नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) भारत की एक अपेक्षाकृत नई राजनीतिक पार्टी है, जिसका गठन वर्ष 2022 में किया गया था. पार्टी का मुख्यालय पश्चिम बंगाल के हावड़ा में स्थित है. गठन के बाद से पार्टी ने पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की है.
NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में चार उम्मीदवार मैदान में उतारे थे. इनमें उनाकोटी जिले के कैलाशहर विधानसभा क्षेत्र से जहांगीर अली, चावमानु विधानसभा क्षेत्र से बरजेडा त्रिपुरा, अंबासा विधानसभा क्षेत्र से कृष्ण कुमार देबबर्मा और धलाई जिले के करमछारा विधानसभा क्षेत्र से रीता शील हलाम शामिल थे.
पार्टी से जुड़े नेता जहांगीर अली के अनुसार, NCPI ने पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा दोनों राज्यों में अपनी उपस्थिति बनाने का प्रयास किया है.
हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में यह चर्चा भी सामने आई कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) का एक गुट NCPI में शामिल हो सकता है. हालांकि, जहांगीर अली ने कहा कि उन्हें भी ऐसी खबरें सुनने को मिली हैं, लेकिन इस संबंध में पार्टी को कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है और स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.
तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग हुए 20 बागी सांसदों वाली नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) को मंगलवार को होने वाली एनडीए की बैठक में शामिल होने का न्योता मिला है. बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से एनसीपीआई में अपने विलय को मान्यता देने की मांग की है.
20 सांसदों पर क्या बोलीं NCPI की पूर्व अध्यक्ष?
टीएमसी के 28 बागी सांसदों में से 20 ऐसे हैं जिन्होंने अब तक किसी चुनाव में पार्षद भी नहीं बने हैं. उन्होंने रविवार को त्रिपुरा की नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के साथ विलय की घोषणा की. साथ ही, ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर सदन में उनके लिए अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग भी की.
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने अपनी तरफ से बड़े ही सुरक्षित कदम बढ़ाए हैं, लेकिन संविधान और कानून के जानकार उनकी तरफ से अपनाई गई प्रक्रिया को पक्का नहीं मान रहे हैं. एक्सपर्ट की नजर में कई खामियां हैं, जो उनके रास्ते का रोड़ा साबित हो सकती हैं. और, सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले भी यही कहते हैं.
तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों द्वारा नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने और एनडीए को समर्थन देने की घोषणा के बाद मामला संवैधानिक बहस का विषय बन गया है. बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग समूह के रूप में मान्यता और अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की है.
TMC के 20 बागी सांसद NCPI में शामिल हो गए. इससे यह छोटी-सी पार्टी रातोंरात बंगाल की 42 में से 20 सीटों के साथ सबसे बड़ी संसदीय ताकत बन गई, जो BJP, TMC और कांग्रेस से भी आगे है. लेकिन पार्टी की हकीकत चौंकाने वाली है. यह त्रिपुरा में रजिस्टर्ड एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है, जो 2023 पंचायत चुनाव में एक भी सीट नहीं जीत सकी.
पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की पार्टी टूट गई है. विधायकों के बाद सांसद भी अलग हो गए हैं. टीएमसी के 20 सांसदों ने अपना गुट बनाकर ममता बनर्जी से अलग होकर एनसीपीआई में खुद को विलय कर लिया है. एनसीपीआई कौन सी पार्टी है, जो टीएमसी के बागियों का नया ठिकाना बनी है?
ममता बनर्जी के पार्टी टीएमसी के कई सांसदों ने बगावत की. सीधे NDA में जाते तो सांसदी जाती. इसलिए टीएमसी के बागी सांसदों ने NCPI पार्टी में विलय ऐलान किया. यह कानूनी तरकीब थी जिससे दलबदल विरोधी कानून से बचा जा सके.
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों ने एक क्षेत्रीय दल नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल होने का ऐलान किया है. इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि वह एनडीए का समर्थन करेंगे. काकोली घोष और सुदीप बंद्योपाध्याय ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात के बाद ये ऐलान किया. दूसरी ओर अभिषेक बनर्जी ने स्पीकर को पत्र लिखकर किसी भी अलग गुट को मान्यता न देने की मांग की है.
TMC के बागियों ने आखिर NCPI जैसे दल में ही क्यों विलय किया? जानकार कहते हैं कि पार्टी से अलग होते ही पहले दिन मूल पार्टी के नाम और सिंबल पर कानूनी दावा कर नहीं सकते. ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के तहत, बागियों को पहले खुद को एक वैध और सुरक्षित राजनीतिक समूह के रूप में स्थापित करना था. इसलिए उन्होंने अस्थाई तौर पर NCPI में विलय का रास्ता चुना ताकि दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सांसदी रद्द ना हो.
टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने NCPI में विलय कर लिया. NCPI की पूर्व अध्यक्ष शिवली कुंडू ने कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही NCPI के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. TMC के बागी सांसदों के पार्टी में विलय पर शिवली ने दावा किया कि वो NDA के साथ पहले से ही जुड़े थे. देखें वीडियो.
सबसे पहले सियासत की उस डील से खबरदार करते हैं. जहां चमत्कार हुआ है. जहां एक पार्टी रातों रात बीस सांसद की पार्टी बन गई. चमत्कार ये कि एक पार्टी जिसके अध्यक्ष से पूछिए कि आपके यहां 20 सांसद शामिल हो गए, तो उनको पता नहीं है. कल तक जिसका एक पार्षद तक भारत की राजनीति में नहीं हुआ. वो NCPI नाम की पार्टी को बीस सांसदों ने गोद ले लिया. जब टीएमसी के बागी बीस सांसद नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हो जाते हैं.
टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने अपना गुट बनाकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर लिया. लेकिन इस बीच NCPI के संगठन सचिव शांतनु डे ने कहा कि उन्हें विलाय के बारे में खुद सोशल मीडिया से पता चला. शांतनु ने कहा कि उनसे किसी ने TMC के बागी सांसदों के NCPI में विलय के बारे में नहीं बताया. देखें वीडियो.