
ओटीटी के ज़माने में आसपास किसी से भी पूछेंगे, तो मालूम चलेगा हर दूसरा या तीसरा इंसान इस वक्त K-ड्रामा देख रहा है. यानी कोरियन ड्रामा. भरपूर लव स्टोरीज़, थ्रिलर, सस्पेंस से जुड़ी कहानियां. के-ड्रामा अब उस लेवल पर पहुंच चुका है, जहां उसपर बात करने के लिए ग्रुप्स बन चुके हैं और अगर आप के-ड्रामा नहीं देखते हैं तो एक ग्रुप में एक्सेस से आप दूर हैं.
लेकिन कमाल देखिए, दुनिया को के-ड्रामा के फेर में फंसाने वाला दक्षिण कोरिया एक अलग ही ट्रेंड पर चल पड़ा है. एक रिपोर्ट सामने आई है, जो बता रही है कि दक्षिण कोरिया के युवा आजकल रील्स या के-ड्रामा नहीं, बल्कि किताबें पढ़ रहे हैं. इस ट्रेंड को टेक्स्टहिप (Texthip) कहा जा रहा है, जिसने युवाओं के बीच पढ़ने को सांस्कृतिक हैसियत की पहचान बना दिया है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिण कोरिया में पढ़ने की आदत अप्रत्याशित रूप से वापसी कर रही है. सियोल के मध्य इलाके में लोग सार्वजनिक जलमार्गों के किनारे और दूसरी खुली जगहों पर किताबें पढ़ते नजर आ रहे हैं.

यह बदलाव ऐसे समय में दिख रहा है, जब दुनिया भर में पढ़ने की दर घट रही है. दक्षिण कोरिया में वयस्कों की पढ़ने की दर गिरकर 38.5% हो गई है. हालांकि, युवा पाठकों का रुख इसके उलट है. रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल जेन ज़ी के बीच पढ़ने की दर बढ़कर 75% से ज्यादा हो गई.
किताबों में बढ़ती दिलचस्पी अब सिर्फ किताबों की दुकानों और पुस्तकालयों तक सीमित नहीं है. मिल्क क्रीम बन सहित किताबों की थीम वाले उत्पाद भी इस चलन का हिस्सा बन रहे हैं. पढ़ने को फैशन की तरह भी देखा जा रहा है और किताबें युवाओं के लिए अपनी पसंद और पहचान जाहिर करने का जरिया बन रही हैं.
रिपोर्ट में युवाओं के उत्साह को इस रुझान की सबसे बड़ी ताकत बताया गया है. उनकी बढ़ती दिलचस्पी से किताबों को नई अहमियत मिल रही है. युवा आमने-सामने होने वाले पुस्तक समूहों में भी शामिल हो रहे हैं.

दक्षिण कोरियाई लेखिका हान कांग को मिले 2024 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार से देश के साहित्य जगत को बड़ा बढ़ावा मिला. पुरस्कार की घोषणा के बाद एक हफ्ते में उनकी किताबों की करीब एक मिलियन प्रतियां बिकीं. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक युवाओं में पढ़ने की बढ़ती लोकप्रियता किसी एक लेखक की सफलता तक सीमित नहीं है.
सरकार भी सार्वजनिक पठन पहलों के जरिए लोगों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. दक्षिण कोरिया में करीब 300 खुले पुस्तकालय हैं, जहां सार्वजनिक जगहों पर लोगों को किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं. इनमें से कुछ जगहों पर मुफ्त किताबें दी जाती हैं और लोगों को खुले में पढ़ने के लिए बढ़ावा दिया जाता है.
छोटे वीडियो और सोशल मीडिया की लोकप्रियता अब भी युवाओं के सामग्री देखने के तरीके को प्रभावित कर रही है. इसके बीच दक्षिण कोरिया का टेक्स्टहिप रुझान एक अलग तस्वीर पेश करता है. तस्वीर का श्रेय अनस्प्लैश पर लोडिसी बेल को दिया गया है.