दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे वकीलों से मारपीट के मामले में CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है. मामला 20-21 अगस्त की रात दिल्ली स्थित BCI परिसर का है. कोर्ट ने कहा कि वकीलों को पहले संबंधित DCP के पास शिकायत करनी चाहिए थी. वहां से कार्रवाई न होने पर मजिस्ट्रेट की अदालत का रुख किया जा सकता था.
जस्टिस गिरिश कठपालिया ने कहा कि याचिका अपने मौजूदा रूप में सुनवाई योग्य नहीं है. अदालत के मुताबिक, शिकायत लेकर पहले पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी के पास जाना जरूरी था. अगर वहां से मदद नहीं मिलती, तो कानून में मजिस्ट्रेट के पास जाने का रास्ता भी मौजूद था. वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि BCI चेयरमैन सत्तारूढ़ पार्टी से सांसद हैं, इसलिए दिल्ली पुलिस से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है. इसी आधार पर CBI से जांच कराने की मांग की गई थी. कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.
'दिल्ली पुलिस पर अविश्वास का ठोस आधार नहीं'
हाईकोर्ट ने कहा कि दिल्ली पुलिस पर अविश्वास जताने के लिए कोई ठोस वजह नहीं बताई गई. सिर्फ किसी व्यक्ति के सत्तारूढ़ दल से जुड़े होने के आधार पर पूरी पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाना सही नहीं है. अदालत ने यह भी कहा कि CBI खुद एक सरकारी एजेंसी है, इसलिए केवल दिल्ली पुलिस की जगह CBI से जांच मांगना पर्याप्त आधार नहीं हो सकता. इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी कहा कि शिकायत में पहली नजर में ऐसा संज्ञेय अपराध साफ तौर पर सामने नहीं आता, जिसके आधार पर हाईकोर्ट सीधे जांच का आदेश दे.
अदालत ने साफ किया कि शिकायत करने के लिए कानूनी रास्ता पहले से मौजूद है. वकील संबंधित DCP से संपर्क कर सकते थे. अगर वहां कार्रवाई नहीं होती, तो मजिस्ट्रेट की अदालत में शिकायत दाखिल की जा सकती थी. कोर्ट ने सरकारी संस्थाओं पर बिना ठोस आधार के व्यापक आरोप लगाने से भी बचने को कहा. उसके मुताबिक, ऐसे आरोप आम लोगों के बीच सरकारी व्यवस्था को लेकर अविश्वास बढ़ा सकते हैं.
यह मामला उन वकीलों की याचिका से जुड़ा था, जिन्होंने BCI परिसर में 20-21 अगस्त की रात कथित मारपीट की स्वतंत्र जांच की मांग की थी. सुप्रीम कोर्ट ने पहले इस मामले में याचिकाकर्ताओं को दिल्ली हाईकोर्ट जाने को कहा था. अब हाईकोर्ट ने CBI जांच की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है.