scorecardresearch
 

'मैं जिंदा जल रही हूं...', लड़की ने डॉक्टर से कहा- प्लीज मेरे पैर काट दो

एक लड़की के पैर में इतनी ज्यादा दर्द होती थी. जैसे लगता था कि उसे जिंदा जलाया जा रहा हो. आखिर उसने डॉक्टर से रिक्वेस्ट किया कि उसका पैर काट दिया जाए.

Advertisement
X
दर्द से छुटकारा पाने के लिए लड़की को कटवाना पड़ा पैर (Photo - AI Generated)
दर्द से छुटकारा पाने के लिए लड़की को कटवाना पड़ा पैर (Photo - AI Generated)

पैर में ऐसा दर्द हो कि हर पल लगे शरीर के अंदर आग जल रही है. कभी ऐसा महसूस हो जैसे पैर को चाकू से गोदा जा रहा हो, तो कभी बिजली का करंट दौड़ रहा हो. दर्द इतना ज्यादा कि घर से निकलना तो दूर, जूता और मोजा पहनना भी मुश्किल हो जाए. ब्रिटेन की 20 साल की जेस बर्किनशॉ ने ऐसी ही जिंदगी कई साल तक झेली.

आखिरकार दर्द से परेशान होकर जेस ने डॉक्टरों से कहा कि उनका पैर काट दिया जाए. यह फैसला सुनने में भले ही बेहद चौंकाने वाला लगे, लेकिन जेस लिए यह अपनी जिंदगी वापस पाने की कोशिश थी.

बचपन से ही बीमारी से जूझ रही थीं जेस
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, जेस इंग्लैंड के लीड्स की रहने वाली हैं. उन्हें महज 16 महीने की उम्र में जुवेनाइल इडियोपैथिक आर्थराइटिस (JIA) हो गया था. यह बच्चों में होने वाला गठिया का एक प्रकार है.

इस बीमारी के कारण उनके जोड़ों में सूजन रहती थी. बुखार आता था और काफी तेज दर्द होता था. एक समय ऐसा भी आया, जब जेस ने चलना और रेंगना तक छोड़ दिया था. लेकिन मुश्किल वक्त यहीं खत्म नहीं हुआ.

जब जेस करीब 15 साल की थीं, तब उनके दाहिने टखने का दर्द अचानक बहुत ज्यादा बढ़ गया. उन्हें लगा कि शायद गठिया का दर्द फिर से बढ़ गया है. लेकिन जांच के बाद पता चला कि मामला कुछ और था.

Advertisement

डॉक्टरों ने बताया- CRPS है
जेस को कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम (CRPS) था. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर के किसी हिस्से में चोट या नसों को नुकसान होने के बाद लंबे समय तक बहुत तेज दर्द बना रह सकता है.

जेस के लिए यह दर्द इतना भयानक था कि वह इसकी तुलना कभी जलने से करती थीं तो कभी बर्फीले पानी में फेंके जाने से.उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा लगता था जैसे वह 'जिंदा जल रही हैं' और अगले ही पल ऐसा महसूस होता था जैसे उन्हें बर्फ के पानी से भरे टब में डाल दिया गया हो.

जेस के मुताबिक, उनका दर्द रोजाना 1 से 10 के पैमाने पर 7 से नीचे नहीं जाता था. वह कहती हैं कि उनके पैर में ऐसा लगता था जैसे वह पूरी तरह चोटिल हो चुका है. लगातार ऐसा महसूस होता था जैसे कोई चाकू मार रहा हो, आग में जला रहा हो या बिजली का झटका दे रहा हो.

दर्द ने पढ़ाई और पूरी जिंदगी बदल दी
लगातार रहने वाले इस दर्द का असर जेस की पढ़ाई और सोशल लाइफ पर भी पड़ा. दर्द इतना ज्यादा था कि उन्होंने अपने एग्जाम घर से दिए. स्कूल के आखिरी साल में वह आधे से ज्यादा समय स्कूल नहीं जा सकीं.

Advertisement

दोस्तों से मिलना-जुलना भी कम हो गया. जेस के लिए सबसे बड़ी परेशानी घर से बाहर निकलना था. वह CRPS की वजह से मोजा और जूता तक नहीं पहन पाती थीं. सर्दियों में ठंड उनके पैर के दर्द को और बढ़ा देती थी. ऐसे में बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता था. जेस बताती हैं कि उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर वह था जब वह लगातार आठ महीने तक घर से बाहर नहीं निकल सकीं. वह ज्यादातर समय अपने कमरे में ही रहती थीं.

दवाइयों ने भी बढ़ाई मुश्किल
दर्द कम करने के लिए जेस ने कई तरह की दवाइयां लीं. लेकिन लगातार दर्द, नींद की कमी और दवाओं के असर ने उनकी मानसिक हालत पर भी गहरा असर डाला. वह डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझने लगीं. उन्होंने यह भी बताया कि दवाओं और लगातार नींद पूरी न होने की वजह से उन्हें कई बार हैलुसिनेशन यानी ऐसी चीजें महसूस या दिखाई देने लगीं, जो वास्तव में मौजूद नहीं थीं.

जेस ने दर्द को कम करने के लिए अलग-अलग इलाज भी आजमाए. उनके टखने की सर्जरी हुई और स्पाइनल कॉर्ड स्टिमुलेटर का ट्रायल भी किया गया. लेकिन इन कोशिशों से वह राहत नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी.

दो साल तक डॉक्टरों से चर्चा, फिर लिया बड़ा फैसला
जब बाकी इलाज काम नहीं आए तो जेस और डॉक्टरों के बीच पैर काटने यानी अम्प्यूटेशन को लेकर चर्चा शुरू हुई. यह कोई ऐसा फैसला नहीं था जो उन्होंने अचानक ले लिया हो. डॉक्टरों से इस बारे में दो साल से ज्यादा समय तक बातचीत होती रही.

Advertisement

जेस ने तीन अलग-अलग सर्जनों से सलाह ली. इनमें से दो डॉक्टर इस प्रक्रिया के पक्ष में थे, जबकि एक डॉक्टर ज्यादा सावधानी बरतने की राय में था.जेस की उम्र सिर्फ 20 साल थी और CRPS के मामले में अम्प्यूटेशन के बाद दर्द पूरी तरह खत्म होगा, इसकी कोई गारंटी नहीं थी. लेकिन जेस का दर्द इतना ज्यादा था कि उन्होंने जोखिम उठाने का फैसला किया.

अप्रैल में कटवाया दाहिना पैर
आखिरकार इस साल अप्रैल में जेस की दाहिनी टांग का अम्प्यूटेशन किया गया. जेस को पता था कि ऑपरेशन के बाद भी दर्द रह सकता है. लेकिन उनका कहना था कि वह पहले से ही इतनी तकलीफ में थीं कि उन्हें लगा कि उनके पास खोने के लिए बहुत कम और जिंदगी बेहतर होने की उम्मीद ज्यादा है.

वह कहती हैं कि जब उनका नाम अम्प्यूटेशन की वेटिंग लिस्ट में आया तो उन्हें राहत महसूस हुई. उनके सामने दो ही संभावनाएं थीं या तो दर्द पहले जैसा ही बना रहता या फिर ऑपरेशन के बाद जिंदगी बेहतर हो सकती थी. जेस ने दूसरा रास्ता चुना.

अब पहले से कम दर्द, ज्यादा आजादी
ऑपरेशन के बाद जेस को तुरंत पूरी राहत नहीं मिली. उनका ट्रीटमेंट टारगेटेड मसल रिइनर्वेशन के साथ हुआ था. इसकी वजह से शुरुआती करीब एक महीने में नसें काफी संवेदनशील थीं. करीब दो महीने बाद उन्हें दर्द में राहत महसूस होने लगी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: टाइल्स लगाने के लिए जमीन खोदी तो आवाज आई... नीचे देखा तो मिला 1000 साल पुराना खजाना!

अब जेस कहती हैं कि उनकी जिंदगी पहले से काफी बेहतर है. वह घर से ज्यादा बाहर निकल पा रही हैं, खुद को ज्यादा स्वतंत्र महसूस करती हैं और उनकी नींद भी पहले से बेहतर हुई है. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्हें लगता है कि वह फिर से खुद जैसी महसूस करने लगी हैं.

अभी प्रोस्थेटिक पैर का इंतजार
फिलहाल जेस प्रोस्थेटिक पैर का इस्तेमाल नहीं कर रही हैं. हालांकि पिछले हफ्ते उनके लिए प्रोस्थेटिक बनाने के लिए कास्ट तैयार किया गया है.इस बीच वह फिजियोथेरेपिस्ट के साथ लगातार एक्सरसाइज कर रही हैं.

यह भी पढ़ें: यूरीन से आया ब्लड... स्कैन करवाया तो शख्स के ब्लैडर में दिखी ये खतरनाक चीज!

वह एक रिहैबिलिटेशन डिवाइस का भी इस्तेमाल करती हैं. यह डिवाइस पैर कटने के बाद लोगों को प्रोस्थेटिक मिलने से पहले चलने की प्रैक्टिस करने में मदद करता है. अब जेस सोशल मीडिया के जरिए अपनी कहानी भी लोगों तक पहुंचा रही हैं. वह दिव्यांगता, एक्सेसिबिलिटी और लंबे समय तक रहने वाले दर्द के बारे में लोगों को जागरूक करती हैं.

जेस के लिए पैर कटवाना आसान फैसला नहीं था, लेकिन वह अब इस फैसले को लेकर बिल्कुल स्पष्ट हैं. उनका कहना है कि अगर किसी इंसान को 24 घंटे लगातार असहनीय दर्द सहना पड़े, तभी वह समझ सकता है कि ऐसी स्थिति में दर्द को थोड़ा कम करने के लिए भी कोई व्यक्ति किस हद तक जाने को तैयार हो सकता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें: क्यों यहां कदम नहीं रखते इंसान... जहां मिट्टी पकड़ लेती है पांव! लाश भी कई दिनों बाद मिलती है

जेस कहती हैं कि उन्हें अपने सर्जन पर पूरा भरोसा था और उन्हें लगता था कि यही आगे बढ़ने का सही रास्ता है. उनके दोस्त और परिवार भी इस फैसले में उनके साथ थे. उन्होंने देखा था कि जेस किस तरह लगातार दर्द में जिंदगी जी रही थीं. अब जेस के लिए पैर खोना उनकी जिंदगी का अंत नहीं, बल्कि दर्द से बाहर निकलकर अपनी जिंदगी को दोबारा जीने की शुरुआत है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement