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नौतपा

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नौतपा (Nautapa) भारतीय परंपरा, ज्योतिष और मौसम से जुड़ा एक पुराना मान्यता प्राप्त समय माना जाता है. इसका इतिहास हजारों साल पुरानी भारतीय खगोलीय और पंचांग प्रणाली से जुड़ा हुआ है. “नौतपा” शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- “नौ” यानी 9 और “तपा” यानी तपन या गर्मी. मतलब, ऐसे 9 दिन जब सूर्य की गर्मी सबसे ज्यादा महसूस होती है.

आमतौर पर नौतपा के दौरान तापमान काफी बढ़ जाता है. तेज धूप, गर्म हवाएं और लू लोगों को परेशान करती हैं. उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी राज्यों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है. दोपहर के समय बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है और कई जगह तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है.

प्राचीन भारतीय ज्योतिष के अनुसार, जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तब नौतपा की शुरुआत मानी जाती है. रोहिणी नक्षत्र को बहुत प्रभावशाली नक्षत्र माना गया है. पुराने समय में ऋषि-मुनि और ज्योतिषी सूर्य, चंद्रमा और नक्षत्रों की स्थिति देखकर मौसम का अनुमान लगाया करते थे. उसी परंपरा से नौतपा का महत्व भी जुड़ा.

प्राचीन भारतीय ग्रंथों और पंचांगों में भी सूर्य की चाल और गर्मी के प्रभाव का उल्लेख मिलता है. पहले के समय में आधुनिक मौसम विभाग या वैज्ञानिक तकनीकें नहीं थीं, इसलिए लोग प्रकृति और खगोलीय संकेतों के आधार पर मौसम का अनुमान लगाते थे. नौतपा भी उसी पारंपरिक ज्ञान का हिस्सा माना जाता है.

इतिहास में यह भी माना गया कि नौतपा की तेज गर्मी धरती को अच्छी तरह तपाती है. इससे वातावरण में बदलाव होता है और बाद में मानसून की बारिश के लिए परिस्थितियां बनती हैं. हालांकि आधुनिक विज्ञान नौतपा को सीधे मानसून से जोड़कर नहीं देखता, लेकिन भारतीय समाज में इसकी सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यता आज भी बनी हुई है.

आज भी हर साल मई-जून के दौरान नौतपा की चर्चा होती है. लोग इसे भीषण गर्मी के दौर के रूप में जानते हैं और इससे बचने के लिए खास सावधानी बरतते हैं.

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