पाकिस्तान अपने आप में एक अलबेला देश है और यहां से आने वाली कुछ खबरें लोगों को हैरान कर देती हैं. ऐसी ही एक खबर इन दिनों चर्चा में है. इमरान खान के समर्थन में हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार कर लिया, जिसके दोनों बाजू नहीं हैं. उस पर पुलिस पर पत्थर फेंकने और डंडे बरसाने का आरोप लगा, लेकिन अदालत में मामला पहुंचा तो पूरा मामला ही पलट गया.
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 5 अगस्त को पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई के समर्थन में प्रदर्शन हुआ. इस दौरान पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें लतीफ उल्लाह सदोजई नाम का एक शख्स भी शामिल था, जिसके दोनों बाजू नहीं हैं. बाद में अदालत ने उसे मामले से डिस्चार्ज कर दिया.
इंडिपेंडेंट उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, थाना करपा में दर्ज FIR में पुलिस ने लतीफ उल्लाह सदोजई पर 5 अगस्त के प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंकने और डंडे बरसाने का आरोप लगाया. पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करने के बाद तीन दिन का फिजिकल रिमांड भी हासिल किया.
कोर्ट में क्या हुआ
मामला तब अजीब हो गया, जब उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट रिजवान-उद-दीन की अदालत में पेश किया गया. उनके वकील सरदार मारूफ एडवोकेट ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल के दोनों बाजू ही नहीं हैं. ऐसे में वह पुलिस पर पत्थर फेंकने और डंडे से हमला कैसे कर सकते हैं? सुनवाई के दौरान अदालत में लतीफ उल्लाह के दोनों बाजुओं का शारीरिक परीक्षण किया गया.
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लतीफ उल्लाह सदोजई ने इंडिपेंडेंट उर्दू से बातचीत में बताया कि वह 5 अगस्त के प्रदर्शन के बाद तलागंग लौट रहे थे. इसी दौरान पुलिस ने उनकी गाड़ी रोककर तलाशी ली और गाड़ी में मौजूद अन्य लोगों के साथ उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया. उन्होंने कहा कि जब उनके दोनों हाथ ही नहीं हैं तो वह पत्थरबाजी कैसे कर सकते थे. उनके मुताबिक, उन्होंने पुलिस को बार-बार अपनी शारीरिक स्थिति के बारे में बताया, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई.
अदालत में शारीरिक परीक्षण के बाद लतीफ उल्लाह के दोनों बाजू नहीं होने की पुष्टि हुई. इसके बाद अदालत ने उन्हें मामले से डिस्चार्ज कर दिया.
यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि जिस व्यक्ति के दोनों बाजू नहीं हैं, उस पर पुलिस ने पत्थरबाजी और डंडे से हमला करने का आरोप लगाया था. अदालत में उसके शारीरिक परीक्षण के बाद उसे मामले से डिस्चार्ज कर दिया गया. इंडिपेंडेंट उर्दू की रिपोर्ट में पुलिस के आरोप, अदालत की कार्यवाही और लतीफ उल्लाह का पक्ष सामने रखा गया है.