अमेरिका जाकर जॉब करना कई भारतीयों का सपना होता है. लेकिन वहां मोटी सैलरी मिलने के बावजूद पैसा बचाना इतना आसान नहीं होता. घर का किराया, इंश्योरेंस, टैक्स, कार और रोजमर्रा के खर्च मिलकर अच्छी-खासी कमाई का बड़ा हिस्सा ले जाते हैं. ऐसे में अमेरिका में रहने वाले एक भारतीय ने बताया है कि आखिर उसने इस महंगी जिंदगी के बीच मिलियनेयर बनने का सफर कैसे तय किया.
H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले प्रितेश जगानी ने अपनी फाइनेंशियल जर्नी सोशल मीडिया पर शेयर की. उन्होंने बताया कि उनकी वेल्थ किसी एक बड़े इन्वेस्टमेंट या अचानक मिले पैसे से नहीं बनती. इसके पीछे कई सालों की प्लानिंग, खर्चों पर कंट्रोल और अपनी इनकम बढ़ाने की कोशिश रही.
अमेरिका में कमाई ज्यादा, खर्च भी कम नहीं
अमेरिका में भारतीय प्रोफेशनल्स की सैलरी भारत के मुकाबले काफी ज्यादा हो सकती है. वहां रहने का खर्च भी उतना ही बड़ा है. किराया, कार, हेल्थ इंश्योरेंस, टैक्स और दूसरे खर्च हर महीने बड़ा अमाउंट खा सकते हैं.प्रितेश ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले अपने खर्चों को समझा और एक ऐसा बजट बनाया, जिसे लंबे समय तक फॉलो किया जा सके.
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नौकरी बदली तो बढ़ गई इनकम
उनकी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा जॉब स्विच है. प्रितेश के मुताबिक, सिर्फ खर्च कम करने पर ध्यान देने के बजाय उन्होंने अपनी कमाई बढ़ाने पर फोकस किया.उन्होंने नई स्किल्स सीखीं और बेहतर सैलरी वाली जॉब के लिए रणनीतिक तरीके से जॉब स्विच किए. इससे उनकी इनकम बढ़ती गई.अमेरिका में ज्यादा कमाने के बाद सिर्फ ज्यादा खर्च करने के बजाय उन्होंने बढ़ी हुई इनकम के एक हिस्से को सेव और इन्वेस्ट करना जारी रखा.
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पहले इमरजेंसी फंड, फिर बाकी प्लानिंग
प्रितेश ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 3 से 6 महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड बनाया. इसके बाद हाई-इंटरेस्ट डेट को कम करने और अपनी सेविंग्स को व्यवस्थित करने पर ध्यान दिया.उन्होंने क्रेडिट, हेल्थ इंश्योरेंस और टैक्स से जुड़े फाइनेंशियल फैसलों को भी समझने की कोशिश की.
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अमेरिका में रहने वालों के लिए सबसे बड़ी सीख
प्रितेश की कहानी में एक और बात सामने आती है- अमेरिका में सैलरी बढ़ने के साथ अगर लाइफस्टाइल भी लगातार महंगी होती जाए तो ज्यादा कमाई का फायदा कम हो सकता है.उन्होंने लाइफस्टाइल इंफ्लेशन से बचने की कोशिश की. यानी कमाई बढ़ने के साथ हर चीज पर खर्च बढ़ाने के बजाय सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट पर भी ध्यान दिया.
उनके मुताबिक, वेल्थ बनाने का कोई शॉर्टकट नहीं था. उन्होंने अपनी इनकम बढ़ाई, खर्चों को कंट्रोल किया और लंबे समय तक फाइनेंशियल डिसिप्लिन बनाए रखा.
अमेरिका में भारतीयों के बीच क्यों चर्चा में है यह कहानी?
अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि H-1B वीजा पर जाने के बाद ज्यादा सैलरी मिलना ही पूरी कहानी नहीं होती. वहां असली चुनौती होती है- महंगी जिंदगी के बीच पैसा बचाना और भविष्य के लिए वेल्थ बनाना.
प्रितेश की कहानी इसी बात को दिखाती है कि ज्यादा कमाई के साथ अगर खर्च और लाइफस्टाइल पर भी कंट्रोल रखा जाए तो लंबे समय में बड़ा फाइनेंशियल फंड बनाया जा सकता है.
हालांकि, यह प्रितेश जगानी का व्यक्तिगत अनुभव है. हर H-1B वीजा होल्डर की सैलरी, टैक्स, किराया, परिवार और खर्च अलग-अलग होते हैं.