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Seven Islands of Mumbai: क्या आप जानते हैं? कभी 7 अलग आइलैंड्स में बंटी थी मुंबई, जानें मायानगरी बनने की दिलचस्प कहानी

Seven Islands of Mumbai: मुंबई आज देश की मायानगरी और आर्थिक राजधानी के तौर पर जानी जाती है लेकिन कभी यह सात अलग-अलग टापुओं का समूह थी. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि कैसे ये सात टापू आपस में जुड़े और आधुनिक मुंबई का निर्माण हुआ.

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मुंबई के सिटी ऑफ सेवन आइलैंड्स बनने का इतिहास (Photo-ITG)
मुंबई के सिटी ऑफ सेवन आइलैंड्स बनने का इतिहास (Photo-ITG)

Seven Islands of Mumbai: आज की मुंबई को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि कभी यह एक नहीं, बल्कि सात अलग-अलग टापुओं (आइलैंड) का समूह हुआ करती थी. जहां आज ऊंची-ऊंची इमारतें, चौड़ी सड़कें, लोकल ट्रेन और लाखों लोगों की भागदौड़ दिखाई देती है, वहां कभी समुद्र, दलदली जमीन और ज्वार-भाटा का असर हुआ करता था. समय के साथ बड़े-बड़े निर्माण कार्य और जमीन को जोड़ने वाली परियोजनाओं ने इन सात टापुओं को एक साथ मिला दिया. इसी वजह से मुंबई को आज भी 'सिटी ऑफ सेवन आइलैंड्स' कहा जाता है.

कौन-कौन से थे मुंबई के सात टापू?
आज की मुंबई जिन सात टापुओं को जोड़कर बनी है, उनमें बॉम्बे आइलैंड, कोलाबा, ओल्ड वुमन्स आइलैंड (लिटिल कोलाबा), मझगांव, परेल, वर्ली और माहिम शामिल थे. इन टापुओं पर सबसे पहले कोली मछुआरा समुदाय रहता था. आज भी मुंबई के कई हिस्सों में उनकी संस्कृति और परंपराएं देखने को मिलती हैं.

सात टापू एक शहर कैसे बने?
17वीं शताब्दी में इन सात टापुओं का इतिहास एक नया मोड़ लेता है. साल 1661 में इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय और पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रागांजा की शादी के दौरान ये टापू दहेज के रूप में अंग्रेजी शासन को मिले. इसके कुछ साल बाद, 1668 में इन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी को लीज पर दे दिया गया. कंपनी ने यहां व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्र विकसित करना शुरू किया.

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हालांकि, अलग-अलग टापुओं के बीच दलदली जमीन और समुद्री खाड़ियां होने के कारण आवाजाही आसान नहीं थी. इसलिए समय-समय पर जमीन भरने (लैंड रिक्लेमेशन) और रास्ते बनाने का काम शुरू किया गया.

हॉर्नबी वेलार्ड परियोजना ने बदल दी तस्वीर
मुंबई को एक शहर का रूप देने में हॉर्नबी वेलार्ड (Hornby Vellard) परियोजना की अहम भूमिका रही. इसकी शुरुआत 1782 में तत्कालीन गवर्नर विलियम हॉर्नबी के समय हुई और 1784 में यह पूरी हुई. इस परियोजना के तहत वर्ली क्रीक को बंद किया गया और समुद्र से लगने वाले निचले इलाकों को भरकर आपस में जोड़ा गया. इसके बाद धीरे-धीरे बाकी टापू भी एक-दूसरे से जुड़ते गए और आधुनिक मुंबई का निर्माण हुआ.

आज भी मिलती है इतिहास की झलक
आज भले ही मुंबई एक विशाल महानगर बन चुकी हो लेकिन इसके कई इलाकों के नाम और वहां मौजूद पुरानी बस्तियां इस बात की गवाही देती हैं कि कभी यह सात अलग-अलग टापुओं का समूह था. यही अनोखा इतिहास मुंबई को भारत के सबसे दिलचस्प और खास शहरों में शामिल करता है.

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