उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव 2026 (UP Panchayat Election) को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया. अदालत ने यह भी कहा कि चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करते रह सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव होने हैं. इन चुनावों के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय सरकार का गठन किया जाता है. पंचायत चुनावों का असर गांवों के विकास कार्यों और स्थानीय राजनीति पर भी पड़ता है.
उत्तर प्रदेश में पिछली बार पंचायत चुनाव साल 2021 में हुए थे. ग्राम प्रधानों का पांच साल का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो गया था. उत्तर प्रदेश सरकार के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने अदालत के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार न्यायालय के फैसले का सम्मान करती है.
फिलहाल चुनाव की आधिकारिक तारीखों की घोषणा अभी नही हुई है.
राष्ट्रीय पंचायत राज ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह ने कहा है कि संगठन इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन महीने में पंचायत चुनाव कराने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा. उन्होंने ओबीसी आरक्षण के अधूरे आकलन, मतदाता सूची में कथित 3.94 करोड़ मतदाताओं के अंतर, जनगणना, बोर्ड परीक्षाओं और SIR का हवाला दिया. संगठन का अनुमान है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव अप्रैल 2027 से पहले नहीं हो पाएंगे.
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में तीन महीने के भीतर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को निर्धारित समयसीमा में चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने को कहा है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट के पंचायत चुनाव को लेकर दिए फैसले के बाद सरकार के सामने तीन महीने में चुनाव कराने या सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है. पंचायत चुनाव में सबसे बड़ी अड़चन OBC आरक्षण की प्रक्रिया बनी हुई है. हाईकोर्ट ने OBC आयोग के सर्वे और डेटा की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं.