अमेरिका के एक एयरपोर्ट की तस्वीर इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. तस्वीर में भारत जाने वाली फ्लाइट के डिपार्चर गेट के पास दर्जनों यात्री व्हीलचेयर पर बैठे नजर आ रहे हैं. इस तस्वीर ने व्हीलचेयर सहायता सेवा के इस्तेमाल और इसके संभावित दुरुपयोग को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद
यह तस्वीर X पर 'ये तो हद हो गई' कैप्शन के साथ शेयर की गई थी, जो कुछ ही घंटों में 30 लाख से ज्यादा व्यूज बटोर चुकी है. कैप्शन में दावा किया गया है कि फोटो में ज्यादातर यात्री भारतीय हैं. इनमें कई बुजुर्ग हैं, लेकिन कुछ मिडिल एज और युवा यात्री भी दिख रहे हैं.
ट्रैवल कमेंटेटर प्रियेश शर्मा ने इस तस्वीर पर प्रतिक्रिया देते हुए X पर लिखा, ये मामला बड़ा तूल पकड़ेगा! इसकी भारी कीमत हमारे लोगों को चुकानी पड़ेगी. दुरुपयोग साफ नजर आ रहा है और पूरी दुनिया यह देख रही है. उन्होंने आगे सुझाव दिया कि जिन यात्रियों को एयरपोर्ट पर लंबी दूरी चलने में दिक्कत होती है, वे एयरपोर्ट नेविगेशन सहायता, डायरेक्ट फ्लाइट या पेड मीट-एंड-ग्रीट सर्विस जैसे विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं.एक अन्य यूजर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा-बस इस पर कुछ डॉलर का शुल्क लगा दो... फिर ये सभी खुशी-खुशी चलने लगेंगे.
Air India ने इस मुद्दे पर क्या कहा था
यह पहली बार नहीं है जब यह मुद्दा उठा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत-अमेरिका रूट पर करीब 30 फीसदी यात्री व्हीलचेयर की मांग करते हैं, जबकि इनमें से कई यात्रियों को वास्तव में इसकी जरूरत नहीं होती. एयरलाइंस को हर महीने 1 लाख से ज्यादा व्हीलचेयर रिक्वेस्ट मिलती हैं, जिससे स्टाफ और संसाधनों पर भारी दबाव पड़ता है. इसी वजह से एयर इंडिया को भी इस मसले पर सफाई जारी करनी पड़ी थी.
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क्या हर यात्री सच में चल नहीं सकता?
बहस का दूसरा पहलू भी उतना ही अहम है. एयरलाइंस और एयरपोर्ट आमतौर पर व्हीलचेयर सहायता मुफ्त देते हैं और यह सेवा सिर्फ उन्हीं लोगों के लिए नहीं होती जो बिल्कुल चल नहीं सकते. कई यात्री कम दूरी तक चल सकते हैं, लेकिन बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स, जैसे न्यूयॉर्क, JFK, शिकागो या दिल्ली में चेक-इन से बोर्डिंग गेट तक की लंबी दूरी तय करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.
एक X यूजर मलय कृष्णा ने इस पहलू पर लिखा कि अमेरिका-भारत रूट पर बड़ी संख्या में बुजुर्ग यात्री सफर करते हैं, जो या तो अपने बच्चों से मिलने जा रहे होते हैं या लंबे प्रवास के बाद भारत लौट रहे होते हैं. ऐसे यात्रियों के लिए किसी बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट को पार करना शारीरिक रूप से थका देने वाला अनुभव हो सकता है.
वहीं, दूसरी तरफ कुछ यूजर्स ने यह भी माना कि कई एयरपोर्ट्स पर साइनबोर्ड और नेविगेशन समझना मुश्किल हो सकता है, जिसकी वजह से कुछ यात्री वास्तविक जरूरत न होने पर भी व्हीलचेयर मांग लेते हैं.
असली जरूरत बनाम सुविधा, कहां है लाइन?
यही सवाल इस पूरे विवाद के केंद्र में है. आलोचकों का कहना है कि परिवार कई बार अपने सक्षम रिश्तेदारों के लिए भी व्हीलचेयर मांग लेते हैं, ताकि उन्हें छोटी कतार या प्राथमिकता वाली बोर्डिंग मिल सके. उनका तर्क है कि इससे सीमित स्टाफ और संसाधनों पर दबाव बढ़ता है और असली जरूरतमंद यात्रियों को नुकसान हो सकता है.