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'सोनम वांगचुक हिंसा भड़का नहीं रहे थे बल्कि रोक रहे थे', सुप्रीम कोर्ट में बोलीं पत्नी गीतांजलि

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था.लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने हलफनामा दायर कर इन आरोपों से इनकार किया है. प्रशासन का कहना है कि वांगचुक ऐसी गतिविधियों में लिप्त थे जो राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हानिकारक थीं.

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गीतांजलि ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि हिंसा सोनम वांगचुक के बयानों के कारण नहीं हुई थी. (File Photo- PTI)
गीतांजलि ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि हिंसा सोनम वांगचुक के बयानों के कारण नहीं हुई थी. (File Photo- PTI)

जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका के जरिए केंद्र और लद्दाख प्रशासन के दावों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि उनके पति के भाषणों के लहजे को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है ताकि उन्हें एक अपराधी के रूप में दिखाया जा सके, जबकि वास्तविकता यह है कि वे हिंसा को रोकने की अपील कर रहे थे.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक वांगचुक की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ के समक्ष सोनम वांगचुक के एक भाषण का वीडियो चलाया. सिब्बल ने तर्क दिया कि यह वीडियो वांगचुक द्वारा भूख हड़ताल तोड़ने के दौरान का है, जिसमें वे लोगों से हिंसा बंद करने की अपील कर रहे थे. सिब्बल ने इसकी तुलना महात्मा गांधी द्वारा 'चौरी-चौरा' की घटना के बाद उठाए गए कदमों से की.

सिब्बल ने कहा, "भाषण का लहजा किसी भी तरह से राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं था, बल्कि यह उस हिंसा को शांत करने के लिए था जो 24 सितंबर को हुई थी."

NSA के तहत हिरासत पर उठाए सवाल

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था. प्रशासन ने उन पर लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया है, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी.

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सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि हिरासत के आदेश में जिन चार वीडियो का हवाला दिया गया था, वे वांगचुक को उपलब्ध ही नहीं कराए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के आधारों को बताने में 28 दिनों की भारी देरी की गई, जो संविधान के अनुच्छेद 22 (मनमानी गिरफ्तारी के खिलाफ सुरक्षा) का स्पष्ट उल्लंघन है.

'सुरक्षा के लिए खतरा हैं वांगचुक'

दूसरी ओर, लेह के जिला मजिस्ट्रेट ने हलफनामा दायर कर इन आरोपों से इनकार किया है. प्रशासन का कहना है कि वांगचुक ऐसी गतिविधियों में लिप्त थे जो राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए हानिकारक थीं. प्रशासन ने दावा किया कि हिरासत के सभी आधार और सामग्री वांगचुक को समय पर सूचित कर दी गई थी.

'यह उनकी 5 साल की तपस्या की विफलता होगी'

गीतांजलि ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि 24 सितंबर की हिंसा सोनम वांगचुक के बयानों के कारण नहीं हुई थी. उन्होंने बताया कि वांगचुक ने खुद सोशल मीडिया पर हिंसा की निंदा की थी और कहा था कि "हिंसा लद्दाख की पांच साल की शांतिपूर्ण तपस्या को विफल कर देगी." उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे दुखद दिन बताया था.

मामले की सुनवाई अधूरी रही और सुप्रीम कोर्ट अब 12 जनवरी को इस पर आगे विचार करेगा.

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