scorecardresearch
 

चम्मच का ऐसा डिजाइन कभी नहीं देखा होगा, Shark Tank में भारतीय को मिले ₹3 करोड़

रसोई में रखे छह अलग-अलग चम्मचों की जगह अगर सिर्फ दो चम्मच आपका पूरा काम कर दें तो कैसा रहेगा? भारतीय डिजाइनर राहुल अग्रवाल ने कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है.

Advertisement
X
 राहुल अग्रवाल ‘पॉलीगॉन्स डिजाइन’ के फाउंडर हैं. (Photos: YouTube/Shark Tank USA)
राहुल अग्रवाल ‘पॉलीगॉन्स डिजाइन’ के फाउंडर हैं. (Photos: YouTube/Shark Tank USA)

रसोई में इस्तेमाल होने वाला चम्मच आमतौर पर ऐसा सामान है, जिसके डिजाइन को लेकर कोई ज्यादा नहीं सोचता. लेकिन भारतीय डिजाइनर राहुल अग्रवाल ने इसी रोजमर्रा की चीज को कुछ इस तरह बदल दिया कि अमेरिका के मशहूर बिजनेस रियलिटी शो ‘शार्क टैंक यूएसए’ में निवेशकों ने उनके आइडिया पर करीब ₹3 करोड़ लगाने का फैसला कर लिया.

राहुल अग्रवाल ‘पॉलीगॉन्स डिजाइन’ के फाउंडर हैं. उन्होंने ऐसा मेजरिंग स्पून तैयार किया है, जो इस्तेमाल न होने पर बिल्कुल सपाट हो जाता है. खास बात यह है कि जहां आमतौर पर छह अलग-अलग मेजरिंग स्पून रखने पड़ते हैं, वहीं पॉलीगॉन्स के सिर्फ दो फोल्डेबल टूल्स कई अलग-अलग मेजरमेंट का काम कर देते हैं.

राहुल के इस आइडिया ने ‘शार्क टैंक’ के सीजन 18, एपिसोड 4 में निवेशकों का ध्यान खींचा. शो में इन्वेस्टर लॉरी ग्रीनर और गेस्ट शार्क मिंडी कलिंग ने मिलकर उन्हें 3.5 लाख डॉलर यानी करीब ₹3 करोड़ का ऑफर दिया. यह रकम कंपनी में 8 फीसदी इक्विटी और अतिरिक्त 2 फीसदी एडवाइजरी शेयर के बदले दी गई. यानी कुल 10 फीसदी हिस्सेदारी के आधार पर कंपनी की वैल्यूएशन करीब 3.5 मिलियन डॉलर यानी लगभग ₹29 करोड़ आंकी गई.

Advertisement

आखिर कैसे काम करता है ये अनोखा चम्मच?

पॉलीगॉन्स को देखकर पहली नजर में यह किसी पतली पट्टी जैसा लग सकता है. लेकिन इसके अलग-अलग हिस्सों पर दिए गए मार्क्स पर इसे पिंच करने से यह जरूरत के हिसाब से स्पून का आकार ले लेता है.

बड़ा स्पून आधा टेबलस्पून, एक टेबलस्पून और दो टेबलस्पून की मेजरमेंट दे सकता है. वहीं छोटा स्पून एक चौथाई टीस्पून, आधा टीस्पून और एक टीस्पून के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस तरह दो टूल्स मिलकर छह पारंपरिक मेजरिंग स्पून का काम करते हैं.

सबसे खास बात इसकी मोटाई है. फ्लैटन करने पर प्रत्येक स्पून सिर्फ 2.8 मिलीमीटर मोटा रह जाता है. इसमें फूड-ग्रेड थर्मोप्लास्टिक, हाइड्रोफोबिक सिलिकॉन और एम्बेडेड नियोडिमियम मैग्नेट का इस्तेमाल किया गया है. मैग्नेट की मदद से इसे फ्रिज पर भी लगाया जा सकता है.

2014 में आया था आइडिया

राहुल अग्रवाल ने इस डिजाइन का शुरुआती कॉन्सेप्ट 2014 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन, अहमदाबाद में पढ़ाई के दौरान तैयार किया था. एक सीनियर ने उन्हें कहा था कि स्पून ऐसा सामान है, जिसका डिजाइन लगभग अपने अंतिम रूप तक पहुंच चुका है. राहुल ने इसी बात को चैलेंज की तरह लिया.

उन्होंने एक फ्लैट शीट को अलग-अलग जगह से फोल्ड करके प्रिसाइज मेजरमेंट वाला स्पून बनाने का कॉन्सेप्ट तैयार किया. लेकिन आइडिया से लेकर बाजार में बिकने वाले प्रोडक्ट तक पहुंचने में कई साल लग गए.

Advertisement

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने करीब तीन साल तक डेवलपमेंट किया, सात मैन्युफैक्चरर्स बदले और मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को तैयार करने के लिए कई बार चीन की यात्रा की.

इस प्रोडक्ट को अब तक 20 से ज्यादा इंटरनेशनल डिजाइन अवॉर्ड भी मिल चुके हैं. कंपनी के मुताबिक, इसके 2 लाख से ज्यादा यूनिट्स 110 से अधिक देशों में बिक चुके हैं.

मिंडी कलिंग ने क्या कहा?

राहुल के पिच से मिंडी कलिंग काफी प्रभावित हुईं. उन्होंने प्रोडक्ट को ‘रियली इंजेनियस’ और ‘वेरी यूजफुल’ बताया. कलिंग ने यह भी कहा कि उन्हें इसका इस्तेमाल करना पसंद आएगा, खासकर इसलिए क्योंकि यह सामान्य मेजरिंग स्पून की तरह ड्रॉअर में ज्यादा जगह नहीं घेरता.

राहुल का यह आइडिया इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें कोई बेहद जटिल टेक्नोलॉजी नहीं है. उन्होंने एक ऐसी चीज को फिर से डिजाइन किया, जिसका इस्तेमाल दुनिया भर की रसोइयों में रोज होता है. इसी सिंपल लेकिन प्रैक्टिकल आइडिया ने उन्हें शार्क टैंक तक पहुंचाया और अब उनका फोल्डेबल स्पून चर्चा में है

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement