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नेपाल में उम्मीद की दीवार... जहां लापता हुए अपनों की तस्वीर लगा रहे लोग

नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक दीवार इन दिनों लोगों की उम्मीदों से भर गई है. ये उम्मीद है, बिछड़े हुए अपनों के मिल जाने की. लोग बाढ़ में लापता हुए अपने प्रियजनों की तस्वीरें इस दीवार पर इस उम्मीद में लगा रहे हैं कि अगर किसी को उनके लापता रिश्तेदार का कुछ पता चले तो परिवार तक सूचना पहुंच सके.

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नेपाल में आए फ्लैश फ्लड के बाद लापता हुए लोगों की खोज में उनकी तस्वीरें इस दीवार पर लगा रहे परिजन (Photo - Reuters)
नेपाल में आए फ्लैश फ्लड के बाद लापता हुए लोगों की खोज में उनकी तस्वीरें इस दीवार पर लगा रहे परिजन (Photo - Reuters)

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने हजारों परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. कई लोग बाढ़ और मलबे में बह गए और अब तक उनका कोई पता नहीं चल पाया है. ऐसे में राजधानी काठमांडू में एक दीवार इन परिवारों के लिए आखिरी उम्मीद बन गई है. 

इस दीवार पर लोग अपने उन परिजनों की तस्वीरें चिपका रहे हैं, जो बाढ़ के बाद से लापता हैं. किसी को उम्मीद है कि तस्वीर देखकर कोई उनके अपने के बारे में जानकारी देगा, तो कोई कम से कम अपने लापता परिजन का शव मिलने की आस लगाए बैठा है.

80 फीट लंबी दीवार पर लगीं सैकड़ों तस्वीरें
काठमांडू के टीयू टीचिंग हॉस्पिटल के बाहर करीब 25 मीटर यानी लगभग 80 फीट लंबी दीवार पर लापता लोगों की तस्वीरें लगाई गई हैं. तस्वीरें सिर्फ दीवार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अस्पताल के बाहर लगे खंभों तक चिपका दी गई हैं.

इन तस्वीरों में बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और युवा सभी शामिल हैं. नेपालियों के साथ-साथ कई विदेशी नागरिकों की तस्वीरें भी यहां लगी हैं. हर तस्वीर के पीछे एक परिवार की कहानी और किसी अपने के लौटने की उम्मीद छिपी है. इस भयावह आपदा के बाद करीब 4,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं. इनमें लगभग 4,000 नेपाल के लोग हैं, जबकि करीब 600 विदेशी नागरिक भी लापता हैं.

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भाई को खोजने अस्पताल पहुंचा शख्स
फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक, 46 साल के प्रकाश छेत्री भी इसी उम्मीद के साथ अस्पताल पहुंचे. उन्होंने अपने भाई की तस्वीर दीवार पर लगाई है. प्रकाश ने बताया कि उनका भाई नौ तीर्थयात्रियों को गोसाईंकुंड लेकर जा रहा था. बाढ़ के दौरान वाहन बह गया. उसमें सवार नौ लोगों में से सिर्फ एक व्यक्ति वाहन से कूदकर अपनी जान बचाने में कामयाब रहा. अब भी प्रकाश को अपने भाई के जिंदा होने की उम्मीद है. इसी उम्मीद में उन्होंने उसकी तस्वीर दीवार पर लगा दी.

नेपाल में बाढ़
इस दीवार पर अपनों की तस्वीर चिपकाते लोगों में अब भी बची है फिर से मिलने की उम्मीद               (Photo - Reuters)

किसी की मां, तो किसी की बेटी लापता
इस 'उम्मीद की दीवार' पर लगी तस्वीरों को देखें तो हर फोटो के पीछे एक अलग कहानी है. कहीं 30 साल की महिला की तस्वीर है, तो उसके पास 35 साल की दूसरी महिला और उसकी आठ साल की बेटी की फोटो लगी है. कहीं युवा पुरुषों की तस्वीरें हैं, तो किसी फोटो में एक बुजुर्ग महिला ऊनी टोपी पहने अपनी छोटी बच्ची के साथ नजर आ रही है. इन तस्वीरों में शेरपा समुदाय के एक युवक की फोटो भी है. वह चश्मा और स्पोर्ट्स जैकेट पहने हुए था, जब वह लापता हुआ.

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'अब जिंदा होने की उम्मीद नहीं, शव की तलाश है'
58 साल के ड्राइवर देबू सापकोटा भी अस्पताल पहुंचे हुए थे. उन्होंने अपनी 83 साल की सास और पोती की तस्वीरें दीवार पर लगाईं. दोनों पिछले हफ्ते आई बाढ़ में त्रिशूली बाजार में बह गई थीं. देबू ने बताया कि बाढ़ की चेतावनी तो जारी हुई थी, लेकिन उनकी बुजुर्ग सास इतनी उम्रदराज थीं कि वह भाग नहीं सकती थीं. उनकी पोती उन्हें बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन दोनों पानी के तेज बहाव में बह गईं.

देबू कहते हैं कि अब उन्हें उनके जिंदा बचने की कोई उम्मीद नहीं है. वह सिर्फ उनका शव मिलने की उम्मीद लेकर अस्पताल आए हैं. उन्होंने दोनों की तस्वीरें हाथ में पकड़ रखी थीं, जिसमें वे पारंपरिक कपड़े पहने नजर आ रही थीं.

विदेशी पर्यटकों की तस्वीरें भी दीवार पर चिपकी
दीवार पर सिर्फ नेपाली नागरिकों की तस्वीरें नहीं हैं. नेपाल में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कई चीनी मजदूरों और इंजीनियरों की तस्वीरें भी यहां लगाई गई हैं. एक चीनी व्यापारी की तस्वीर भी है, जो रसुवा सीमा के रास्ते सामान लेकर आता था.

इसके अलावा भारतीय तीर्थयात्रियों की तस्वीरें भी लगी हैं. ये लोग तिब्बत स्थित पवित्र कैलाश पर्वत की यात्रा पर निकले थे. एक अमेरिकी पर्यटक की तस्वीर भी इस दीवार पर मौजूद है.

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दीवार के सामने लगातार लोगों की भीड़ जुट रही है. कई लोग वहां लगी तस्वीरों और लापता लोगों के चेहरों को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर रहे हैं. शायद किसी तस्वीर को देखकर किसी को अपने लापता रिश्तेदार के बारे में कोई सुराग मिल जाए.

मुर्दाघर के पास भी लगी हैं शवों की तस्वीरें
अस्पताल के मुर्दाघर के पास उन लोगों की तस्वीरें भी लगाई गई हैं, जिनके शव बाढ़ और कीचड़ से बरामद किए गए हैं. शवों की हालत बेहद खराब है. कई शवों के चेहरे पानी में रहने की वजह से सूज गए हैं. इसके बावजूद परिवार पहचान की उम्मीद नहीं छोड़ रहे.

20 साल की राज कुमारी तमांग भी अपने पिता की तलाश में मुर्दाघर पहुंचीं. उनके पिता मोती लाल तमांग बिजली का बिल जमा करने के लिए त्रिशूली बाजार गए थे, लेकिन वापस नहीं लौटे.

यह भी पढ़ें: नेपाल में सैकड़ों लाशों को जलाने की जगह दफनाया क्यों जा रहा है? ये है इसकी वजह

राज कुमारी के मुताबिक, उनके पिता के फोन की लोकेशन आखिरी बार त्रिशूली पुल के पास मिली थी. यह वही पुल है, जिसे बाढ़ अपने साथ बहा ले गई. वह कहती हैं,मुझे नहीं पता कि उनके साथ क्या हुआ.

ऑनलाइन भी जारी है अपनों की तलाश
लापता लोगों की तलाश सिर्फ अस्पताल या इस दीवार तक सीमित नहीं है. नेपाल सरकार ने एक वेबसाइट पर बाढ़ में बचे लोगों और लापता लोगों से जुड़ी जानकारी जुटाने की व्यवस्था की है. लोग वहां भी अपने परिजनों की तलाश कर रहे हैं और मदद की अपील कर रहे हैं.

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एक संदेश में किसी व्यक्ति ने लिखा कि उन्होंने एक वीडियो देखा, जिसमें एक बच्चा कीचड़ से निकलने के लिए संघर्ष कर रहा था. उन्हें वह बच्चा अपने भतीजे जैसा लगा. ऐसे मैसेज बताते हैं कि इस आपदा के बाद लोगों के लिए हर तस्वीर, हर वीडियो और हर छोटी-सी जानकारी कितनी अहम हो गई है.

काठमांडू की यह दीवार सिर्फ तस्वीरों से भरी दीवार नहीं है. यह उन हजारों परिवारों की उम्मीद है, जो बाढ़ में अपने अपनों को खोने के बाद भी किसी खबर का इंतजार कर रहे हैं. किसी को अपने परिजन के जिंदा होने की उम्मीद है, तो कोई कम से कम उनका अंतिम पता लगाने की कोशिश में जुटा है.

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