था कि मृत व्यक्ति दोबारा कब्र से बाहर न निकल सके.
इतना ही नहीं, बाद में उसकी कब्र को दोबारा खोला गया और उसके शरीर के ऊपर एक लोहे की दरांती इस तरह रखी गई कि अगर शव उठकर बाहर निकलने की कोशिश करे तो उसकी गर्दन कट जाए.
यह पूरा इंतजाम कुछ ऐसा था जैसे किसी मशीन में कई चीजों को जोड़कर एक खास मकसद पूरा किया जाता है. शोधकर्ताओं का मानना है कि दरांती को इस तरह लगाने का मकसद यही था कि अगर जोसिया 'जिंदा' होकर कब्र से बाहर आने की कोशिश करे तो उसका सिर धड़ से अलग हो जाए.
सवाल उठता है कि आखिर उस दौर के लोग एक लड़की से इतना क्यों डरते थे? आज हम वैंपायर को फिल्मों और कहानियों में खून पीने वाले राक्षस के तौर पर देखते हैं. लेकिन पूर्वी यूरोप में सदियों पहले लोगों के बीच इससे जुड़े डर की जड़ें काफी गहरी थीं.
करीब 11वीं सदी से पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों में ऐसी मान्यताएं फैलने लगी थीं कि कुछ मृत लोग मरने के बाद भी कब्र से बाहर आ सकते हैं. लोगों को डर था कि ये 'मृत' वापस आकर आसपास रहने वाले लोगों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.
17वीं सदी तक पोलैंड में ऐसी मान्यताओं के कारण मृतकों को असामान्य तरीके से दफनाने की घटनाएं सामने आने लगी थीं. कुछ लोगों के शरीर पर ऐसी चीजें रखी जाती थीं, जिनसे उनके दोबारा कब्र से बाहर आने की संभावना को रोका जा सके. इसी डर की वजह से जोसिया के पैर में ताला लगाने और बाद में उसकी गर्दन पर दरांती रखने की बात सामने आती है.
शोधकर्ताओं ने उसकी हड्डियों और दांतों की जांच की. इससे पता चला कि उसकी मौत हिंसा या किसी बीमारी की वजह से होने के स्पष्ट सबूत नहीं मिलते. यानी आज भी यह साफ नहीं है कि उस लड़की की मौत आखिर कैसे हुई थी. हालांकि, शोधकर्ताओं को लगता है कि उसके इलाके में उस समय अकाल या किसी वायरस जैसी बीमारी का प्रकोप हुआ होगा. संभव है कि ऐसी किसी घटना के लिए लोगों ने जोसिया को ही जिम्मेदार मान लिया हो और उसकी मौत के बाद उससे डरने लगे हों.
जोसिया के कंकाल की जांच में एक और बेहद दिलचस्प बात सामने आई. उसकी छाती के हिस्से में एक असामान्य शारीरिक बनावट के संकेत मिले. शोधकर्ताओं का मानना है कि यह शारीरिक समस्या उसे काफी दर्द देती रही होगी.
उस दौर में जब विज्ञान और चिकित्सा की जानकारी आज जैसी नहीं थी, तब शरीर में किसी असामान्य बदलाव को लोग आसानी से समझ नहीं पाते थे. ऐसी स्थिति में संभव है कि जोसिया की इस शारीरिक समस्या को लोगों ने किसी 'अलग शक्ति' या रहस्यमयी चीज से जोड़ दिया हो. यानी उसकी शारीरिक बनावट भी उस डर को बढ़ाने वाली वजह बनी हो सकती है.
जोसिया के बारे में एक और बात इस कहानी को और रहस्यमयी बनाती है.उसे जिस तरह से दफनाया गया था, उससे पता चलता है कि वह किसी साधारण गरीब परिवार से नहीं थी. वह रेशमी टोपी पहने हुए थी, जिस पर असली चांदी और सोने के धागों से सजावट थी.
उस समय ऐसे कपड़े और सामान आम लोगों की पहुंच से बाहर थे. इससे शोधकर्ताओं को लगता है कि जोसिया संभवतः किसी अमीर या कुलीन परिवार से ताल्लुक रखती थी. यानी एक तरफ लोग उससे इतना डर रहे थे कि उसकी कब्र को 'सुरक्षित' करने के लिए पैर में ताला लगा रहे थे और गर्दन पर दरांती रख रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उसके अंतिम संस्कार में महंगे कपड़े और सजावटी सामान का इस्तेमाल किया गया था.
डीएनए ने भी बताई एक अलग कहानी
जोसिया के डीएनए की जांच से पता चला कि उसका बहुत दूर का आनुवंशिक संबंध स्कैंडिनेविया के लोगों से था.हालांकि, दूसरे सबूत बताते हैं कि उसका बचपन और परवरिश संभवतः उसी इलाके में हुई थी, जहां उसकी कब्र मिली.
शोधकर्ताओं ने उसकी मौत का समय करीब 1600 के दशक के मध्य का बताया है. इसका मतलब है कि वह उस दौर में मरी, जब यूरोप के कुछ हिस्सों में मृतकों और 'वैंपायर' से जुड़े डर और अजीबोगरीब अंतिम संस्कार की मान्यताएं काफी मजबूत थीं.
आखिर पैर में ताला लगाने का रहस्य क्या था?
अब उस सवाल पर लौटते हैं, जिससे यह पूरी कहानी शुरू हुई थी. आखिर शव के पैर में ताला क्यों लगाया जाता था?. उस दौर के लोगों को डर था कि कुछ मृत लोग मरने के बाद दोबारा उठ सकते हैं. इसलिए शव को ऐसी चीजों से बांधने या रोकने की कोशिश की जाती थी, जिससे वह कब्र से बाहर न निकल सके.
जोसिया के मामले में पैर में लगाया गया ताला इसी तरह की मान्यता का हिस्सा माना जा रहा है. बाद में उसकी कब्र खोलकर गर्दन पर दरांती रखना इस डर को और साफ करता है. ऐसा इंतजाम इसलिए किया गया होगा ताकि अगर वह कथित तौर पर 'जिंदा' होकर उठे भी, तो कब्र से बाहर न आ सके. यानी यह किसी वैज्ञानिक प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था, बल्कि डर, अंधविश्वास और उस समय की मान्यताओं से जुड़ा तरीका था.